B.Com 2nd Year Cost Records Short Question Answer Notes

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लघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1- लागत नियन्त्रण लेखांकन पद्धति से क्या आशय है? 

What is Cost Control Accounting System ? 

उत्तर – लागत नियन्त्रण लेखांकन पद्धति का आशय

(Meaning of Cost Control Accounting System) 

लागत नियन्त्रण लेखांकन पद्धति (गैर-एकीकृत लेखांकन प्रणाली) से आशय ऐसी पद्धति से है जिसमें लेखा पुस्तकों के दो समूह रखे जाते हैं। पहला, लेखा पुस्तकों का समूह वित्तीय लेखों से सम्बन्धित होता है और दूसरा, लेखा पुस्तकों का समूह लागत लेखों से सम्बन्धित होता है।

बी०के० भर (B.K. Bhar) के शब्दों में, “गैर-एकीकृत लेखांकन प्रणाली (लागत नियन्त्रण लेखांकन प्रणाली) के अन्तर्गत चूँकि लागत और वित्तीय लेखों के लिए पृथक्-पृथक् खाताबहियाँ रखी जाती हैं, लागत लेखापाल लागत व्यवहारों के अभिलेखन के लिए उत्तरदायी होता है, जबकि वित्तीय लेखापाल वित्तीय अभिलेखों का प्रभारी होता है।”

इस लेखांकन प्रणाली के अन्तर्गत वित्तीय पुस्तकों में व्यक्तिगत, वास्तविक और नाममात्र सभी प्रकार के लेखे रखे जाते हैं, जबकि लागत पुस्तकों में किसी वस्तु या सेवा की लागत से सम्बन्धित मदों का ही लेखा किया जाता है। दूसरे शब्दों में, यह कहा जा सकता है कि कुछ मदें तो केवल वित्तीय पुस्तकों में ही लिखी जाती हैं, जबकि कुछ अन्य मदें केवल लागत पुस्तकों में ही लिखी जाती हैं। इसी कारण वित्तीय पुस्तकों और लागत पुस्तकों के लाभ या हानि में अन्तर पाया जाता है। वित्तीय पुस्तकों एवं लागत पुस्तकों में रखे जाने वाले खातों में अन्तर के कारण वित्तीय पुस्तकों एवं लागत पुस्तकों के मध्य कड़ी के रूप में वित्तीय पुस्तकों में लागत खाताबही नियन्त्रण खाता (Cost Ledger Control Account) और लागत पुस्तकों में सामान्य खाताबही समायोजन खाता (General Ledger Adjustment Account) खोला जाता है। लागत खाताबहियों में यह खाता द्विप्रविष्टियों के लेखांकन के माध्यम से अन्य नियन्त्रण खातों से सम्बन्धित रहता है। इस प्रणाली में खाते ‘स्वतः सन्तुलन पद्धति’ (General Ledger Adjustment Account) से सन्तुलित रहते हैं।

प्रश्न 2 – समाधान खाता क्या है? 

What is Reconciliation Account? 

उत्तर – समाधान खाता

(Reconcilliation Account

वित्तीय लेखों और लागत लेखों द्वारा प्रदर्शित परिणामों का मिलान करने हेतु समाधान विवरण के स्थान पर समाधान खाता भी तैयार किया जा सकता है। समाधान खाते के दो पक्ष होते हैं-डेबिट और क्रेडिट। डेबिट पक्ष में वे सभी मदें (Items) लिखी जाती हैं जिन्हें लागत लेखों द्वारा प्रदर्शित लाभ में से घटाया जाता है एवं क्रेडिट पक्ष में लागत पुस्तकों द्वारा प्रदर्शित

लाभ एवं उन सभी मदों को लिखा जाता है जो लागत लेखों द्वारा प्रदर्शित लाभ में जोड़ी जाती हैं। ऐसा करने के बाद डेबिट पक्ष में जितना शेष (Balance) आता है, वह वित्तीय लेखों द्वारा प्रदर्शित परिणाम के बराबर होता है। इस प्रकार वित्तीय लेखों का लाभ डेबिट पक्ष में लिख देने के उपरान्त दोनों पक्षों का योग (Total) बराबर हो जाता है। इसे स्मरणार्थ समाधान खाता (Memorandum Reconciliation Account) के नाम से भी पुकारा जाता है। 

समाधान खाते का प्रारूप निम्न प्रकार है –

समाधान खाता

(Reconciliation Account) 

प्रश्न 3 – अ-एकीकृत लेखाविधि क्या है? 

