B.Com 2nd Year Heads Of Income Long Notes In Hindi

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विस्तृत उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1- विभिन्न प्रकार के प्रॉविडेण्ट फण्डों को बताइए। 

Define the different types of Provident Funds. 

उत्तर – प्रॉविडेण्ट फण्ड (Provident Fund)

प्रॉविडेण्ट (Provident) शब्द से आशय भविष्य के लिए प्रबन्ध करना है। इस फण्ड में कर्मचारी के वेतन में से प्रति मास एक निश्चित दर से रकम काटकर जमा कर दी जाती है तथा नियोक्ता भी इसमें अपना अंशदान करता है। जब कोई कर्मचारी अपनी नौकरी से सेवानिवृत्त होता है तो उस समय यह इकट्ठी रकम ब्याज सहित उसको प्राप्त हो जाती है और उस समय इससे काफी सहायता मिलती है। यदि दुर्भाग्यवश सेवाकाल में ही कर्मचारी का देहान्त हो जाता है तो इस फण्ड की रकम उसके स्त्री-बच्चों अथवा कानूनी उत्तराधिकारी को मिल जाती है जिससे उन्हें काफी सहारा मिल जाता है। चार प्रकार के प्रॉविडेण्ट फण्ड होते हैं

1. वैधानिक प्रॉविडेण्ट फण्ड (Statutory Provident Fund), 

2. प्रमाणित प्रॉविडेण्ट फण्ड (Recognized Provident Fund), 

3. अप्रमाणित प्रॉविडेण्ट फण्ड (Unrecognized Provident Fund), 4. सार्वजनिक प्रॉविडेण्ट फण्ड (Public Provident Fund)।

1. वैधानिक प्रॉविडेण्ट फण्ड (Statutory Provident Fund)-यह प्रॉविडेण्ट फण्ड भारतीय प्रॉविडेण्ट फण्ड अधिनियम, 1925 द्वार अनुमोदित है। साधारणत: यह फण्ड सरकारी अथवा अर्द्ध-सरकारी कार्यालयों में, स्थानीय निकायों में, विश्वविद्यालयों, मान्यता प्राप्त शिक्षा संस्थानों, वैधानिक निगम, राष्ट्रीयकृत बैंकों आदि में रखा जाता है।

2. प्रमाणित प्रॉविडेण्ट फण्ड (Recognized Provident Fund)-यह फण्ड आयकर मुख्य कमिश्नर अथवा कमिश्नर द्वारा स्वीकृत होता है। इसमें कर्मचारी प्रॉविडेण्ट फण्ड एक्ट, 1952 के अन्तर्गत बनायी गई योजना के अन्तर्गत स्थापित प्रॉविडेण्ट फण्ड भी शामिल है। सामान्यत: यह फण्ड अनुसूचित बैंकों, कारखानों व बहुत-सी व्यापारिक संस्थाओं में रखा जाता है। यह फण्ड निजी क्षेत्रों के संगठनों द्वारा भी रखा जाता है।

3. अप्रमाणित प्रॉविडेण्ट फण्ड (Unrecognized Provident Fund)-यह फण्ड न तो वैधानिक होता है और न ही प्रमाणित। इस फण्ड को कोई भी संस्था रख सकती है। यह फण्ड निजी क्षेत्र के संगठनों द्वारा भी रखा जाता है।

4. सार्वजनिक प्रॉविडेण्ट फण्ड (Public Provident Fund)-इस फण्ड में आम जनता का प्रत्येक व्यक्ति (वेतनभोगी कर्मचारियों सहित) प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कम-से-कम रू. 500 तथा अधिक से अधिक रू. 1,50,000 जमा कर सकता है। वह अपना धन किस्तों में भी जमा कर सकता है जो एक वर्ष में 12 से अधिक नहीं हो सकती हैं। एक व्यक्ति यह खाता अपने नाम में अथवा अपने अवयस्क बच्चे के नाम में खोल सकता है जिसका वह संरक्षक है। परन्तु एक व्यक्ति अपने नाम में केवल एक ही खाता खोल सकता है। यह खाता भारतीय स्टेट बैंक अथवा उसकी सहायक बैंकों में अथवा केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिकृत 13 राष्ट्रीयकृत बैंकों में से किसी भी बैंक की शाखा में अथवा प्रधान डाकघर (Head Post Office) में खोला जा सकता है। इस फण्ड में जमा पर ब्याज केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर घोषित दर से दिया जाता है। यह ब्याज पूर्णतया कर मुक्त है। किसी वित्तीय वर्ष में इस फण्ड में जमा की गई राशि पर धारा 80C के अन्तर्गत कटौती दी जाती है। 15 वर्ष बाद इस फण्ड की राशि पूर्णतया आहरित की जा सकती है। इस फण्ड से प्राप्त सम्पूर्ण राशि पूर्णतया कर-मुक्त होती है। 

(A) वह राशि जो कुल आय में शामिल की जाती है

वैधानिक प्रॉविडेण्ट फण्ड प्रमाणित प्रॉविडेण्ट फण्ड अप्रमाणित प्रॉविडेण्ट फण्ड
(B) धारा 80C के अन्तर्गत कटौती के लिए योग्य राशि की अधिकतम सीमाकोई व्यक्ति जब इस फण्ड को सदस्य होता है तो उसकी आय में केवल उसके वेतन में से कटी हुई रकम (जो इस फण्ड में जमा की गई हो ) जोडी जीती है। इस फण्ड में नियोक्ता द्धारा दिया हुआ अंशदान तथा फण्ड के ब्याज पर कोई ध्यान नही दिया जाता अर्थात नियोक्ता का अंशदान तथा फण्ड का ब्याज न तो कर्मजारी की आय में जोडा जाता है ओर न ही उस पर कर लगता हैं। कोई व्यक्ति जब इस फण्ड का सदस्य होता है तो (i) उसके वेतन में से कटी हुई रकम (जो इस फण्ड में जमा की गईं हो),
(ii) नियोक्ता द्धार दिए हुए अंशदान का वह भाग जो कर्मजारियों के वेतन के 12% से अधिक हो तथा
(iii) फण्ड के ब्याज का वह भाग जो निर्धारित दर 9.5% से अधिक हो, कर्मचारी की आय में जोडा जाता है, अर्थात नियोक्ता का अंशदान वेतन के 12% भाग तक तथा फण्ड का ब्याज 9.5% की दर तक कर्मजारी की आय में शामिल नही किया जाता और न ही उस पर कर लगता है।
कोई व्यक्ति जब इस फण्ड का सदस्य़ होता है तो उसकी आय में उसके वेतन में से कटी हुई रकम (जो इस फण्ड में जमा की गई हो ) जोडी जाती है परन्तु नियोक्ता द्धारा दिया गया अंशदान तथा इस फण्ड का ब्याज प्रत्येक वर्ष उसकी आय में नही जोडा जाता हैं।

(B) धारा 80C के अन्तर्गत कटौती के लिए योग्य राशि की अधिकतम सीमा

वैधानिक प्रॉविडेण्ट फण्ड प्रमाणित प्रॉविडेण्ट फण्ड अप्रमाणित प्रॉविडेण्ट फण्ड
एक कर्मचारी द्वारा इस फण्ड के लिए अपने वेतन में से कटायी हुई राशि रू 1,50,000 एक कर्मचारी द्वारा इस फण्ड के लिए अपने वेतन में से कटायी हुई राशि रू. 1,50,000 तक। एक कर्मचारी द्वारा इस फण्ड के लिए अपने वेतन में से कटायी हुई राशि कटौती योग्य राशि में शामिल नहीं की जाती है।

(C) नौकरी से सेवानिवृत्त होने के समय अथवा नौकरी छोड़ने के समय फण्डों से प्राप्त हुई राशि

वैधानिक प्रॉविडेण्ट फण्ड प्रमाणित प्रॉविडेण्ट फण्ड अप्रमाणित प्रॉविडेण्ट फण्ड
इस राशि पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। न तो यह राशि कर्मचारी की आय में जोड़ी जाती है और न ही इस पर किसी प्रकार का कर लगता है। इस राशि पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता अर्थात् यह न तो कर्मचारी की ही आय में जोड़ी जाती है और न उस पर किसी प्रकार का कर लगता है। (i) नियोक्ता का अंशदान एवं उसके अंशदान पर ब्याज वेतन शीर्षक में जोड़ा जाता है और उस पर कर लगता है। (ii) कर्मचारी के अंशदान की राशि कर-मुक्त होती है। (iii) कर्मचारी के अंशदान पर ब्याज की राशि ‘अन्य साधनों से आय’ में शामिल की जाती है और कर-योग्य होती है।

प्रश्न 2 – भत्ते का क्या आशय है? वेतन शीर्षक के अन्तर्गत कर मुक्त भत्तों एवं कर योग्य भत्तों का विस्तार से वर्णन कीजिए।

What is meaning of Allowances ? Describe in detail tax free and taxable allowances under the head salary. 

