B.Com 2nd Year Basis Of Charge Long Notes In Hindi

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विस्तृत उत्तरीय प्रश्न –

प्रश्न 1 – निवास-स्थान के आधार पर करदाता तीन श्रेणियों में विभक्त किए गए हैं। इन श्रेणियों को परिभाषित करते हुए विवेचना कीजिए कि किस प्रकार ये करदाता के कर-दायित्व को प्रभावित करती हैं?

Assessee have been divided into three categories on the basis of residence. Explain how these categories affect the tax liability of an assessee? 

अथवा आयकर के लिए करदाताओं का निवास-स्थान कैसे निर्धारित किया जाता है? आयकर अधिनियम, 1961 के अन्तर्गत निवास स्थान का कर दायित्व पर क्या प्रभाव पड़ता है?

How is the residence of an assessee is determined ? What is the effect of residential status on tax liability under the Income Tax Act, 1961? 

अथवाआयकर भार करदाता की निवासीय स्थिति पर निर्भर करता है।विवेचना कीजिए।

“The incidence of income tax depends upon the residential status of an assessee.” Discuss.

उत्तर – निवासीय स्थिति का निर्धारण

(Determination of Residential Status) 

आयकर अधिनियम की धारा 4 करदाता के आयकर दायित्व को उत्पन्न करती है। इसके अनुसार प्रत्येक श्रेणी के करदाता को उसकी भारतवर्ष की कल आय पर कर-निधारण वर्ष में लागू वित्त अधिनियम की निर्धारित दरों से उस वर्ष तक संशोधित आयकर अधिनियम, 1961 के नियमों के अनुसार आयकर देना होता है।

आयकर अधिनियम की धारा 5 ‘कुल आय’ का क्षेत्र परिभाषित करती है। इस धारा अनुसार करदाता की कुल आय उसके गत वर्ष में निवास स्थान के आधार पर निधारित जाती है।

आयकर अधिनियम की धारा 6 में व्यक्ति, हिन्दू अविभाजित परिवार एवं कम्पनी, फर्म तथा अन्य व्यक्तियों के निवास स्थान को निर्धारित करने के सम्बन्ध में नियम दिए गए हैं।

निवास स्थान के अनुसार करदाताओं को निम्नलिखित तीन श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है

(1) निवासी (Resident) 

(2) असाधारण निवासी (Not-ordinarily Resident) 

(3) अनिवासी (Non-resident)।

एक व्यक्ति-विशेष का निवास-स्थान

(Residence of an Individual) 

एक व्यक्ति विशेष के निवास स्थान का निर्धारण करने हेतु आयकर अधिनियम की धारा 6 में जो नियम दिए गए हैं उनको हम दो खण्डों में विभाजित करेंगे

1. आधारभूत शर्ते (Basic Conditions)-धारा 6 (1) के अनुसार

(1) वह गत वर्ष में कुल मिलाकर 182 दिन या इससे अधिक दिन के लिए भारत में रहा । हो। यहाँ कुल मिलाकर भारत में रहने से आशय विभिन्न समयों एवं विभिन्न स्थानों पर भारत में रहने से है।

(2) गत वर्ष से पूर्व के चार वर्षों में वह कुल मिलाकर कम-से-कम 365 दिन भारत में रहा हो और साथ ही गत वर्ष में कम-से-कम 60 दिन (कुछ विशेष दशाओं में 182 दिन) भारत में रहा हो।

अपवाद (Exceptions)-भारतीय नागरिक की दशा में –

(i) धारा 6 (1) में दी गई व्याख्या के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक गत वर्ष में विदेश में सेवा कार्य (Service) के लिए या किसी भारतीय जहाज के कर्मीदल (Crew) के सदस्य के रूप में गत वर्ष में भारत से बाहर गया है तो उसके लिए उपर्युक्त शर्त (2) में दी गई अवधि 60 दिन’ के स्थान पर 182 दिन’ मानी जाएगी।

(1) धारा 6 (1) में दी गई व्याख्या के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक अथवा भारतीय मूल का व्यक्ति किसी भी प्रयोजनार्थ विदेश से गत वर्ष में भारत में आता है तो उसके | लिए उपर्युक्त शर्त (2) में दी गई अवधि 60 दिन’ के स्थान पर 182 दिन’ मानी जाएगी।