What is non-integrated accounting ? 

उत्तर – अ-एकीकृत लेखाविधि का आशय

(Meaning of Non-integrated Accounting) 

अ-एकीकृत लेखाविधि से आशय ऐसी पद्धति से है जिसमें लेखा पुस्तकों के दो समूह रखे जाते हैं। पहला, लेखा पुस्तकों का समूह वित्तीय लेखों से सम्बन्धित होता है और दूसरा, लेखा पुस्तकों का समूह लागत लेखों से सम्बन्धित होता है।

बी०के० भर (B.K. Bhar) के शब्दों में, “अ-एकीकृत लेखाविधि (लागत नियन्त्रण लेखांकन प्रणाली) के अन्तर्गत चूंकि लागत और वित्तीय लेखों के लिए पृथक्-पृथक् खाताबहियाँ रखी जाती हैं, लागत लेखापाल लागत व्यवहारों के अभिलेखन के लिए उत्तरदायाँ होता है, जबकि वित्तीय लेखापाल वित्तीय अभिलेखों का प्रभारी होता है।”

इस लेखाविधि के अन्तर्गत वित्तीय पुस्तकों में व्यक्तिगत, वास्तविक और नाममात्र सभा प्रकार के लेखे रखे जाते हैं, जबकि लागत पुस्तकों में किसी वस्त या सेवा की लागत स सम्बन्धित मदों का ही लेखा किया जाता है। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि कुछ म तो केवल वित्तीय पुस्तकों में ही लिखी जाती हैं, जबकि कछ अन्य मदें केवल लागत पुस्तको में

लिखी जाती हैं। इसी कारण वित्तीय पुस्तकों और लागत पुस्तकों के लाभ या हानि में अन्तर पाया जाता है। वित्तीय पुस्तकों एवं लागत पुस्तकों में रखे जाने वाले खातों में अन्तर के कारण वित्तीय पस्तकों एवं लागत पुस्तकों के मध्य कड़ी के रूप में वित्तीय पुस्तकों में लागत खाताबही नियन्त्रण खाता (Cost Ledger Control Account) और लागत पुस्तकों में सामान्य खाताबही समायोजन खाता (General Ledger Adjustment Account) खोला जाता है। लागत खाताबहियों में यह खाता द्विप्रविष्टियों के लेखांकन के माध्यम से अन्य नियन्त्रण खातों से सम्बन्धित रहता है। इस लेखाविधि में खाते स्वत: सन्तुलन पद्धति (Self Balancing System) के आधार पर सन्तुलित रहते हैं।

प्रश्न 4 – ‘लागत समाधान विवरण-पत्र’ के क्या उद्देश्य हैं? 

What are the objects of ‘Cost Reconciliation Statement ?

उत्तर – जब तक लागत लेखों के द्वारा दर्शाए गए परिणाम का वित्तीय लेखों के द्वारा दिखाए गए परिणाम से मिलान न किया जा सके तब तक लेखों की विधि पूर्ण नहीं समझी जाएगी। मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं

(1) अन्तर के कारणों को ज्ञात करना, (2) लागत लेखों की शुद्धता ज्ञात करना तथा (3) लागत लेखों में पूर्णता लाना।

प्रश्न 5 – लागत लेखों तथा वित्तीय लेखों के द्वारा बताए गए लाभ में अन्तर के कारणों को समझाइए।

Explain the causes of difference between Costing Profit and Financial Profit.