उत्तर – भत्ते (Allowances) नियोक्ता द्वारा अपने कर्मचारियों को वेतन के अतिरिक्त मुद्रा में जो मासिक भुगतान किए जाते हैं वे भत्ते कहलाते हैं। आयकर की दृष्टि से भत्ते तीन प्रकार के होते हैं जो निम्न प्रकार हैं –

I. कर-योग्य भत्ते, II आंशिक कर-मुक्त भत्ते, III. पूर्णतया कर-मुक्त भत्ते।

कर-योग्य भत्ते

(Taxable Allowances) 

1. महँगाई भत्ता तथा महँगाई वेतन – आजकल यह भत्ता मूल्यों में वृद्धि के कारण मिलता है तथा इसकी सम्पूर्ण राशि कर-योग्य होती है। कभी यह भत्ता सेवा की शर्तों के अन्तर्गत और कभी सेवाविहीन शर्तों के अन्तर्गत दिया जाता है। यदि यह भत्ता सेवा की शर्तों के अन्तर्गत दिया नहीं जाता है तो यह अवकाश (retirement) सम्बन्धी सुविधाओं के लिए वेतन में सम्मिलित किया भत्त जाता है तथा यह मकान किराया भत्ते की कर-मक्त राशि, प्रमाणित प्रॉविडेण्ट फण्ड में अंशदान की कि राशि, ग्रेच्युटी तथा किराये से मुक्त मकान की सुविधा का मूल्यांकन करने के लिए भी वेतन शब्द में सम्मिलित किया जाता है। कभी-कभी यह महँगाई वेतन के नाम से भी दिया जाता है। महँगाई वेतन से आशय यह है कि यह भत्ता सेवा की शर्तों के अन्तर्गत दिया जा रहा है तथा अवकाश सम्बन्धी सुविधाओं (Retirement Benefits) के लिए वेतन में सम्मिलित होगा। 

2. नगर क्षतिपूरक भत्ता – बड़े-बड़े शहरों में निर्वाह व्यय अधिक होने के कारण नगर उच्च क्षतिपूरक भत्ता दिया जाता है। यह पूर्णत: कर योग्य होता है।

3. टिफिन भत्ता – यह भत्ता कर्मचारियों को भोजन तथा नाश्ते के लिए दिया जाता है। यह पूर्णतया कर-योग्य होता है।

4. नौकर भत्ता – यह भत्ता पूर्णतया कर-योग्य होता है चाहे यह किसी भी स्तर के कर्मचारी को दिया गया हो।

5. प्रेक्टिस न करने का भत्ता – सामान्यत: यह भत्ता उन चिकित्सकों को दिया जाता है जो सरकारी नौकरी में होते हैं और जिन्हें निजी प्रेक्टिस करना मना होता है। यह भत्ता निजी प्रेक्टिस करने को वर्जित करने से होने वाली हानि की क्षतिपूर्ति करने के लिए दिया जाता है। यह पूर्णतया कर-योग्य होता है।

6. वार्डन भत्ता तथा प्रोक्टर भत्ता – ये भत्ते शिक्षा संस्थाओं में दिए जाते हैं। यदि कोई (2 अध्यापक छात्रावास का वार्डन होता है तो उसे वार्डन भत्ता मिलता है और यदि कोई अध्यापक विद्यालय का प्रोक्टर होता है तो उसे प्रोक्टर भत्ता मिलता है। ये दोनों भत्ते पर्णतया कर-योग्य होते हैं।

7. निश्चित चिकित्सा भत्ता – यह भत्ता पूर्णतया कर-योग्य होता है। चाहे चिकित्सा (पर व्यय भत्ते से अधिक हो या कम।

8. पर्वतीय भता-यह भत्ता पर्वतीय क्षेत्र में नौकरी करने वाले कर्मचारियों को दिया (E जाता है क्योंकि पर्वतीय क्षेत्र में मैदानी क्षेत्र की अपेक्षा जीवन-निर्वाह लागत अधिक होती है। 

9. अतिरिक्त समय कार्य करने का भत्ता – जब कोई कर्मचारी अपने कार्य के सामान्य घण्टों से अधिक कार्य करता है तो उसे अधिसमय भत्ता (Overtime Allowance) । जाता है। यह भत्ता पूर्णतया कर-योग्य होता है।10. प्रतिनियुक्ति (डेप्यूटेशन) भत्ता – जब कोई कर्मचारी अपनी सवार स्थान से किसी अन्य विभाग, संस्था अथवा स्थान पर कछ समय के लिए अस्थाया 7 करने के लिए भेज दिया जाता है तो उसे प्रतिनियुक्ति पर भेजा हुआ कहते हैं। ऐसी दशा में उसे

उस संस्था, विभाग अथवा स्थान से जहाँ वह भेजा गया है प्रतिनियुक्ति (डेप्यूटेशन) भत्ता प्राप्त होता है। यह भत्ता पूर्णतया कर-योग्य होता है।

11. अन्य भत्ते – उपर्युक्त भत्तों के अतिरिक्त और भी कई प्रकार के भत्ते हो सकते हैं। उदाहरणार्थ-सेना के कर्मचारियों को युद्ध के क्षेत्र में रहते समय यदि अपना परिवार साथ में

नहीं रखने दिया जाता है तो उन्हें परिवार भत्ता मिलता है। इसी प्रकार परियोजना भत्ता, विवाह । भत्ता, ग्रामीण भत्ता आदि भत्ते हो सकते हैं। ये सभी भत्ते पूर्णतया कर-योग्य होते हैं, जब तक . कि वे स्पष्टतया कर-मुक्त न कर दिए जाएँ।

पूर्णतया कर-मुक्त भत्ते

(Fully Exempted Allowances) 

1. उच्च एवं उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को सत्कार भत्ता – उच्च एवं उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को जो सत्कार भत्ता मिलता है वह पूर्णतया कर-मुक्त होता है।

2. विदेश भत्ता – यह भत्ता सरकार द्वारा एक भारतीय नागरिक को भारत के बाहर सेवा करने के लिए दिया जाता है। यह भत्ता पूर्णतया कर-मुक्त होता है।

3. संयुक्त राष्ट्र संघ के भत्ते – संयुक्त राष्ट्र संघ (U.N.0.) द्वारा अपने कर्मचारियों को दिए गए भत्ते पूर्णतया कर-मुक्त होते हैं।

4. यदि होटल, बोर्डिंग एवं आवास के लिए कर्मचारी को प्रतिदिन के हिसाब से भत्ता दिया जाता है और उसे इसमें से कुछ राशि बच जाती है तो यह राशि कर-मुक्त होती है।

पूर्णतया कर-योग्य पूर्णतया कर-मुक्त
(1) महँगाई भत्ता अथवा महँगाई वेतन
(2) नगर क्षतिपूरक भत्ता
(3) टिफिन भत्ता
(4) नौकर मता
(5) प्रेक्टिस न करने का भत्ता
(6) वार्डन भत्ता तथा प्रोक्टर भत्ता
(7) निश्चित चिकित्सा भत्ता संयुक्त राष्ट्र संघ से प्राप्त भत्ता
(8) पर्वतीय भत्ता ।
(9) अतिरिक्त समय कार्य का भत्ता
(10) प्रति नियुक्ति (डेप्यूटेशन) भत्ता
(11) अन्य भत्ते बशर्ते कि स्पष्टतया कर-मुक्त घोषित न किए गए हों
विदेश भत्ता
उच्च एवं उच्चतम न्यायालय के न्यायधीशों को सत्कार भत्ता
होटल, बोर्डिंग एवं आवास के लिए प्रतिदिन भत्ता
संयुक्त राष्ट्र संघ से प्राप्त भत्ता

प्रश्न 3 – अनुलाभों से आप क्या समझते हैं? कर-योग्य एवं कर मक्त अ को समझाइए।

What do you mean by Perquisites ? Discuss taxable an exempted perquisites. 