ध्यान रहे ‘भारतीय मूल’ का व्यक्ति वह होता है जिसके माता-पिता अथवा दादा-दादी | अथवा नाना-नानी अविभाजित भारत में जन्मे हों। भारत में भ्रमण पर आने से आशय भारत में | किसी भी काम से आने से है, चाहे व्यापार के लिए अथवा व्यक्तिगत कार्य से अथवा रिश्तेदारों से मिलने के लिए आया हो।]

2. अतिरिक्त शर्ते (Additional Conditions)-धारा 6 (6) (a) के अनुसार –

(1) वह गत वर्ष से पूर्व 10 वर्षों में से कम-से-कम 2 वर्ष भारत में निवासी के रूप में रहा हो, अर्थात् गत वर्ष से पूर्व के 10 वर्षों में से 2 वर्षों में उपर्युक्त कोटि ‘अ’ की दोनों शर्तों में से किसी एक शर्त को पूरा करता रहा हो।

(2) वह गत वर्ष से 7 वर्षों में कुल मिलाकर कम-से-कम 730 दिन भारत में रहा हो।

आयकर अधिनियम की धारा 6 (1) के अनुसार एक व्यक्ति विशेष की निवार स्थिति को निम्नलिखित तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है

(i) निवासी (Resident)-एक व्यक्ति गत वर्ष में निवासी तब ही माना जाता जबकि वह आधारभूत शर्तों की दोनों शर्तों में से कम-से-कम एक शर्त तथा अतिरिक्त शर्तों की दोनों शर्ते पूरी करता हो।

(ii) असाधारण निवासी (Not-ordinarily Resident)-एक व्यक्ति असाधारण निवासी तब ही माना जाएगा, जबकि वह आधारभूत शर्तों की दोनों शर्तों में से कम-से-कम एक शर्त पूरी करता हो तथा अतिरिक्त शर्तों की दोनों शर्तों में से कम-से-कम एक शर्त परी न करता हो या दोनों शर्ते पूरी न करता हो।

(iii) अनिवासी (Non-resident)-एक व्यक्ति गत वर्ष में अनिवासी तब ही माना जाता है, जबकि वह आधारभूत शर्तों की दोनों शर्तों में से एक भी शर्त को पूरा न करे। ऐसे व्यक्ति के लिए अतिरिक्त शर्तों पर विचार करने की आवश्यकता नहीं होती।

व्यक्ति की निवासीय-स्थिति का निर्धारण 

(Determination of Residential Status of an Individual)

स्तर आधारभूत शर्तों की दो शर्ते अतिरिक्त शर्ते
निवासी
असाधारण निवासी
अनिवासी
कम-से-कम एक शर्त पूरी हो ।
कम-से-कम एक शर्त पूरी हो ।
एक भी शर्त पूरी न हो ।
दोनों शर्ते पूरी हों ।
केवल एक शर्त पूरी हो या एक भी शर्त पूरी न हो।
अनावश्यक।

निवास-स्थान तथा कर-दायित्व

(Residence and Tax Liability) 

किसी भी करदाता का कर-दायित्व उसके निवास स्थान के आधार पर निश्चित किया जाता है। आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 5 के अन्तर्गत इस सन्दर्भ में निम्नलिखित नियम दिए गए हैं

1. निवासी (Resident)-एक निवासी करदाता की कुल आय में निम्नलिखित आय सम्मिलित की जाती है

(i) भारत में गत वर्ष प्राप्त हुई या प्राप्त हुई समझी जाने वाली आय, चाहे वह भारत में उपार्जित या उदय हुई हो या भारत के बाहर, अर्थात् कहीं भी उपार्जित या उदय हुई हो।

(ii) भारत में गत वर्ष उपार्जित या उदय हुई अथवा उपार्जित या उदय हुई समझा वाली आय, चाहे वह भारत में प्राप्त हुई हो या भारत से बाहर।

(iii) गत वर्ष में भारत के बाहर उपार्जित अथवा उदय हुई आय।

2. असाधारण निवासी (Not-ordinarily Resident)-एक असाधारण निवासी करदाता की कुल आय में निम्नलिखित आय सम्मिलित की जाती हैं

