B.Com 2nd Year Factories Act Basic Provisions Short Notes

B.Com 2nd Year Factories Act Basic Provisions Short Notes :- Hii friends this site is a very useful for all the student. you will find B.Com 2nd Year all the Question Paper Study Material Question Answer Examination Paper Sample Model Practice Notes PDF available in our site. parultech.com. Topic Wise Chapter wise Notes available.


लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1 – कारखाना शब्द को परिभाषित कीजिए। 

Define the term Factory.

उत्तर – कारखाने का अभिप्राय निम्नलिखित किसी भी भू-गृह (premises) सह जिसमें उसकी परिसीमा (precincts) भी सम्मिलित है

(1) जहाँ दस या दस से अधिक श्रमिक कार्यरत हों अथवा गत 12 माह में किसान दिन कार्यरत थे तथा उक्त भू-गृह में अथवा शक्ति की सहायता से उसके किसी भी भाग निर्माण प्रक्रिया की जा रही हो अथवा सामान्यतया की जाती हो, अथवा

(ii) जहाँ बीस या बीस से अधिक श्रमिक कार्यरत हों अथवा गत 12 माह में किस दिन कार्यरत थे तथा उक्त भू-गृह में उसके किसी भी भाग में शक्ति की सहायता स ।’ प्रक्रिया की जा रही हो अथवा सामान्यतया की जाती हो।

‘कारखाने‘ की परिभाषा में खदानें (Mines) सम्मिलित नहीं हैं क्योंकि ख सम्बन्ध में भारतीय खदान अधिनियम, 1952 पृथक रूप से लागू होता है। इसी प्रक रनिंग शेड भी कारखाना नहीं है क्योंकि इस पर भी पृथक अधिनियम लागू होता है।

भारतीय संघ की सशस्त्र सेना की चलित इकाई (Mobile unit) को भी कारखाना नहीं माना जाएगा।

स्पष्टीकरण I – श्रमिकों की संख्या की गणना हेतु विभिन्न समूहों तथा वर्गों के सभी श्रमिकों को ध्यान में रखा जाएगा।

स्पष्टीकरण II – भवन या उसके भाग में स्थापित इलेक्ट्रॉनिक द्वारा प्रोसेसिंग इकाई अथवा कम्प्यूटर इकाई अथवा उसके किसी भाग को कारखाना नहीं माना जाएगा यदि ऐसे भवन में कोई निर्माण प्रक्रिया नहीं की जाती है।

प्रश्न – 2 कारखाना अधिनियम 1948 के अर्न्तगत किशोर, बालक तथा युवा व्यक्ति में क्या अन्तर किया गया है?

How does the Factories Act 1948 distinguish between ‘adolescent’, ‘child’ and ‘young person’ ?

उत्तर – कारखाना अधिनियम, 1948 के अन्तर्गत प्रौढ़ किशोर, बालक तथा नवयुवकों को निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित किया गया है

1. प्रौढ़ (Adult)—वह व्यक्ति जिसने अपनी आयु के 18 वर्ष पूरे कर लिए हों प्रौढ़ की श्रेणी में आता है। __

2. किशोर (Adolescent)—ऐसा व्यक्ति जिसने अपनी आयु का 15वाँ वर्ष पूरा कर लिया हो लेकिन 18वाँ वर्ष पूरा नहीं किया हो किशोर कहलाता है, अर्थात् 15 और 18 वर्ष के बीच का व्यक्ति किशोर की श्रेणी में आता है।

3. बालक (Child)-15 वर्ष से कम आयु के प्राणी को बालक की श्रेणी में गिना जाता है।

4. नवयुवक (Young person)-ऐसे व्यक्ति जो बालक हैं अथवा किशोर हैं उन्हें नवयुवक की श्रेणी में माना जाता है।

