B.Com 2nd Year Accounting For Material Short Notes

B.Com 2nd Year Accounting For Material Short Notes :- Hii friends this site is a very useful for all the student. you will find all the Cost Accounting Question Paper Study Material Question Answer Examination Paper Sample Model Practice Notes PDF available in our site. parultech.com .


खण्ड ‘अ’ : 

लघु उत्तरीय प्रश्न

 प्रश्न 1 – सामग्री पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए। 

Write a short note on Materials.

उत्तर : सामग्री (Materials)-वस्तु की उत्पादन लागत का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा सामग्री होती है क्योंकि सामग्री के अभाव में किसी भी वस्तु का उत्पादन असम्भव है। सामग्री दो प्रकार की होती है-प्रत्यक्ष सामग्री एवं अप्रत्यक्ष सामग्री।

(i) प्रत्यक्ष सामग्री (Direct Material)-जिस सामग्री का प्रयोग, वस्तु के निर्माण में मुख्य रूप से किया जाता है, उसे प्रत्यक्ष सामग्री कहते हैं। इस प्रकार की सामग्री का निर्मित वस्तु में भौतिक अस्तित्व रहता है तथा उत्पादन में लगी प्रत्यक्ष सामग्री की मात्रा और मूल्य का ज्ञान सरलता से किया जा सकता है। उदाहरण के लिए-फर्नीचर के निर्माण में लकड़ी, चीनी के निर्माण में गन्ना, पुस्तक के निर्माण में कागज इत्यादि।

(ii) अप्रत्यक्ष सामग्री (Indirect Material)-किसी वस्तु के निर्माण में प्रयुक्त ऐसी सामग्री जो वस्तु के निर्माण में प्रयोग तो होती है, परन्तु उसका भौतिक अस्तित्व नहीं होता अर्थात् वह सामग्री उत्पादित वस्तु का हिस्सा नहीं बनती है, अप्रत्यक्ष सामग्री कहलाती है। उदाहरण के लिए-बुक बाइन्डिग में प्रयुक्त लेही या फेवीकोल, विक्रय के लिए सामग्री की पैकिंग, मशीनों को कार्यरत रखने हेतु आवश्यक तेल या चिकनाई इत्यादि।

प्रश्न 2 – निरन्तर-आगमन पद्धति को समझाइए एवं उदाहरण सहित इसके लाभों को बताइए।

Explain perpetual inventory system and mention its advantages with examples. 

उत्तर – निरन्तर आगमन पद्धति का अर्थ

(Meaning of Perpetual Inventory System) 

सामग्री को एक साथ प्राप्त नहीं किया जाता है, उसे समय-समय पर बाजार भाव के अनुसार तथा आवश्यकता के अनुसार क्रय किया जाता है तथा आवश्यकता के अनुसार ही विभागों को निर्गमित किया जाता है, अत: सामग्री प्राप्त व निर्गमन की उपर्युक्त व्यवस्था ‘निरन्तर आगमन पद्धति’ कहलाती है। वह पद्धति जिसमें सामग्री में प्रत्येक आगमन व निर्गमन के पश्चात् शेष सामग्री का नियमित रूप से लेखा होता है ‘निरन्तर आगमन प्रणाली’ कहलाती है। निरन्तर आगमन प्रणाली के होते हुए भी यह आवश्यक है कि सामग्री की सामयिक निरन्तर अथवा भौतिक गणना होती रहे। इस पद्धति के मुख्य रूप से अग्रलिखित लाभ हैं-

(1) प्रत्येक सामग्री का शेष स्टॉक किसी भी समय ज्ञात किया जा सकता है। जिसके कारण वर्ष के मध्य में किसी भी समय अन्तिम खाते तैयार किए जा सकते हैं। अन्तिम खाते तैयार करते समय भौतिक गणना की आवश्यकता नहीं होती है।

(2) सामग्री का क्रय करने में मितव्ययिता, उपयोग करने में मितव्ययिता, चोरी व नष्ट होने से बचाव के कारणों से उत्पादन लागत में कमी होती है।

(3) इस पद्धति में सामग्री से सम्बन्धित सभी लेखे सर्वदा ठीक तथा पूर्ण रखे जाते हैं।

(4) भौतिक गणना के कारण स्टोर में किसी भी प्रकार की चोरी तथा गड़बड़ी नहीं हो पाती है। किसी भी लापरवाही का शीघ्र पता चल जाता है। यदि कोई सामग्री पुरानी पड़ी हुई है अथवा नष्ट हो रही है तो उसका भी शीघ्र पता चल जाता है। भौतिक गणना से अप्रचलित सामग्रियों का भी पता चल जाता है।

(5) स्टोर कीपर को यह ज्ञात रहता है कि किस विभाग को किस समय कितनी सामग्री की आवश्यकता होगी, अत: भविष्य में खरीदी जाने वाली सामग्री की पूर्व योजना बना दी जाती है। क्रय किए जाने वाले माल की बानगी व टेण्डर प्राप्त करके सस्ती लागत पर अच्छा माल क्रय किया जा सकता है।