उत्तर – अनुलाभ-आशय एवं प्रकार

(Perquisites : Meaning and Kinds) 

नियोक्ता द्वारा वेतन के अलावा कर्मचारियों को कई सुविधाएँ दी जाती हैं। कर्मचारिय को जो सुविधाएँ नकद दी जाती हैं उन्हें भत्ते कहते हैं तथा जो सुविधाएँ उन्हें वस्तु या सेवा रूप में दी जाती हैं, (परन्तु उनका मुद्रा में मूल्य ज्ञात किया जा सकता है) उन्हें ‘अनुलाभ कहते हैं। उदाहरणार्थ-रहने के लिए बिना किराये का मकान, नौकर की सुविधा, मोटरकार की सुविधा, बच्चों की मुफ्त शिक्षा आदि।

अनुलाभ निम्नलिखित प्रकार के होते हैं-

1 प्रत्येक कर्मचारी के लिए कर-योग्य अनुलाभ; 

II. विशिष्ट कर्मचारियों के लिए कर-योग्य अथवा विशिष्ट अनुलाभ; 

III. सबके लिए कर-मुक्त अनुलाभ।

1. प्रत्येक कर्मचारी के लिए कर-योग्य अनुलाभ 

कर्मचारी की आय में निम्नलिखित अनुलाभों का मूल्य वेतन शीर्षक में जोड़ा जाता है-

(i) किराये से मुक्त रहने का मकान। 

(ii) रियायती किराये पर रहने का मकान।

(iii) नियोक्ता द्वारा किए हुए किसी ऐसे दायित्व का भुगतान जो यदि नियोक्ता भुगता न करता तो करदाता को करना पड़ता। ऐसे दायित्वों के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं

(क) कर्मचारी के होटल अथवा क्लब के निजी बिलों का भुगतान, 

(ख) कर्मचारी के किसी ऋण का भुगतान, 

(ग) कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा व्ययों का भुगतान,

(घ) यदि नौकर की नियुक्ति कर्मचारी ने की है तो कर्मचारी के घरेल नौकर का वेतन नियोक्ता द्वारा चुकाया जाना।

(ङ) नियोक्ता द्वारा कर्मचारी के वेतन पर देय आयकर का चुकाया जाना, यदि नियोक्ता कर्मचारी को दिए गए अनुलाभों पर (जिनका मुद्रा में भुगतान नहीं किया गया है) कर के भुगतान करता है तो यह कर-मुक्त होगा,

(च) नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को बचाने अथवा उसकी रक्षा करने के लिए किए। कानूनी व्यय,

(iv) करदाता के स्वयं के अथवा उसके किसी परिवारीजन के जीवन बीमा कर अथवा एक वार्षिकी के अनुबन्ध के लिए दी हई रकम।

(v) नियोक्ता या पूर्व नियोक्ता द्वारा करदाता को निःशल्क या रियायती दर पर, या अप्रत्यक्ष रूप से, आवंटित या अन्तरित किसी विनिर्दिष्ट प्रतिभूति या श्रम-साध्य अंशों (sweat equity shares) का मूल्य।

(vi) करदाता की बाबत नियोक्ता द्वारा किसी अनुमोदित अधिवर्षिता निधि orannuation fund) में ₹ एक लाख से अधिक अभिदाय की राशि।

(vii) विहित सीमान्त फायदे या सुख-सुविधा (fringe benefit or amenity) कर 

धारा 17(2) (viii) के अनुसार निम्नलिखित अनुलाभों का मूल्य वेतन शीर्षक में जोड़ा ना जाएगा

(i) नि:शुल्क भोजन, 

(ii) उपहार, 

(iii) छुट्टी मनाने के लिए जाने की सुविधा, 

(iv) क्रेडिट कार्ड पर प्रभारित व्यय, 

(v) क्लब व्यय, 

(vi) चल सम्पत्ति का उपयोग, 

(vii) चल सम्पत्ति का अन्तरण, 

(viii) बिना ब्याज या ब्याज की रियायती दर पर ऋण की सुविधा,

(ix) अन्य लाभ या अनुलाभ। 

II. विशिष्ट कर्मचारियों के लिए कर-योग्य अथवा विशिष्ट अनुलाभ

विशिष्ट कर्मचारी कौन हैं – ऐसे कर्मचारी जो निम्नलिखित में से कम-से-कम कोई एक शर्त पूरी करते हैं ‘विशिष्ट कर्मचारी’ कहलाते हैं और उनकी दशा में विशिष्ट प्रकार के लाभ एवं सुविधाएँ यदि नि:शुल्क या रियायती दर पर नियोक्ता द्वारा उपलब्ध करायी गई हैं तो उनका मूल्य वेतन में जोड़ा जाएगा, अर्थात् वे कर-योग्य होते हैं

(क) कर्मचारी जो नियोक्ता कम्पनी का संचालक भी है, अथवा

(ख) कर्मचारी जिसके पास नियोक्ता कम्पनी के कम-से-कम 20% मताधिकार वाले ता समता अंश हैं, अथवा

(ग) कर्मचारी जिसका कर-योग्य वेतन रू. 50,000 से अधिक हो।

ध्यान दें – (i) मौद्रिक वेतन में वेतन, कर-योग्य भत्ते, बोनस, कमीशन एवं अन्य ए भुगतान जो मुद्रा में किए जाते हैं, शामिल होते हैं।

(ii) कर-योग्य मौद्रिक वेतन की गणना करते समय मौद्रिक वेतन में से धारा 16 की नए कटौतियाँ (मनोरंजन भत्ते की कटौती योग्य राशि एवं नियोजन कर) घटा दी जाती है।

(iii) यदि किसी गत वर्ष में कर्मचारी के एक से अधिक नियोक्ता हैं तो सब नियोमानों स प्राप्त/प्राप्य मौद्रिक आय जोड़कर रू. 50,000 की सीमा देखी जाएगी।

इसके अन्तर्गत निम्नलिखित अनुलाभों का मूल्य कर-योग्य है-

(i) फर्राश, माली, चौकीदार या निजी सहायक की सुविधा,

(ii) गैस, बिजली अथवा पानी की सुविधा, 

(iii) शिक्षा सुविधा, 

(iv) यातायात की सुविधा, 

(v) कार की सुविधा।

III. सबके लिए कर-मुक्त अनुलाभ 

प्रत्येक कर्मचारी के लिए निम्नलिखित सुविधाएँ कर-मुक्त हैं

(i) कार्य-स्थल पर रहने की सुविधा (देखें रहने के मकान की सुविधा मूल्यांकन)। 

(ii) व्यापारिक स्थल या कार्यालय में नाश्ते की मुफ्त सुविधा। 

(iii) चिकित्सा सुविधाएँ।

(iv) टेलीफोन की सुविधाएँ – नियोक्ता द्वारा कर्मचारी के टेलीफोन (जिसमे मोबाइल फोन भी शामिल हैं) के बिलों का भुगतान।

(v) नियोक्ता का सामूहिक बीमा योजना में अंशदान। 

(vi) कर्मचारी या उसके बच्चों को छात्रवृत्ति।

(vii) यातायात की सुविधा — नियोक्ता द्वारा रहने के स्थान से सेवा के स्थान तक जाने व आने के लिए प्रदान की गई सवारी की सुविधा।

(viii) रिफ्रेशर कोर्स – यदि नियोक्ता कर्मचारी को रिफ्रेशर कोर्स कराने की फीस चुकाता है जिससे कर्मचारी अपना कार्य अधिक कुशलतापूर्वक कर सके। ऐसे व्यय छात्रवृत्ति माने जाते हैं।

(ix) यदि नियोक्ता कर्मचारी को दिए गए अनुलाभों पर आयकर चुकाता है तो ऐसी राशि वेतन से आय में शामिल नहीं की जाएगी।

(x) विदेश में नौकरी पर गए हुए सरकारी कर्मचारियों को अनुलाभ – सरकार द्वारा विदेश में नौकरी पर गए हुए सरकारी कर्मचारियों को दिए गए अनुलाभ।

(xi) उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को मुफ्त मकान तथा सवारी की सुविधा। 

(xii) सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को मुफ्त मकान तथा सवारी की सुविधा।

(xiii) मंत्री आदि को मुफ्त मकान की सुविधा-मंत्री, संसद के निर्दिष्ट अधिकारियों अथवा संसद में विपक्ष के नेताओं को दिए गए किराये से मुक्त मकान का मूल्य।

(xiv) निजी उपयोग के लिए कर्मचारी या उसके परिवार के सदस्य को दिया गया लैपटॉप (Laptop) एवं कम्प्यूटर (Computer)।

(xv) बिना ब्याज या ब्याज की रियायती दर पर ऋण बशर्ते गत वर्ष में ऋण की राशि रू. 20,000 से अधिक नहीं है।

(xvi) किसी चल सम्पत्ति को दस वर्ष काम में लेने के पश्चात बिना प्रतिफल लिए इसका हस्तान्तरण परन्तु इस सम्पत्ति में कम्प्यूटर्स, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ एवं कार शामिल नहीं है।

(xvii) कार्यालयीन कार्य के लिए आवश्यक पत्रिकाएँ (periodicals) एव जनन (journals)।,

(xviii) अवकाश यात्रा रियायत।

प्रश्न 4 – निम्नलिखित के सम्बन्ध में आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों की विवेचना कीजिए –

(i) किरायामुक्त आवास 

(ii) मोटर-कार की सुविधा।

Discuss the provisions of Income Tax Act, 1961 regarding the following:

(i) Rent free Accommodation 

(ii) Facility of Motor-car 

उत्तर – अनुलाभों का मूल्यांकन

(Valuation of Perquisites) 