उपर्युक्त परिभाषा के अर्न्तगत प्रौढ़, किशोरियाँ, बालिकाएँ एवं नवयुवतियाँ भी सम्मिलत हैं। अधिनियम में किशोर के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है। किशोर एवं नवयुवक में मुख्य अन्तर यह है कि नवयुवक की श्रेणी में बालक और किशोर दोनों ही सम्मिलित हैं जबकि किशोर वह व्यक्ति है जो 15 से 18 वर्ष के बीच का हो। अधिनियम के कुछ प्रावधान | ऐसे हैं जो समान रूप से किशोर तथा बालक दोनों पर लागू होते हैं। ऐसे प्रावधानों में ‘किशोर एवं बालक’ के शब्द के स्थान पर ‘नवयुवक’ शब्द का प्रयोग किया गया है।

प्रश्न 3 – नवयुवक शब्द को परिभाषित कीजिए। 

Define the term Young Person.

उत्तर – ‘नवयुवक’ की श्रेणी में बालक (Child) तथा किशोर (Adolescent) दोनों शामिल हैं। जिस व्यक्ति की आयु 15 वर्ष से कम होती है वह ‘बालक’ की श्रेणी में आता है। इसके विपरीत 15 वर्ष से ज्यादा व 18 वर्ष से कम आयु का व्यक्ति ‘किशोर’ कहलाता है। नवयुवक में नवयुवक तथा नवयुवती दोनों सम्मिलित हैं। हरेक सभ्य देश में बालक तथा किशोर श्रमिकों की नियुक्ति के सम्बन्ध में कानून बनाए गए हैं, जिनका प्रमुख उद्देश्य नवयुवकों के स्वास्थ्य की रक्षा करना है।

प्रश्न 4 – बालकों के लिए कार्य के घण्टे बताइए। 

State the working hours for children. 

उत्तर – बालकों के लिए काम के घण्टे (धारा 71)

(Working Hours for Children) 

इस सम्बन्ध में निम्नलिखित प्रावधान उल्लेखनीय हैं

1. दैनिक घण्टे—किसी भी बालक से किसी भी दिन साढ़े चार घण्टे से अधिक न तो काम लिया जाएगा और न ही उसे काम की अनुमति दी जाएगी।

2. रात्रि में काम नहीं लेना – किसी भी बालक से रात्रि में किसी भी दशा में काम नहीं लिया जाएगा यहाँ रात्रि का अभिप्राय कम-से-कम निरन्तर 12 घण्टे की अवधि से है, जिसमें रात्रि के 10 बजे से प्रातः 7 बजे के मध्य पड़ने वाला कम-से-कम निरन्तर 12 घण्टे का मध्यान्तर शामिल है।

3. काम की अवधि केवल दो पालियों में रहना – कारखानों में नियुक्त बालकों के काम की अवधि दो पालियों में ही रहेगी।

4. एक के बाद तत्काल दूसरी पाली में काम पर निषेध – कारखानों में बालक श्रमिक से एक पाली समाप्त होने के तत्काल बाद दूसरी पाली में काम नहीं लिया जाएगा।

5. काम का विस्तार – प्रत्येक पाली का विस्तार 5 घण्टे से अधिक नहीं होगा।

6. समूह – प्रत्येक बालक केवल एक ही समूह में कार्य करेगा। समूह में एक माह में केवल एक ही बार परिवर्तन हो सकेगा। एक से अधिक बार परिवर्तन के लिए मुख्य निरीक्षक की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी।

7. बालिका (Female child) से प्रातः 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही काम लेना-किसी भी बालिका को कारखाने में प्रात: 8 बजे के बीच ही काम पर रखा जाएगा। इस अवधि को छोड़कर शेष अवधि में न तो उसे काम पर लगाया जाएगा और न ही काम करने की अनुमति दी जाएगी।

8. साप्ताहिक अवकाश आदि – धारा 52 में वर्णित साप्ताहिक अवकाश आदि के प्रावधान बालक श्रमिकों पर यथावत् लागू होंगे और इनसे किसी भी बालक को छूट नहीं दी जाएगी।

9. दोहरे रोजगार पर प्रतिबन्ध – किसी भी बालक ने यदि किसी अन्य कारखाने में किसी दिन पहले से ही कार्य कर लिया हो तो उसे उस दिन पुनः कारखाने में काम नहीं करन दिया जाएगा।

प्रश्न 5 – दोहरे कार्य करने पर क्या प्रतिबन्ध है? 