(i) भारत में गत वर्ष प्राप्त हुई या प्राप्त हुई समझी जाने वाली आय, चाहे वह भारत में उपार्जित या उदय हुई हो या भारत के बाहर, अर्थात् कहीं भी उपार्जित अथवा उदय हुई हो।

(ii) भारत में गत वर्ष उपार्जित या उदय हुई अथवा उपार्जित या उदय हुई समझी जाने वाली आय, चाहे वह भारत में प्राप्त हुई हो या भारत के बाहर।

(iii) गत वर्ष में भारत के बाहर उपार्जित या उदय हुई आय अथवा उपार्जित या उदय हुई समझी जाने वाली आय, ऐसी आय जो भारत में नियन्त्रित व्यापार से अथवा भारत में स्थित पेशे से उत्पन्न हुई हो।

3. अनिवासी (Non-resident)-अनिवासी करदाता की कुल आय में निम्नलिखित आय सम्मिलित की जाती हैं

(i) भारत में गत वर्ष प्राप्त हुई या प्राप्त हुई समझी जाने वाली आय, चाहे वह भारत में उपार्जित अथवा उदय हुई हो या भारत के बाहर, अर्थात् कहीं भी उपार्जित या उदय हुई हो।

(ii) भारत में गत वर्ष उपार्जित या उदय हुई अथवा उपार्जित या उदय हुई समझी जाने वाली आय, चाहे वह भारत में प्राप्त हुई हो या भारत के बाहर।

उपर्युक्त नियमों को निम्नलिखित सारणी की सहायता से सरलता से समझा जा सकता है

निवासीय स्थिति के आधार पर कुल कर-योग्य आय 

(Total Taxable income on the basis of Residential Status)

क्र० सं० आय का विवरण निवासी असाधारण निवासी अनिवासी
1.  भारत में गत वर्ष में प्राप्त होने वाली या प्राप्त हुई समझी जाने वाली आय, चाहे वह भारत में उपार्जित या उदय हुई हो या भारत के बाहर। कर-योग्य कर-योग्य कर-योग्य
2. भारत में गत वर्ष में उपार्जित या उदय हुई अथवा उपार्जित या उदय हुई समझी |जाने वाली आय, चाहे वह भारत में प्राप्त हुई हो या भारत के बाहर। कर-योग्य कर-योग्य कर-योग्य
3. गत वर्ष में भारत के बाहर उपार्जित या उदय हुई आय जो भारत से नियन्त्रित व्यापार से या भारत में स्थापित पेशे से उत्पन्न हुई हो। कर-योग्य कर-योग्य कर-योग्य

प्रश्न – 2 श्री गणेश की गत वर्ष 2017-18 की आय का विवरण इस प्रकार है –

(i) कानपुर में स्थित कृषि भूमि से आय – रू. 23,000 

(ii) चेन्नई में कपड़े के व्यापार से आय, इसका प्रबन्ध लन्दन से होता है – 30,000 

(iii) जापान में इलेक्ट्रॉनिक उद्योग से आय, इसका मुख्यालय

जापान में है। इस आय में से रू. 50,000 भारत में लाए गए  – 1,50,000 

(iv) ईरान में व्यापार से आय ( इसमें भारत द्वारा नियन्त्रित व्यापार की आय रू. 35,000 शामिल है।) – 80,000 

(v) श्रीलंका स्थित कृषि भूमि से आय, जो वहीं पर एक बैंक में जमा की – 50,000 

(vi) सुधीर जो अनिवासी है, को भारत में व्यापार करने हेतु दिए गए ऋण पर ब्याज – 28,000 

कर – निर्धारण वर्ष 2018-19 के लिए उसकी कुल आय की गणना कीजिए यदि वह भारत में ( अ ) साधारण निवासी है, (ब) असाधारण निवासी है और (स) अनिवासी है।

The following are the particulars of Mr. Ganesh’s income during the previous year 2017-18 :

(i) Agriculture income from land situated in Kanpur – 23,000

(ii) Income from business in Chennai, the business managed from London – 30,000

(iii) Income from electronics industry in Japan, its head office situated in Japan, out of this income रू. 50,000 brought in India – 1,50,000

(iv) Income from business in Iran ( 35,000 the income from a business which is controlled from India is included)

80,000 

(v) Income from agricultural land in Ceylon and deposited in a bank there 50,000 

(vi) Sudhir who is a non-resident paid interest on

loan provided to him for a business carried on in India

28,000 

Compute his taxable income for the assessment year 2018-19, if he is (a) Ordinarily resident, (b) Not ordinarily resident and 

(c) Non-resident. . 