कर – मुस्त अनुलाभों का मूल्यांकन नहीं किया जाता है। मूल्यांकन केवल उन अनुलाभों का किया जाता है जो प्रत्येक दशा में अथवा विशिष्ट दशाओं में कर-योग्य हैं।

नियोक्ता द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जो अनुलाभ कर्मचारी या उसके परिवार के सदस्यों को दिए गए हैं उनका मूल्य धारा 17(2) एवं नियम 3 के अनुसार निर्धारित किया जाता है। परिवार के सदस्य’ में निम्नलिखित शामिल हैं-

(क) जीवन-साथी,

(ख) बच्चे एवं उनके जीवन साथी,OBER 

(ग) माता-पिता,

(घ) कर्मचारी एवं आश्रित। सः 

1. रहने के मकान की सुविधा का मूल्यांकन 

(Valuation of Residential Accommodation)

रहने के मकान की सुविधा का मूल्यांकन करने के लिए कर्मचारियों को दो भागों में बाँटा गया है

1. सरकारी कर्मचारी, 

2. अन्य कर्मचारी1. सरकारी कर्मचारी (Government Employees)-इसमें केन्द्रीय सरकार एवं राज्य सरकार के कर्मचारी आते हैं।

विवरण मकान की सुविधा का मूल्य
(क) असुसज्जित मकान
(ख) सुसज्जित मकान |
सरकारी नियमों के अनुसार निर्धारित राशि
(i) (क) में निर्धारित राशि
(ii) जोड़ा-फर्नीचर की लागत का 10% वार्षिक
या फर्नीचर का किराया
घटाया-कर्मचारी द्वारा दी गई या देय राशि, यदि है तो
अनुलाभ का मूल्य

3. होटल में रहने का स्थान (Accommodation provided in a Hotel)-यदि नियोक्ता (सरकारी या गैर-सरकारी) कर्मचारी को होटल में रहने का स्थान सुलभ कराता है ते स इस अनुलाभ का मूल्य निम्न प्रकार होगा

(क) यदि कर्मचारी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानान्तरित किया गया है और ऐसी दशा में होटल में रहने की अवधि का योग पन्द्रह दिन से अधिक नहीं है तो अनुलाभ के मूल्य शून्य होगा।(ख) अन्य दशा में – अनुलाभ का मूल्य कर्मचारी के गत वर्ष के वेतन का 24 (उस अवधि का जिस अवधि में कर्मचारी को होटल में रहने का स्थान सुलभ कराया गया) होटल को दी गई या देय राशि, जो दोनों में कम हो, होगा।

यदि कर्मचारी से होटल में रहने के सम्बन्ध में कुछ राशि वसूल की गई है तो उपर्युक्त गणित राशि में से इसे घटा दिया जाएगा तथा शेष राशि अनुलाभ का मूल्य होगा।

4. कार्यस्थल पर रहने का मकान (Accommodation provided at site) – नयदि कर्मचारी को रहने के लिए मकान दिया गया है जो खान पर (mining site) या तेल खोजने के स्थान पर (onshore oil exploration site) या परियोजना पूरी करने के स्थान पर (project execution site) या बाँध पर या विद्युत उत्पादन स्थल पर या समुद्र तट से दूर कार्यस्थल पर है तो इस अनुलाभ का मूल्य शून्य होगा, बशर्ते-

(अ) (i) मकान अस्थायी प्रकृति का है

(ii) 800 वर्ग फुट से बड़ा नहीं है 

(iii) नगरपालिका या छावनी बोर्ड की स्थानीय सीमाओं से कम-से-कम आठ

किलोमीटर दूर हो, या 

(ब) दूरस्थ क्षेत्र में स्थित हो।

5. स्थानान्तरण की दशा में रहने का मकान (Accommodation at the time of I transfer)-यदि कर्मचारी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानान्तरित किया गया है और उसे नये स्थान पर रहने का मकान दिया गया है और कर्मचारी पुराने स्थान के मकान को भी अपने अधिकार में रखता है तो दोनों मकानों में से एक मकान, जिसका मूल्य कम हो, अनुलाभ का मूल्य माना जाएगा। अनुलाभ का मूल्य उपर्युक्त वर्णित विधि से निर्धारित किया जाएगा। कर्मचारी को यह लाभ स्थानान्तरण तिथि से 90 दिन ही प्राप्त होगा। यदि वह दोनों मकान 90 दिन के पश्चात् भी अपने कब्जे में रखता है तो दोनों मकानों के अनुलाभ का मूल्य वेतन में शामिल किया जाएगा।

स्पष्टीकरण (Clarification)

(a) रहने का मकान (Accommodation) इसमें निम्नलिखित शामिल हैं—मकान, फ्लैट, फार्म हाउस या इनका कोई भाग; होटल, मोटल, गैस्ट हाउस, कारवां, चलते-फिरते घर (mobile home), जहाज या अन्य तैरती हुई संरचना में स्थान।

(b) होटल – होटल में मोटल, Service apartment या गैस्ट हाउस में किराये पर लिया गया स्थान शामिल है।

(c) दूरस्थ क्षेत्र – दूरस्थ क्षेत्र से आशय उस क्षेत्र से है जो किसी ऐसे कस्बे (Town) से कम-से-कम 40 किलोमीटर दूर है जिसकी जनसंख्या 20,000 से अधिक नहीं है।

(d) वेतन – इसमें मूल वेतन, भत्ते, बोनस, कमीशन (जिनका भुगतान मासिक या अन्य प्रकार होता हो) तथा अन्य कोई रोकड़ में भुगतान (उसे किसी भी नाम से पुकारा जाए) शामिल है जो कर्मचारी को एक या अनेक नियोक्ताओं से प्राप्त होता है। 

II. कार की सुविधा का मूल्यांकन

(Valuation of Car)1. यदि कार नियोक्ता की है या उसने किराये या लीज पर ली है (Car owned or ed by the employer and used for official purpose)-जब कार पूर्णरूपेण

व्यापार अथवा पेशे के काम आती है—इस अनुलाभ का मूल्य शून्य होगा बशर्ते निर्धारित पूरी हो।

2. जब कार नियोक्ता की है और पूर्णरूपेण कर्मचारी या उसके परिवार के सदर के काम आती है (Car owned by Employer and used exclusively for the private use of employee or any member of the family)-अनुलाभ का मूल निम्न प्रकार होगा

(i) कार को चलाने तथा रख-रखाव का व्यय। 

(ii) चालक का वेतन-यदि दिया गया हो। 

(iii) कार की घिसावट-@ 10% प्रतिवर्ष।

घटाया – कर्मचारी द्वारा दी गई या देय राशि

अनुलाभ का मूल्य 

3. जब कार नियोक्ता ने किराये या लीज पर ली है और पूर्णरूपेण कर्मचारी या उसके परिवार के सदस्य के काम आती है (Car taken on lease and used exclusively for the private use of employee or any member of the family)—

अनुलाभ का मूल्य निम्न प्रकार होगा –

(i) कार को चलाने तथा रख-रखाव का व्यय। 

(ii) चालक का वेतन-यदि दिया गया हो।

घटाया-कर्मचारी द्वारा दी गई या देय राशि

अनुलाभ का मूल्य 

4. यदि कार नियोक्ता की है या उसने किराये या लीज पर ली है (Car owned or hired by employer)-कार आंशिक रूप से व्यापार या पेशे के काम आती है तथा आंशिक रूप से कर्मचारी या उसके परिवार के सदस्य के काम आती है-

(a) कार को रखने व चलाने का पूर्ण व्यय नियोक्ता वहन करता है-

(i) यदि कार छोटी है (कार के इंजन की क्षमता मूल्य 1.6 लीटर से अधिक नहीं है) – रू.1,800 प्रति माह

(ii) यदि कार बड़ी है (कार के इंजन की क्षमता 1.6 लीटर से अधिक है) दिया गया है रू.900 प्रति माह अतिरिक्त

यदि कार चलाने के लिए चालक दिया गया है – रू.2,400 प्रति माह

(b) यदि कर्मचारी अपने निजी प्रयोग के सम्बन्ध में व्यय स्वयं वहन करता है।

(i) यदि कार छोटी है – रू. 600 प्रति माह 

(ii) यदि कार बड़ी है – रू. 900 प्रति माह 

यदि कार चलाने के लिए चालक दिया गया है  – रू. 900 प्रति माह अतिरिक्त 

5. यदि कर्मचारी के प्रयोग में एक से अधिक मोटर – कार हैं (Employee uses more than one motor-car)-यदि नियोक्ता एक या एक से अधिक मोटर-कारों का मालिक है या उसने एक या एक से अधिक मोटर-कारें किराये पर ले रखी हैं और कर्मचारी या उसके परिवार के सदस्य को उसने कोई एक विशिष्ट मोटर-कार ही प्रयोग के लिए नहीं दे रखी है बल्कि कई कारों में से किसी एक या एक से अधिक कारों को (सेवा के कर्त्तव्यों के उद्देश्यों की पूर्ति के अलावा भी) प्रयोग करने की स्वीकृति दे रखी है तो कार के अनुलाभ का मूल्य निम्न प्रकार होगा-