What restrictions have been placed on double employment.

उत्तर – दोहरे रोजगार पर प्रतिबन्ध (धारा 60 ) (Restriction on Dou Employment)-दो कारखानों में एक ही दिन कार्य नहीं किया जा सकता। कोई भी श्रमिक किसी भी कारखाने में किसी भी ऐसे दिन काम नहीं कर सकेगा और न ही उस करने की अनुमति दी जाएगी यदि उसने किसी अन्य कारखाने में उस दिन काम कर लिया हो, किन्तु ऐसी परिस्थितियों में जो राज्य सरकार द्वारा निर्धारित की जाएँ, किसी श्रमिक से दोहरा काम लिया जा सकता है।

प्रश्न 6 – भारतीय कारखाना अधिनियम में घेराबन्दी के लिए कौन-कौन से प्रावधान हैं?

Which are the provisions in Indian Factories Act regarding fencing of machinery.

उत्तर – घेराबन्दी सम्बन्धी मुख्य प्रावधान (Provisions for the fencing of machinery)-धारा 21 में यन्त्रों की घेराबन्दी के सम्बन्ध में विभिन्न प्रकार के प्रावधान हैं, जिनमें से मुख्य प्रावधान निम्नलिखित हैं –

(1) जहाँ मुख्य शक्तिचालक (Prime-mover) व उससे लगा हुआ गतिपालक चक्र (Fly wheel), चाहे मुख्य शक्तिचालक अथवा गतिपालक चक्र, इंजिनघर में हो अथवा नहीं वहाँ घेराबन्दी की जाएगी।

(2) प्रत्येक जल चक्र (Water wheel) और जल चक्की (Water turbine) के सिरे पर स्थित यन्त्र पर घेराबन्दी की जाएगी।

(3) खराद (लेथ) जिसमें लकड़ी, हाथी दाँत इत्यादि की गोलाई आदि (Smoothing) किया जाता हो, उसे इस प्रकार लगाया जाना चाहिए कि उसके चारों ओर घेरा हो।

(4) प्रत्येक बिजली-शक्ति उत्पन्न करने वाला यन्त्र, मोटर, रोटरी, कनक्टर का प्रत्येक भाग शक्ति को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने वाला यन्त्र (Transmission machinery) तथा किसी अन्य यन्त्र के प्रत्येक जोखिमपूर्ण भाग पर फेंसिंग की जानी आवश्यक है, परन्तु यदि इनकी स्थिति ऐसे स्थान पर है, जहाँ पर बिना घेराबन्दी कराए हुए भी . श्रमिक सुरक्षित रहते हों तो घेराबन्दी की जानी आवश्यक नहीं है।

(5) घेराबन्दी इस प्रकार की होनी चाहिए कि किसी भी श्रमिक को चोट लगने की आशंका न रहे।

(6) घेरा किए जाने वाले यन्त्रों का परीक्षण ऐसी स्थिति में किया जाना चाहिए, जबकि वह यन्त्र संचालन में हों। परीक्षण के समय ही चलते यन्त्र पर पट्टा बदलने, उसे गति प्रदान करने आदि की प्रक्रिया देख लेनी चाहिए।

धारा 21 (2) के अनुसार, राज्य सरकार जोखिमपूर्ण यन्त्रों की घेरेबन्दी के सम्बन्ध में आवश्यक नियम बना सकती है, और यदि उचित समझे तो वह किसी यन्त्र या उसके भाग को इस धारा से मुक्त भी कर सकती है। इस धारा के विश्लेषण के लिए ‘जोखिमपूर्ण’ शब्द अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है जिसकी व्याख्या अधिनियम में नहीं की गई है, परन्तु विभिन्न न्यायालयों के निर्णय महत्त्वपूर्ण हैं