उत्तर – लागत लेखों में सभी कुछ अनुमानित होता है, जबकि वित्तीय लेखों में वास्तविक मदें ही दर्शायी जाती हैं। लागत लेखों में लाभ घटने के मुख्य कारण हो सकते हैं

(1) प्रत्यक्ष व्ययों को लागत लेखों में अधिक दर्शाया जाना, जबकि वह कार्यक्षमता में वृद्धि के कारण वास्तव में कम हुए हैं। ___

(2) अप्रत्यक्ष व्ययों को लागत लेखों में अधिक दर्शाया जाना, जबकि वास्तव में वे व्यय कम हुए हों।

(3) ऐसी आयगत प्राप्तियाँ जिन्हें वित्तीय लेखों में तो दर्शाया गया हो, लेकिन लागत पुस्तकों में न दर्शाया जा सका हो।

(4) लागत लेखों में प्रारम्भिक रहतिये का अधिक मूल्यांकन। 

(5) लागत लेखों में अन्तिम रहतिये का कम मूल्यांकन। 

इसी प्रकार लागत लेखों में लाभ बढ़ने के मुख्य कारण हो सकते हैं-

(1) वित्तीय लेखों में प्रत्यक्ष व्ययों का अधिक होना। 

(2) उपरिव्ययों को लागत लेखों में कम दर्शाया जाना।

(3) व्यय जो वित्तीय लेखों में दर्शाए गए हों, लेकिन लागत पुस्तकों में न दर्शाए जा सके हों।

(4) लागत पुस्तकों में प्रारम्भिक रहतिया का कम मूल्यांकन, 

(5) अन्तिम स्कन्ध का लागत पुस्तकों में अधिक मूल्यांकन।

प्रश्न 6 – निम्नलिखित सूचना के आधार पर लाभ-हानि खाते के अनुसार लाभ की राशि की गणना कीजिए

Calculate the amount of profit as per the Profit & Loss Account on the basis of following information:

(i) लागत लेखों के अनुसार रू. 1,50,300 का लाभ था। The profit as per cost accounts was रू. 1,50,300 

(ii) लागत लेखों में कारखाना उपरिव्यय की राशि रू. 4,000 से कम लिखी गई थी।

The works overheads were under-recovered in cost accounts by रू.4,000.

(iii) वित्तीय लेखों में प्रशासनिक व्यय की राशि रू. 1,500 से कम लिखी गई थी।

The administrative expenses were under-recorded in the financial accounts by रू. 1,500.

(iv) वर्ष में विनियोग पर रू. 495 ब्याज प्राप्त हुआ।

The interest received on investments during the year amounted to रू. 495.

(v) लागत लेखों में हास की राशि रू. 950 से अधिक लिखी गई।

Depreciation charges were over-recorded in the cost accounts by रू. 950.

(vi) अंशों के हस्तान्तरण के पंजीयन से सम्बन्धित वर्ष भर में रू. 120 हस्तान्तरण शुल्क प्राप्त हुआ।

The transfer fees amounting to 120 were received during the year in connection with the registration of transfer of shares.

हल (Solution): Reconciliation Statement

प्रश्न 7 – एम० लिमिटेड के वित्तीय वर्ष 31-12-2018 को समाप्त अवधि के लिए रू. 23.35,000 का लाभ दिखाते हैं। बाद में लागत तथा वित्तीय लेखों की जाँच कराने पर निम्नलिखित तथ्यों का पता लगता है

The financial record of M/s M. Ltd. showed a net profit of रू. 3,35,000 for the period ending 31.12.2018. On further examination of cost and financial records the following facts were discovered :

कारखाना उपरिव्यय लागत में कम वसूल किए गए 

Works overheads Under-recovered in cost रू. 8,120 

कार्यालय उपरिव्यय लागत में अधिक वसूल किए गए 

Office overheads over-recovered in cost रू. 2,000 

विनियोगों पर प्राप्त ब्याज लागत में सम्मिलित नहीं है। 

Interest on investment not included in cost रू. 8,000 

लागत अभिलेखों के अनुसार लाभ दिखाते हुए एक विवरण बनाइए। 

Prepare a statement showing the profit as per cost record.

हल (Solution): Reconciliation Statement 

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