(a) प्रथम कार के लिए-

(i) यदि कार छोटी है – रू. 1,800 प्रति माह 

(ii) यदि कार बड़ी है – रू.  2,400 प्रति माह 

यदि कार चलाने के लिए चालक दिया गया है – रू.900 प्रति माह अतिरिक्त 

(b) अन्य कार अथवा कारों के लिए-यह मानकर मूल्यांकन किया जाएगा कि अन्य कार/कारें पूर्णत: निजी प्रयोग के लिए दी गई हैं।

नोट – जब एक से अधिक कारें कार्यालयीन एवं कर्मचारी के निजी प्रयोग के लिए दी गई हैं और किसी एक कार के खर्चे दूसरी कार से अधिक हैं अथवा उन कारों में से कोई कार बड़ी है और कोई कार छोटी है तो इस सुविधा का मूल्यांकन किस प्रकार किया जाएगा, नियमों में इस सम्बन्ध में कुछ नहीं बताया गया है। अतः कारों की सुविधा का मूल्यांकन इस प्रकार किया जा सकता है जिससे कर्मचारी को लाभ हो, अर्थात् बड़ी कार कार्यालयीन एवं निजी कार्य के लिए मानी जा सकती है तथा छोटी कार केवल निजी कार्य के लिए मानी जा सकती है।

6. यदि कार कर्मचारी की है (Car owned by the employee)-(a) यदि कार को व्यापार अथवा पेशे के लिए ही चलाने, रख-रखाव व चालक के वेतन का भार नियोक्ता पर है तो इस अनुलाभ का मूल्य शून्य होगा बशर्ते निर्धारित शर्ते पूरी हों।

(b) जब कार आंशिक रूप से व्यापार अथवा पेशे के काम आती है और आंशिक रूप से कर्मचारी या उसके परिवार के सदस्य के काम आती है और सम्पूर्ण व्यय नियोक्ता वहन करता है—-

(i) छोटी कार-नियोक्ता द्वारा वहन की गई राशि में से रू. 1,800 प्रति माह + रू. 900 प्रति माह चालक का वेतन घटाकर (यदि चालक हो तो) शेष राशि अनुलाभ का मूल्य होगा बशर्ते निर्धारित शर्ते पूरी हों।

(ii) बड़ी कार-नियोक्ता द्वारा वहन की गई राशि में से रू. 2,400 प्रति माह + रू. 900 प्रति माह चालक का वेतन घटाकर (यदि चालक हो तो) शेष राशि अनुलाभ का मूल्य होगा बशर्ते निर्धारित शर्ते पूरी हों।

(c) कार पूर्णरूपेण कर्मचारी या उसके परिवार के सदस्य के काम आती है तो नियोक्ता द्वारा दी गई राशि कार की सुविधा का मूल्य माना जाएगा।

7. कर्मचारी का कार के अतिरिक्त automotive वाहन (Automotive conveyance other than car owned by the employee)-(a) यदि वाहन को व्यापार अथवा पेशे के लिए ही चलाने एवं रख-रखाव का भार नियोक्ता पर है तो अनलाभ का मूल्य शून्य होगा बशर्ते निर्धारित शर्ते पूरी हों।

(b) जब वाहन आंशिक रूप से व्यापार अथवा पेशे के काम आता है और आंशिक रूप से कर्मचारियों के काम आता है और सम्पूर्ण व्यय नियोक्ता वहन करता है—

नियोक्ता द्वारा वहन की गई राशि में से रू. 900 प्रति माह घटाकर शेष राशि अनुलाभ का मूल्य होगा बशर्ते निर्धारित शर्ते पूरी हों।

निर्धारित शर्ते (Fixed conditions)-जब नियोक्ता या कर्मचारी यह कहता है कि कार पूर्णरूपेण व्यापार या पेशे के काम आयी है अथवा कर्मचारी की कार या अन्य वाहन पर व्यापार अथवा पेशे के लिए व्यय रू. 1,800/2,400/900 से अधिक है तो कर्मचारी को अधिक कटौती मिल सकती है बशर्ते निम्नलिखित प्रलेख रखे जाएँ

(i) व्यापार अथवा पेशे के लिए यात्रा का पूर्ण विवरण, जिसमें यात्रा की तिथि, जाने का स्थान, दूरी तथा इस पर होने वाला व्यय शामिल है,

(ii) नियोक्ता कर्मचारी को एक प्रमाण-पत्र दे जिसमें यह उल्लेख हो कि व्यय पूर्णरूपेण व्यापार अथवा पेशे के लिए ही किया गया है।

प्रश्न 5 – वार्षिक मूल्य की परिभाषा दीजिए। मकान-सम्पत्ति की कर योग्य आय की गणना करने के लिए वार्षिक मूल्य में से घटाई जाने वाली स्वीकृत कटौतियों का वर्णन कीजिए।

Define annual value. State the deductions that are allowed from the annual value for computing the income from house property. 

अथवा मकान-सम्पत्ति का वार्षिक मूल्य क्या है? विभिन्न परिस्थितियों में इसकी गणना किस प्रकार की जाती है?

What is annual value of house property ? How is it determined in different circumstances ? 

अथवा किराया नियन्त्रण अधिनियम के अन्तर्गत आने वाले तथा किराये पर उठे मकान का वार्षिक मूल्य आप कैसे निर्धारित करेंगे? मकान-सम्पत्ति की कर योग्य आय की गणना करने के लिए वार्षिक मूल्य में से घटाई जाने वाली स्वीकृत कटौतियों का वर्णन कीजिए।

How will you determine the annual value of let-out house covered under Rent Control Act ? State the deductions that are allowed from the annual value for computing the income from house property. 

उत्तर- मकान-सम्पत्ति के वार्षिक मूल्य का अर्थ

(Meaning of Annual Value of House Property) 

मकान – सम्पत्ति के वार्षिक मूल्य से आशय उस मूल्य से है जिस पर यह सम्पत्ति प्रतिवष उचित किराये पर उठाई जा सकती है। इस प्रकार प्राप्त आय उतनी महत्त्वपूर्ण नहीं है जितना कि किराये पर उठाए जाने की क्षमता महत्त्वपूर्ण है।

आयकर अधिनियम की धारा 23 (1) के अनुसार मकान सम्पत्ति के वार्षिक मूल्य से उस राशि से है जिस पर वह मकान-सम्पत्ति प्रतिवर्ष उचित किराये पर उठाई जा है (चाहे वह मकान-सम्पत्ति किराये पर उठी हो या मकान मालिक उसमें स्वयं रहता परन्तु यदि किराये पर उठी हुई मकान-सम्पत्ति का वास्तविक किराया (वार्षिक) उचित गये से अधिक हो तो वास्तविक किराये को ही उस मकान-सम्पत्ति का वार्षिक मूल्य माना जाएगा। वार्षिक मूल्य का निर्धारण निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है –

(1) नगरपालिका अथवा नगरनिगम द्वारा स्थानीय करों के लिए निर्धारित मकान-सम्पत्ति का वार्षिक मूल्य।

(ii) मकान-सम्पत्ति का वास्तविक किराया। 

(iii) उसी क्षेत्र में इसी प्रकार की अन्य मकान-सम्पत्ति का किराया।

(iv) ऐसा काल्पनिक किराया जिस पर यह मकान-सम्पत्ति आसानी से किराये पर उठाई जा सकती हो।

इस प्रकार मकान-सम्पत्ति का वार्षिक मूल्य वह राशि है जो उपरिवर्णित चारों राशियों में सबसे अधिक होती है। यदि किराया नियन्त्रण अधिनियम (Rent Control Act) के अन्तर्गत किसी मकान सम्पत्ति का मानक किराया (Standard Rent) निर्धारित कर दिया जाता है तो ऐसी मकान-सम्पत्ति का वार्षिक मूल्य उसके मानक किराये से अधिक नहीं होगा, लेकिन यदि मकान मालिक अपने किरायेदार से मानक किराये से अधिक किराया वसूल कर रहा है तो वास्तविक रूप से प्राप्त किराये के अनुसार ही ऐसी मकान-सम्पत्ति का वार्षिक मूल्य निर्धारित होगा।

मकान-सम्पत्ति के वार्षिक मूल्य की गणना 

(Computation of Annual Value of House Property) 

वार्षिक मूल्य की गणना करने के लिए मकान-सम्पत्ति को निम्नलिखित तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है