(6) सामग्री की निरन्तर आगमन पद्धति से कर्मचारियों पर नैतिक प्रभाव पड़ता है। सामग्री का ठीक लेखा रखने, टूट-फूट व चोरी से बचाने का वे निरन्तर प्रयास करते हैं।

(7) इस पद्धति में सामग्री के निर्गमन पर भी पूर्ण रूप से नियन्त्रण रखा जाता है। प्रत्येक कार्य में प्रयुक्त सामग्री का मूल्य पता रहता है, अतः प्रत्येक कार्य की लागत ज्ञात हो जाती है।

(8) इस पद्धति में सामग्री का क्रय आवश्यकतानुसार ही किया जाता है। इस दृष्टिकोण से न तो सामग्री का क्रय अधिक हो पाता है और न आवश्यकता से कम ही होता है, जिसके कारण अनावश्यक सामग्री में पूँजी विनियोग नहीं होता तथा उत्पादन क्रिया में अधिक कार्यशील पूँजी की आवश्यकता नहीं होती है।

प्रश्न 3 – सामग्री के न्यूनतम स्तर का क्या आशय है? 

What is Minimum level of Material ?

उत्तर – सामग्री का न्यूनतम स्तर स्कन्ध की वह मात्रा है जिसको हर समय बनाए रखना होता है। यह मात्रा पूर्व-निश्चित होती है जिसके अभाव में उत्पादन कार्य अवरुद्ध न हो सके। यह सीमा कारखाने के सामान्य उपयोग दर, नए माल की पूर्ति में लगने वाला समय तथा पुन: आदेश सीमा आदि बातों पर निर्भर करती है। सूत्रानुसार

Minimum level = Reordering Level – (Normal Usage Rate x

Normal Reorder Pd.) 

प्रश्न 4 – अ ब स (ABC) विश्लेषण से आप क्या समझते हो? 

What do you understand by ABC Analysis ?उत्तर – अ, ब, स प्रणाली (A, B, C) एक चयनात्मक नियन्त्रण पद्धति है जिसका उपयोग सामग्री तालिका का अनुमान लगाने, आदेशों के निर्गमन, प्राप्ति एवं निरीक्षण, सुरक्षा, स्टॉक का निर्धारण करने आदि क्षेत्रों में किया जाता है। इसके अन्तर्गत किसी संस्था की सामग्री-सूची की

विभिन्न सामग्री मदों की लागत महत्ता को मापा जाता है। सर्वाधिक मूल्य की सामग्री मदों को ‘A’ श्रेणी में रखा जाता है। न्यूनतम मूल्य की सामग्री मदों को ‘C’ श्रेणी में रखते हैं, जबकि इन दोनों श्रेणियों के बीच की सामग्री मदों को ‘B’ श्रेणी के अन्तर्गत रखते हैं। इस प्रकार विभिन्न मदों को श्रेणीबद्ध करने के बाद ‘A’ श्रेणी की मदों के लिए विशेष नियन्त्रण उपाय, ‘B’ श्रेणी में मध्य व ‘C’ श्रेणी में अपेक्षाकृत शिथिल नियन्त्रण रखा जाता है। दूसरे शब्दों में, ‘A’ श्रेणी से सम्बन्धित सामग्री मंदों की निरन्तर जाँच की जानी चाहिए, ‘B’ श्रेणी में आने वाली मदों की एक निश्चित समयान्तर के पश्चात् बिना सूचना दिए जाँच की जानी चाहिए, जबकि ‘C’ श्रेणी की सामग्री मदों की भौतिक जाँच वर्ष में एक या दो बार की जानी चाहिए।

प्रश्न 5 – लिफो और फिफो विधियाँ क्या हैं? 

What are LIFO and FIFO methods ? 

उत्तर – बाद में आना पहले जाना पद्धति

(Last in First Out Method : LIFO) 

यह पद्धति फीफो पद्धति के बिल्कुल विपरीत है। इस पद्धति के अन्तर्गत सबसे बाद में क्रय की हुई सामग्री को सबसे पहले, उसके लागत मूल्य पर निर्गमित किया जाता है और जब सामग्री समाप्त हो जाती है तो उससे ठीक पूर्व में आयी हुई सामग्री निर्गमित की जाती है। इस पद्धति के अन्तर्गत भी यह मान लिया जाता है कि विभिन्न तिथियों में क्रय की गई सामग्रियाँ अलग-अलग रखी हुई हैं। वास्तव में, क्रय की गई सम्पूर्ण सामग्री इकट्ठी हो जाती है, अलग-अलग नहीं रखी जाती। यह मान्यता केवल निर्गमित सामग्री के मूल्यांकन से सम्बन्धित है।