(1) यन्त्रों की घेराबन्दी सुव्यवस्थित ढंग से होनी चाहिए। 

(2) घेराबन्दी का आशय किसी भी विशेष मशीन से नहीं वरन् कारखाने की सभी मशीनों से है।

(3) घेराबन्दी और मशीनों के खतरनाक भागों तक श्रमिकों की पहुँच का कोई सम्बन्ध नहीं है, उनकी घेराबन्दी आवश्यक है।

(4) केवल उन्हीं यन्त्रों की घेराबन्दी की जाएगी जो प्रयोग में आ रहे हैं। 

(5) घेराबन्दी में उन्हीं यन्त्रों की देखभाल की जाएगी जो प्रयोग में आ रहे हैं।

(6) सुरक्षित घेराबन्दी उसी दशा में जानी जाएगी जबकि उसकी रक्षा ऐसे खतरे से हो सके जो उचित एवं काल्पनिक हो।

प्रश्न 7 – कारखाने के शौचालय एवं मूत्रालय सम्बन्धी नियम बताइए। 

State the rules regarding latrines and urinals in a factory. 

उत्तर – शौचालय एवं मूत्रालय का प्रबन्ध (धारा 19)

(Latrines and Urinals) 

प्रत्येक कारखाने में शौचालय एवं मूत्रालय के प्रबन्ध के सम्बन्ध में निम्नलिखित प्रावधान हैं- 

1. स्त्री-पुरुष के लिए पृथक् – पृथक्-स्त्री तथा पुरुष श्रमिकों के उपयोग हेतु सुविधाजनक स्थानों पर पृथक्-पृथक् चारों ओर से घिरे हुए निर्धारित स्तर के शौचालय एवं मूत्रालय की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी।

2. रख-रखाव – इनमें पर्याप्त मात्रा में प्रकाश और वायु संवहन की व्यवस्था होगी। इन्हें हर समय स्वच्छ रखा जाएगा। इनकी सफाई के लिए मेहतरों का प्रबन्ध किया जाएगा।

3. विशेष बातों का पालन – ऐसे प्रत्येक कारखाने में जहाँ साधारणतया 250 से अधिक श्रमिक कार्यरत हों, शौचालय व मूत्रालय के सम्बन्ध में निम्नलिखित बातों का पालन करना होगा

(i) समस्त शौचालय व मूत्रालय स्वास्थ्यप्रद होंगे।

(ii) शौचालय, मूत्रालय तथा सैनेटरी ब्लॉक (sanitary block) के फर्श तथा 90 सेमी ऊँचाई तक उनके अन्दर की दीवारें कंचित-टाइल (glaze tiles) से या अन्य किसी प्रकार से इस प्रकार बनायी जाएँगी कि उनकी सतह चिकनी, चमकदार व दुर्भेद्य रहे।

4. शौचालय एवं मूत्रालय कारखाने से कम-से-कम 6 मीटर की दूरी पर होने चाहिए। 

प्रश्न 8-कारखाने की सफाई एवं स्वच्छता सम्बन्धी क्या नियम हैं? 

What are the provisions regarding the cleanliness of factory 

उत्तर – सफाई सम्बन्धी प्रावधान (धारा 11)

(Provisions Regarding Cleanliness) 

सफाई के सम्बन्ध में कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 11 में कहा गया प्रत्येक कारखाना साफ रखा जाएगा और उसे किसी भी नाली, शौचालय अथवा हात पदार्थों से पैदा होने वाली दुर्गन्ध से मुक्त रखा जाएगा। विशेष रूप से अग्र बातों की व्यवस्था की जाएगी

1. प्रतिदिन सफाई करना – कार्यकक्षों के फर्शों व बेंचों तथा सीढ़ियों व रास्ते पर एकत्र होने वाला कूड़ा-करकट प्रतिदिन झाड़कर अथवा अन्य प्रभावकारी उपाय द्वारा साफ किया जाएगा और उसे उचित ढंग से हटाने की व्यवस्था की जाएगी।