(1) ऐसी मकान-सम्पत्ति जो पूर्ण रूप से किराये पर उठी हुई हो, (2) ऐसी मकानसम्पत्ति जो पूर्ण रूप से मालिक के स्वयं रहने के लिए प्रयोग होती हो, (3) ऐसी मकान-सम्पत्ति जिसके कुछ भाग में किरायेदार रहता हो तथा शेष भाग में मालिक स्वयं रहता हो।

इनके सम्बन्ध में विस्तृत विवेचन निम्नलिखित है___ 1. किराये पर दी हई मकान-सम्पत्ति का वार्षिक मूल्य (Annual Value of House Property Let-out)-किराये पर उठी मकान-सम्पत्ति से प्राप्त वास्तविक किराये की राशि की तुलना, नगरपालिका द्वारा दिए गए मूल्यांकन, अनुमानित किराये की राशि, अर्थात् वह काल्पनिक किराये की राशि जिस पर मकान-सम्पत्ति को उचित रूप से किराये पर उठाया जा सकता है, से की जाती है तथा इसमें जो भी राशि अधिक होती है वह राशि ही वार्षिक मूल्य का आधार मान ली जाती है। यदि मकान-सम्पत्ति किराया नियन्त्रण अधिनियम (Rent Control Act) के अन्तर्गत किराये पर उठाई हुई है तो वास्तविक किराये की राशि और किराया नियन्त्रण अधिनियम के अन्तर्गत प्रमापित किराये की राशि, जो भी दोनों में अधिक हो. वही किराये की राशि मानी जाती है। इसमें से नगरपालिका कर (Municipal Tax), जिसको मालिक ने गत वर्ष में चुकाया है (चाहे ये विगत किसी भी वर्ष से सम्बन्धित हों), घटा दिए जाते हैं। इस प्रकार से जो राशि शेष रहती है उसे ही ‘वार्षिक मूल्य’ कहते हैं।

संक्षेप में पूर्ण रूप से किराये पर दी गई मकान-सम्पत्ति का वार्षिक मूल्य निम्नवत निर्धारित किया जाता है

वास्तविक किराया या उचित अनुमानित किराया या नगरपालिका मूल्यांकन (जो भी सर्वाधिक हो) लेकिन 

घटाया-(i) मालिक द्वारा चुकाए गए नगरपालिका/स्थानीय कर 

(ii) मकान के स्वामी द्वारा किरायेदार को दी गई अन्य

सुविधाओं का मूल्य; जैसे-लिफ्ट, लिफ्ट चालक, 

जीने की बत्ती, माली का वेतन आदि।

वार्षिक मूल्य (Annual Value) 

2. स्वयं के रहने की मकान-सम्पत्ति का वार्षिक मूल्य (Annual Value of Selfoccupied House Property)-यदि किसी मकान अथवा उसके किसी हिस्से में मकान का स्वामी स्वयं रहता हो तो ऐसे मकान अथवा उसके ऐसे हिस्से का वार्षिक मूल्य शून्य होगा बशर्ते वह एक वर्ष में किसी भी समय किराये पर न उठा दिया गया हो तथा उससे मकान के स्वामी को कोई लाभ प्राप्त न हो।

यदि करदाता ने स्वयं के रहने के लिए एक से अधिक मकान रखे हुए हैं तो किसी भी एक मकान (जिसे करदाता चुने) का वार्षिक मूल्य शून्य माना जाएगा। इस प्रकार चुने गए मकान के अतिरिक्त करदाता के स्वयं के रहने के अन्य मकानों का वार्षिक मूल्य इस प्रकार ज्ञात किया जाएगा जैसे कि वे किराये पर उठे हों।

सहस्वामित्व की मकान सम्पत्ति (Coownership of House Property)-यदि किसी मकान-सम्पत्ति के दो या दो से अधिक स्वामी हों और उसमें उनका हिस्सा निश्चित है तो प्रत्येक सहस्वामी के हिस्से का वार्षिक मूल्य पृथक्-पृथक् ज्ञात किया जाएगा और उनकी कुल आय में शामिल होगा तथा वे व्यक्तियों के समुदाय के रूप में कर-योग्य नहीं होंगे। इसके अतिरिक्त यदि मकान-सम्पत्ति के सहस्वामी अपने-अपने हिस्से में स्वयं रहते हैं तो ये धारा 23 (2) के अन्तर्गत कर-मुक्त होंगे। । 

स्वयं के रहने की केवल एक मकान सम्पत्ति हो और गत वर्ष में वह खाली पड़ी रही हो (There is only one Self-occupied House Property and that has remained vacant for the Previous Year)-यदि किसी करदाता के स्वयं के रहने की केवल एक ही सम्पत्ति है और उसमें वह नौकरी या व्यापार अथवा पेशा किसी अन्य जगह होने के कारण गत वर्ष बिल्कुल नहीं रहा है तो ऐसी मकान-सम्पत्ति का वार्षिक मूल्य शून्य होगा बशर्ते कि वह मकान-सम्पत्ति वास्तव में किराये पर न उठाई गई हो तथा करदाता ने इससे कोई अन्य लाभ भी प्राप्त नहीं किया हो।

यदि स्वयं के रहने के मकान (जिसका वार्षिक मल्य शन्य माना गया है) को क्रय करन अथवा उसका निर्माण कराने के लिए करदाता ने कोई ऋण लिया हो तो उसका ब्याज आधका रू. 30,000 वार्षिक तक कटौती-योग्य होगा तथा यदि ऐसे मकान का निर्माण 1 अप्रैल, 1999 का अथवा इसके बाद किया है तो उसका ब्याज रू. 1,50,000 वार्षिक तक कटौती-योग्य होगा। एस मकान के सम्बन्ध में धारा 24 (1) के अन्तर्गत अन्य कोई कटौती स्वीकृत नहीं होगी।

(iii) दोषी किरायेदार करदाता की किसी अन्य मकान सम्पत्ति में न रह रहा हो।

(iv) करदाता ने किराये की वसूली के लिए सभी आवश्यक कानूनी कार्यवाही परी का ली हो, या आयकर अधिकारी को इस बात से सन्तुष्ट कर दिया हो कि कानूनी कार्यवाही बेकार सिद्ध होगी।

(v) जिस मकान-सम्पत्ति का किराया वसूल नहीं हुआ है, उसका वार्षिक मूल्य सम्बन्धित गत वर्ष की कर-योग्य आय में सम्मिलित कर लिया गया है तथा उस पर आयकर दे दिया गया है।

(vi) यह कटौती की राशि मकान-सम्पत्ति से आय शीर्षक के अन्दर कर-योग्य आय (इस कटौती से पूर्व की आय) से अधिक नहीं होनी चाहिए।

उदाहरण – यदि इस शीर्षक की कर-योग्य आय, इस कटौती को घटाने से पूर्व रू. 35,000 है और अप्राप्त किराया ₹ 40,000 है तो इस कर-निर्धारण वर्ष से यह छट ₹ 35,000 तक ही स्वीकृत होगी और करदाता को रू. 5,000 की इस अस्वीकृत राशि को अगले कर-निर्धारण वर्षों में ले जाकर समायोजित कराने का अधिकार होगा। 

धारा 24 के अन्तर्गत कटौतियों पर प्रतिबन्ध 

(Restrictions on Deductions u/s 24)

(1) यदि किसी मकान अथवा उसके किसी हिस्से में मकान का स्वामी रहता है अथवा किसी अन्य स्थान पर अपने व्यापार या पेशा अथवा नौकरी के होने के कारण मकान मालिक अपने मकान में पूरे वर्ष नहीं रह सका है, अर्थात् जब मकान-सम्पत्ति का वार्षिक मूल्य शून्य माना जाता है तो धारा 24 के अन्तर्गत मकान हेतु लिए गए ऋण पर ब्याज की कटौती को छोड़कर अन्य कोई कटौती स्वीकृत नहीं होती। ऐसे मकान को बनवाने, नवीनीकरण कराने अथवा मरम्मत कराने के लिए यदि कोई ऋण लिया गया है तो उसका ब्याज अधिकतम ₹ 30,000 या ₹ 1,50,000 जैसी भी स्थिति हो तक मानक कटौती के लिए स्वीकृत होगा।

(2) यदि स्वयं के रहने का मकान या उसका कोई हिस्सा गत वर्ष में कुछ अवधि के लिए किराये पर उठा दिया गया है तो धारा 24 के अन्तर्गत स्वीकृत कटौतियों का योग ऐसे मकान अथवा उसके हिस्से के वार्षिक मूल्य से अधिक नहीं होगा।

मकान-सम्पत्ति शीर्षक से हानि

(Loss on Head of House Property) 