लाभ-(1) यह पद्धति गणना करने एवं समझने में सरल है। (2) निर्गमन मूल्य बाजार मूल्य के समीप होने के कारण उत्पादित वस्तु या उपकार्य का सही लागत मूल्य ज्ञात होता है।

दोष-(1) अन्तिम स्टॉक का मूल्यांकन बहुत पुराने मूल्यों पर होता है जो व्यवसाय की सही आर्थिक स्थिति प्रकट नहीं करता। (2) यह पद्धति व्यावहारिक नहीं है क्योंकि व्यवहार में जो माल पहले आता है वह ही पहले निर्गमित किया जाता है। (3) अलग-अलग मूल्यों के अनुसार सामग्री रखने के लिए बहुत अधिक स्थान की आवश्यकता होती है।

पहले आना पहले जाना पद्धति

(First in First Out Method : FIFO) 

जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है कि इस पद्धति के अन्तर्गत जो सामग्री स्टोर में पहले आती है, उसे ही उसके लागत मूल्य पर पहले निर्गमित किया जाता है अर्थात् जिस क्रम में स्टोर में सामग्री आती है उसे उसी क्रम में उनके लागत मूल्य पर निर्गमित किया जाता है। इस पद्धति में काल्पनिक रूप से यह मान लिया जाता है कि स्टोर में विभिन्न तिथियों में आने वाली सामग्रियों को उनके आगमन के क्रम के अनुसार अलग-अलग रखा हुआ है।लाभ – (1) यह पद्धति सरल एवं व्यावहारिक है। (2) पुरानी सामग्री पहले निर्गमित की जाती है, अत: सामग्री के खराब होने या नष्ट होने का भय नहीं रहता। (3) अन्त में बची हुइ सामग्री का मूल्य लगभग वर्तमान बाजार मूल्य के बराबर होता है।

दोष–(1) विभिन्न तिथियों में क्रय की गई सामग्रियों को अलग-अलग मूल्यों के अनुसार संग्रह करना बड़ा कठिन कार्य है। (2) एक ही तिथि को अलग-अलग उपकार्यों के लिए निर्गमित सामग्री का मूल्य अलग-अलग हो सकता है। (3) पुराने मूल्यों पर निर्गमन किए जाने के कारण वस्तु की उत्पादन लागत बाजार मूल्य के बराबर नहीं होती है।

प्रश्न 7 – सामग्री निर्गमन के मूल्यांकन सम्बन्धी विभिन्न पद्धतियों का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।

State briefly the various methods for pricing the issue of materials. 

उत्तर – उत्पादन कार्य के लिए निर्गमित की गयी सामग्री का मूल्यांकन

(Pricing of Material issued for Production Work) 

स्टोर विभाग द्वारा उत्पादन विभाग को सामग्री निर्गमित कर देने के बाद सामग्री माँग पत्र की एक प्रति लागत-लेखा विभाग को भेज दी जाती है। यह विभाग उत्पादन विभागों को निर्गमित सामग्री का किसी निश्चित सिद्धान्त व निश्चित विधि के आधार पर मूल्यांकन करता है। सामान्यत: सामग्री के मूल्य निर्धारण के लिए निम्नलिखित विधियाँ प्रयोग में लायी जाती हैं –

1. लागत मूल्य विधियाँ (Cost Price Methods)

(i) विशिष्ट लागत विधि (Specific Cost Method) 

(ii) पहले आना, पहले जाना विधि (First In, First Out Method) 

(iii) बाद में आना, पहले जाना विधि (Last In, First Out Method) 

(iv) तेज मूल्य पहले (Highest In, First Out Method) 

(v) आधार स्कन्ध विधि (Base Stock Method)। 

2. औसत लागत विधियाँ (Average Cost Methods)

(i) साधारण औसत लागत विधि (Simple Average Cost Method) 

(ii) भारित औसत लागत विधि (Weighted Average Cost Method)

अन्य विधियाँ (Other Methods)-

(i) बढ़े मूल्य पद्धति (Inflated Price Method) 

(ii) प्रमापित लागत पद्धति (Standard Cost Method) 

(iii) बाजार मूल्य पद्धति (Market Price Method)

प्रश्न 8 – बिन-पत्रक क्या है?

What is Bin-card ?उत्तर – सामग्री-गृह में जिन खानों में छोटी-छोटी वस्तुएँ रखी जाती हैं, उन्हें बिन कहते हैं। प्रत्येक खाने के ऊपर एक बिन-पत्रक लटका दिया जाता है तथा खाने के ढकने पर बिन-पत्रक लगाने की भी व्यवस्था होती है। इस पत्रक में सामग्री के आवागमन का लेखा किया जाता है तथा सामग्री का शेष भी निकाला जाता है। बिन-पत्रक को देखकर कभी भी सामग्री की मात्रा, जो स्टॉक में है, का पता लगाया जा सकता है।

Follow Me

Facebook

B.Com 1st 2nd 3rd Year Notes Books English To Hindi Download Free PDF

Leave a Reply

Your email address will not be published.

*