2. प्रति सप्ताह कार्य के फर्श को धोना – प्रत्येक सप्ताह कम-से-कम एक बार हर कार्यकक्ष के फर्श को धोकर और यदि आवश्यक हो तो कीटाणुनाशक पदार्थ का उपयोग करके अथवा अन्य प्रभावकारी ढंग से साफ किया जाएगा।

3. ड्रेनेज की प्रभावकारी व्यवस्था करना – जहाँ निर्माण प्रक्रिया के दौरान कोई फर्श इतना गीला हो जाए कि जल-नि:सरण आवश्यक हो तो वहाँ जल-नि:सरण (drainage) की प्रभावकारी व्यवस्था रखी जाएगी।

4. रंगाई-पुताई की व्यवस्था करना – समस्त भीतरी दीवार तथा पार्टीशन छतें व कमरों की शिखरें और मार्ग व सीढ़ियों की दीवारें, किनारे तथा शिखरें

(i) यदि वार्निश या पेण्ट की हुई हों (धोए जाने योग्य वाटर पेण्ट को छोड़कर) तो 5 वर्ष की अवधि में कम-से-कम एक बार पुन: वार्निश या पेण्ट की जाएगी।

(ii) यदि उन पर धोए जाने योग्य वाटर पेण्ट किया गया हो तो 3 वर्ष की अवधि में -कम-से-कम एक बार पेण्ट की जाएगी और प्रत्येक छ: माह में कम-से-कम एक बार साफ की जाएगी।

(iii) यदि वे वार्निश या पेण्ट की हुई हों, अथवा उनकी सतह चिकनी व दुर्भेद्य हो तो 14 माह की अवधि में कम-से-कम एक बार निर्धारित ढंग से साफ की जाएगी।

(iv) किसी भी अन्य दशा में उनकी सफेद या रंगीन पुताई की जाएगी तथा यह रंगीन पुताई 14 माह की अवधि में कम-से-कम एक बार अवश्य की जाएगी।

सभी दरवाजों, खिड़कियों के खाँचों तथा अन्य लकड़ी या पीतल के खाँचों और शटर्स पर पेण्ट या वार्निश होगा तथा प्रत्येक पाँच वर्षों में कम-से-कम एक बार पेण्ट या वार्निश की जाएगी।

प्रश्न 9 – प्रतिदिन एक मजदूर (श्रमिक) को कितने घण्टे कार्य करने की आज्ञा है? 

How many hours per day an adult worker is allowed to work ?

उत्तर – किसी भी वयस्क श्रमिक से किसी भी दिन 9 घण्टे से अधिक समय तक कार्य नहीं लिया जाएगा और न ही उसे 9 घण्टे से अधिक कार्य करने की अनुमति प्रदान की जाएगी, किन्तु मुख्य निरीक्षक की पूर्व स्वीकृति प्राप्त होने पर दैनिक कार्य के घण्टे, पाली (shift) में परिवर्तन की सुविधा प्रदान करने के लिए बढ़ाए जा सकते हैं, अर्थात् केवल पाली में परिवर्तन की सुविधा प्रदान करने के लिए ही मुख्य निरीक्षक दैनिक कार्य के घण्टे बढ़ाने की स्वीकृति प्रदान कर सकता है।

प्रश्न 10 – पीने के पानी का स्थान शौचालय से कितनी दूर होना चाहिए? 

How far drinking water outlet should be located from any toilet?

उत्तर – पेयजल का स्थान (Location of drinking water outlet)-पेयजल का स्थान स्नानगृह, मूत्रालय, शौचालय, थूकदान तथा गन्दे पानी के बहाव की नाली से 6 मीटर दूर होना चाहिए। यदि मुख्य निरीक्षक अनुमति दे तो यह दूरी 6 मीटर से कम भी हो सकती है।

Follow Me

Facebook

B.Com 1st 2nd 3rd Year Notes Books English To Hindi Download Free PDF

Leave a Reply

Your email address will not be published.

*