यदि उपर्युक्त स्वीकृत कटौतियों का योग (न वसूल हुए किराये की राशि को छोड़कर) मकान-सम्पत्ति के समायोजित वार्षिक मूल्य से अधिक है तो मकान-सम्पत्ति से आय शीर्षक में हानि रहेगी जिसे करदाता उसी वर्ष की अन्य मकान-सम्पत्ति की आय में से घटा सकता है और यदि अन्य मकान-सम्पत्ति की आय हानि से कम है तो शेष हानि को (न वसूल हुए किराये को छोड़कर) आय के अन्य शीर्षकों की आय में से घटा सकता है, परन्तु मकान-सम्पत्ति की अशोधित हानि को (न वसूल हुए किराये को छोड़कर) अगले वर्षों की आय में से नहीं घटाया जा सकता।

मकान-सम्पत्ति की आय में से न घटने वाली राशि 

(Amount not to be Deductible from House Property Income)

धारा 25 के अनुसार यदि वार्षिक प्रभार या मकान-सम्पत्ति के सम्बन्ध में लिए गए ऋण पर ब्याज का भुगतान भारत से बाहर किया गया है और भुगतान करते समय उसमें से भारतीय आयकर अधिनियम के अन्तर्गत आयकर नहीं काटा गया है और उस विदेशी प्राप्तकर्ता की ओर से भारत में कोई अभिकर्ता (agent) भी नहीं है, जिससे इस सम्बन्ध में आयकर की वसूली की जा सके तो करदाता ऐसे वार्षिक प्रभार अथवा ऋण पर ब्याज की राशि को मकान सम्पत्ति के वार्षिक मूल्य में से नहीं घटा सकेगा।

न वसूल हुए किराये की रकम की कटौती स्वीकृत होने के बाद किराया वसूल हो जाना-धारा 25AA के अनुसार यदि न वसूल हुए किराये की रकम के लिए कटौती स्वीकार कर दी गई है और बाद में किसी गत वर्ष में करदाता को यह राशि वसूल हो जाती है तो इस प्रकार वसूल हुई रकम ‘मकान-सम्पत्ति से आय’ शीर्षक में कर-योग्य होगी और इसमें से धारा 23 अथवा 24 के अन्तर्गत कोई कटौती नहीं दी जाएगी भले ही करदाता उस वर्ष में उस मकान का स्वामी हो या न हो। इसका आशय यह है कि यदि करदाता न वसूल हुए किराये को वसूल करने के लिए कोई व्यय करता है तो ऐसे व्यय भी वसूल हुए किराये में से नहीं घटाए जाएँगे और वसूल की हुई सम्पूर्ण राशि उसकी आय में शामिल की जाएगी।

विदेश में स्थित मकान-सम्पत्ति 

(House Property situated in Foreign Country) 

विदेश में स्थित मकान-सम्पत्ति की आय पर केवल निवासी (Resident) व्यक्ति को ही कर देना होता है। ऐसी मकान-सम्पत्ति की आय उपर्युक्त विधि से ही ज्ञात की जाएगी।

प्रश्न 6 – व्यापार व पेशे शीर्षक की कर-योग्य आय की गणना करने कौन-कौन से व्यय स्वीकृत हैं? समझाइए।

What are the admissible deductions in computing the taxable income from ‘business of profession’ head ? Discuss.

उत्तर – व्यापार व पेशे शीर्षक की कर-योग्य आय की गणना करने में निम्नलिखित कटौतियाँ स्वीकृत हैं

स्पष्टतया स्वीकृत कटौतियाँ

(Deductions Expressly Allowed) 

1. भवन के सम्बन्ध में व्यय – किराया, स्थानीय कर, मरम्मत व्यय, भूमि लगान, अग्नि बीमा प्रीमियम। _

2. मशीन, प्लाण्ट तथा फर्नीचर के सम्बन्ध में व्यय – मरम्मत व्यय एवं बीमा प्रीमियम।

3. (i) मूर्त सम्पत्तियों पर ह्रास-मूर्त सम्पत्तियाँ; जैसे-भवन, मशीन, प्लाण्ट एवं फर्नीचर।

(ii) अमूर्त सम्पत्तियों पर हास-अमूर्त सम्पत्तियाँ; जैसे-तकनीकी ज्ञान, पेटेण्ट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, लाइसेन्स, विशेषाधिकार आदि।

4. चाय विकास खाता, कॉफी विकास खाता या रबड़ विकास खाता में जमा की गई राशि के सम्बन्ध में कटौती जमा की गई राशि या ऐसे व्यापार के लाभ के 40% के बराबर, जो भी कम हो, मिलेगी।

5. भारत में पेट्रोलियम या प्राकृतिक गैस के पूर्वेक्षण, निष्कर्षण अथवा उत्पादन से आय में से विशेष खाते में जमा की गई राशि के सम्बन्ध में कटौती जमा की गई राशि या ऐसे व्यापार के लाभ के 20% के बराबर, जो कम हो मिलेगी। _

6. वैज्ञानिक अनुसन्धान पर व्यय – (i) लाभगत व्यय एवं पूँजीगत व्यय की कटौती।

(ii) अनुमोदित अनुसन्धान संस्था, विश्वविद्यालय, महाविद्यालय अन्य शिक्षा संस्था का वैज्ञानिक अनुसन्धान के लिए दी गई राशि के 175% के बराबर कटौती मिलेगी।

(iii) सामाजिक विज्ञान अथवा सांख्यिकी से सम्बन्धित अनुसन्धान के लिए दी गई राशि के 125% के बराबर कटौती मिलेगी।

(iv) निर्धारित शर्ते पूरी करने पर अन्दरूनी अनुसन्धान तथा विकास पर व्यय के सम्बन्ध में 200% के बराबर कटौती मिलेगी।

7. दूरभाष यन्त्र के संचालन का लाइसेन्स प्राप्त करने के लिए किए गए पूजागत के सम्बन्ध में कटौती।

8. किसी पात्र परियोजना या स्कीम पर व्यय। 

9. विनिर्दिष्ट व्यवसाय के व्यय। 

10. ग्राम विकास के लिए राष्ट्रीय कोष या शहरी गरीबी उन्मूलन कोष में दी गई राशि।

11. करदाता द्वारा कृषि परियोजना विस्तार पर व्यय-व्यय के सम्बन्ध में 150% के बराबर कटौती मिलेगी।

12. कम्पनी द्वारा कौशल विकास परियोजना पर व्यय-व्यय के सम्बन्ध में 150% के बराबर कटौती मिलेगी।

13. भारतीय कम्पनी या भारत में निवासी को प्रारम्भिक व्ययों के सम्बन्ध में कटौती–पाँच वर्षों में निर्धारित सीमा तक कटौती योग्य।

14. भारतीय कम्पनी द्वारा समामेलन या अविलयन के प्रयोजनार्थ व्यय-पाँच समान वार्षिक किस्तों में कटौती योग्य है।

15. कर्मचारी की स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति के सम्बन्ध में किसी गत वर्ष में व्यय-पाँच वार्षिक किस्तों में कटौती योग्य है।

16. भारतीय कम्पनी या भारत में निवासी व्यक्ति द्वारा खनिज पदार्थों की खोज आदि पर व्यय-दस समान वार्षिक किस्तों में कटौती योग्य है।

17. अन्य कटौतियाँ

(i) माल का बीमा कराने का बीमा प्रीमियम। 

(ii) कर्मचारियों को बोनस या कमीशन। 

(iii) कर्मचारियों के स्वास्थ्य के लिए-बीमा प्रीमियम। 

(iv) ऋण पर ब्याज।

(v) प्रमाणित प्रॉविडेण्ट फण्ड, अनुमोदित सुपरऐनुएशन फण्ड, अनुमोदित ग्रेच्युटी फण्ड में नियोक्ता का अंशदान।

(vi) जीरो कूपन बॉण्ड पर छूट।

(vii) बैंकों तथा वित्तीय संस्थाओं को डूबत तथा संदिग्ध ऋणों के लिए निर्धारित सीमा तक आयोजन।

(viii) डूबत ऋण। 

(ix) पशुओं के काम के लिए अयोग्य होने अथवा उनकी मृत्यु हो जाने पर हानि।

(x) विनिर्दिष्ट संस्था का संचय-विशेष संचय खाते में जमा की गई राशि या लाभ का 20% जो दोनों में कम हो। 

(xi) कम्पनी द्वारा कर्मचारियों के सम्बन्ध में परिवार नियोजन पर व्यय –

(क) पूँजीगत व्यय-पाँच समान वार्षिक किस्तों में कटौती योग्य है।

(ख) लाभगत व्यय। 

(xii) अतिथि गृह के व्यय। 

(xiii) बैंककारी नकद संव्यवहार कर की राशि। 

(xiv) आयकर के सम्बन्ध में कानूनी कार्यवाही के व्यय। 

(xv) कर्मचारी के पेंशन स्कीम खाते में अभिदाय। 

(xvi) कर-योग्य प्रतिभूति व्यवहार कर की राशि। 

18. सामान्य सिद्धान्तों के अनुसार स्वीकृत व्यय –

बशर्ते व्यय 

(i) पूँजीगत व्यय नहीं है,

(ii) करदाता का निजी व्यय नहीं है,

(iii) गत वर्ष से सम्बन्धित ऐसा व्यय है जो पूर्णतया व्यापार या पेशे के लिए किया गया है।