हल (Solution): Computation of Taxable Income

(for the Assessment Year 2018-19) 

Resident N.O.R Non

(i) Agriculture Income (Exempt)  – – –

(ii) Income from business in Chennai (Income accrue in India)  30,000 30,000 30,000

(iii) Business income in Japan (Taxable in case of resident only. Income brought to India not liable to tax) 1,50,000 – –

(iv) (1) Income from business in Iran (ii) Business controlled from 80,000 – –

India (N.O.R. is liable to tax on business income which is controlled from India) 

(v) Income from Agricultural land in Ceylon (Land not situated in India, hence income taxable)  – – –

50,000 – –

(vi) Interest from non-resident on loan for business carried on India 28, 000 28,000 28,000

(Deemed to accrue in India)

Taxable Inome 3,38,000 93,000 58,000

प्रश्न 4 – एक करदाता को कारण सहित सलाह दीजिए कि निम्नलिखित व्यय की मदों के सम्बन्ध में उसका दावा स्वीकृत योग्य है या नहीं

(a) एक कर्मचारी को समय से पूर्व सेवा समाप्ति पर दी गयी क्षतिपूर्ति की राशि। 

(b) करदाता के व्यापार चिह्न का दुरुपयोग करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध चलाये गये एक सफल दावे पर किया गया व्यय। 

(c ) सीमा अधिकारी को प्रतिबन्धित माल के आयात करने पर दिया गया जुर्माना, जिस माल से लाभ अधिक होता था। 

(d) संचालक के यातायात व्यय, जो कि एक विशाल मशीन के क्रय के सम्बन्ध, में बातचीत करने यूरोप गया था तथा जो मशीन अगले वर्ष लगा दी गयी। 

(e) कारखाने से संलग्न चिकित्सा भवन बनवाने की लागत, जिसमें कर्मचारियों की आपातकालीन चिकित्सा का प्रबन्ध रहेगा। 

(f) तकनीकी ज्ञान (Know-how) प्राप्त करने के लिए 1.7.2015 को दी गयी एकमुश्त राशि रू. 6,00,000। Advise an assessee about the admissibility or otherwise of the claims, with regard to the following items, giving reasons.

(a) Compensation paid to an employee for premature termination of his services. 

(b) Amount spent in a successful suit filed against another for infringing the assessee’s trademark. 

(c) Penalty paid to customs authority for importing prohibited goods which yielded a large margin of profits. 

(d) Travelling expenses of a director who went to Europe for negotiating the purchase of a new heavy machinery which was eventually installed next year. 

(e) Cost of erecting a medical annexe to the factory for the emergency treatment of the employees. 

(f) Lump-sum consideration paid on 1.7.2015 for acquiring know-how रू. 6,00,000.

हल (Solution) : (a) यह मानते हुए कि कर्मचारी की सेवाएँ समाप्त के हित में था. यह मद स्वीकृत व्यय माना जाएगा।

(b) यह व्यय स्वीकृत होगा क्योंकि यह व्यापार की सम्पत्ति की रक्षा के लिए किया 

(c) अवैध क्रिया करने के लिए जुर्माना स्वीकृत व्यय नहीं है। 

(d) यह व्यय अस्वीकृत है क्योंकि यह एक नयी सम्पत्ति को प्राप्त करने के लिए

गया है।

(e) यह पूँजीगत व्यय है, अतः अस्वीकृत होगा, परन्तु इस पर ह्रास स्वीकत होगा

(f) तकनीकी ज्ञान प्राप्त करने के लिए दी गई एकमुश्त राशि पर धारा 32110 अन्तर्गत 25% की दर से अपलिखित मूल्य पर ह्रास प्राप्त होगा।

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