स्पष्टतया अस्वीकृत व्यय

(Deductions Expressly Disallowed) 

1. किसी राजनीतिक दल द्वारा प्रकाशित सोविनियर आदि में विज्ञापन पर व्यय।

2. निवासी को ब्याज, कमीशन या दलाली, किराया, रॉयल्टी, पेशेगत सेवाओं के लिए फीस या तकनीकी सेवाओं के लिए फीस या ठेकेदार या उपठेकेदार को देय राशि, जिस पर उद्गम स्थान पर कर की कटौती की जानी चाहिए थी, परन्तु नहीं की गई।

3. भारत के बाहर भुगतान या अनिवासी या विदेशी कम्पनी को भुगतान यदि उद्गम स्थान पर कर नहीं काटा गया है।

4. आयकर अथवा धन कर की राशि तथा इन पर चुकाया गया अर्थदण्ड या ब्याज। 

5. दान, उपहार, चन्दा जिसका सम्बन्ध व्यापार या पेशे से न हो। 

6. कर्मचारियों के अनुलाभ पर स्वेच्छा से दी गई आयकर की राशि।

7. वेतन शीर्षक में कर-योग्य भुगतान यदि भारत के बाहर किया गया है या अनिवासी को किया गया है और उस पर उद्गम स्थान पर कर की कटौती नहीं की गई है या उस पर कर का भुगतान नहीं किया गया है।

व्यय जो कुछ परिस्थितियों में कटौती योग्य नहीं है

(Expenses not Deductible in Certain Circumstances) 

1. रिश्तेदारों आदि को बाजार भाव से अधिक भुगतान कटौती योग्य नहीं है।

2. कर्मचारियों के रिटायर होने अथवा नौकरी समाप्त होने पर ग्रेच्युटी भुगतान के लिए आयोजन बशर्ते ग्रेच्युटी फण्ड मान्य नहीं है।

3. गैर-अनुमोदित फण्ड में नियोक्ता का अंशदान।

4. रोकड़ में रू. 35,000 से अधिक का भुगतान-100% भाग अस्वीकृत व्यय होता है। इस प्रावधान के कुछ अपवाद भी हैं।

प्रश्न 7- हास से आप क्या समझते हैं? ह्रास के सम्बन्ध में कुछ महत्त्वपूर्ण बातें समझाइए।

What do you understand by depreciation ? Discuss some important points regarding depreciation.उत्तर – जब कोई सम्पत्ति करदाता अपने व्यापार में प्रयोग करता है तो ऐसा प्रयोग हान के कारण उस सम्पत्ति के मूल्य में जो कमी आ जाती है उसे उस सम्पत्ति का ह्रास कहते है। वास्तव में किसी भी सम्पत्ति का कुल उपयोगी जीवन एक निश्चित समय तक होता है। इस निश्चित समय के बाद उसके उपयोग की क्षमता धीरे-धीरे घटती जाती है और उसका मूल्य क्रमश: कम होता जाता है। अत: आयकर अधिनियम के अनुसार सम्पत्ति के मूल्य/अपलिाख मूल्य पर निर्धारित दरों से ह्रास स्वीकृत किया जाता है।

हास के सम्बन्ध में कुछ महत्त्वपूर्ण बातें

(Some Important points Regarding Depreciation) 

1. सम्पत्तियाँ जिन पर हास मिलता है (Assets Eligible for Depreciation)

(अ) मूर्त सम्पत्तियाँ (Tangible Assets)-भवन, मशीन अथवा प्लाण्ट तथा फर्नीचर पर हास स्वीकृत होता है।

भवन से आशय केवल भूमि पर बने हुए ढाँचे से है। इसमें भूमि शामिल नहीं होती है, क्योंकि भूमि प्रयोग से हासित नहीं होती है। भवन में सड़कें, पुल, पुलियाँ, कुएँ तथा नलकूप शामिल हैं।

प्लाण्ट में समद्री जहाज, गाड़ियाँ, पुस्तकें, वैज्ञानिक यन्त्र, शल्यकर्म यन्त्र आदि शामिल हैं, जो व्यापार अथवा पेशे में प्रयोग हो रहे हों, परन्तु इसमें पशु, चाय के पौधे, भवन, फर्नीचर एवं फिटिंग शामिल नहीं हैं।

(ब) अमूर्त सम्पत्तियाँ (Intangible Assets)-व्यापार या व्यवसाय के लिए काम में लायी जाने वाली अमूर्त सम्पत्तियाँ; जैसे-तकनीकी ज्ञान (know-how), पेटेण्ट, प्रतिलिप्याधिकार (Copyright), ट्रेडमार्क (Trademark), अनुज्ञप्ति (Licence), विशेषाधिकार (Franchises), जो 31-3-1998 के पश्चात् प्राप्त किए गए हैं, पर कर-निर्धारण वर्ष 1999-2000 से ह्रास स्वीकार होता है। 

II. हास स्वीकार करने की शर्ते (Conditions for Allowance of Depreciation)

(अ) सम्पत्ति का स्वामी करदाता होना चाहिए, पूर्णतया अथवा आंशिक। किराये पर अथवा पट्टे पर ली गई सम्पत्ति पर ह्रास स्वीकृत नहीं होगा क्योंकि ऐसी सम्पत्ति के सम्बन्ध में किराये की कटौती मिलती है।

(ब) सम्पत्ति गत वर्ष में करदाता के व्यापार अथवा पेशे में प्रयोग होनी चाहिए तथा सम्पत्ति गत वर्ष के अन्तिम दिन भी इसी प्रकार प्रयोग होती रहनी चाहिए। 

III. सम्पत्तियों का खण्ड (Block of Assets)

ऐसी मूर्त सम्पत्तियाँ जो एक ही वर्ग की हों (जैसे—भवन, मशीनरी, संयन्त्र अथवा फर्नीचर) अथवा अमूर्त सम्पत्तियाँ (तकनीकी ज्ञान, पेटेण्ट, ट्रेडमार्क आदि) तथा जिन पर ह्रास की एकसमान दर लागू है, सम्पत्तियों का एक खण्ड (Block of Assets) कहलाता है। ह्रास सम्पत्तियों के एक खण्ड के आधार पर स्वीकृत होता है जो उस खण्ड के अपलिखित मूल्य पर निर्धारित दर से घटाया जाता है। 

IV. (Methods of Depreciation)

(अ) सम्पत्तियों के खण्ड के अपलिखित मूल्य पर निर्धारित दरों से ह्रास स्वीकृत होगा।

(ब) यदि कोई औद्योगिक उपक्रम शक्ति के उत्पादन अथवा उत्पादन एवं वितरण (Generation of power of generation and distribution of power) में लगा है तो उसकी सम्पत्तियों की वास्तविक लागत पर निर्धारित दरों से ह्रास लिया जा सकता है।

v. गत वर्ष में प्राप्त तथा प्रयोग की गयी सम्पत्तियाँ 

(Assets acquired and put to use during the previous year)

गत वर्ष में प्राप्त कोई सम्पत्ति यदि व्यापार में 180 दिन से कम प्रयोग की जाए तो उस सम्पत्ति के सम्बन्ध में उस गत वर्ष के लिए सामान्य ह्रास का 50% ह्रास स्वीकृत होता है। 

VI. हास की अनिवार्य कटौती (Compulsory Deduction for Depreciation)

यदि करदाता अपनी कुल आय की गणना करते समय ह्रास की कटौती नहीं करता तो भी उसे ह्रास की कटौती दी जाएगी। 

VII. विदेश में निर्मित मोटर-कार पर हास 

(Motor-car manufactured outside India)

यदि विदेश में निर्मित मोटर-कार भारत में व्यवसाय या पेशे में प्रयोग के लिए 31-3-2001 के पश्चात् क्रय की जाती है तो उस पर ह्रास स्वीकार होगा। 

VIII. पट्टे पर अथवा किराये पर लिये हुए भवन पर हास 

(Depreciation Allowance to Assessees carrying on their business in lease or rented premises)

यदि कोई करदाता अपना व्यापार अथवा पेशा पट्टे पर अथवा किराये पर लिए हुए भवन में चला रहा है तो उस भवन पर कोई ह्रास स्वीकृत नहीं होगा क्योंकि ऐसे भवन का स्वामी करदाता नहीं है, परन्तु यदि वह अपने व्यापार अथवा पेशे के लिए उस भवन में विकास, नवीनीकरण अथवा सुधार के लिए कुछ बनवाता है तो ऐसे पूँजीगत व्यय के सम्बन्ध में उसे ह्रास स्वीकार होगा।

प्रश्न 8 – पूँजी लाभ से आप क्या समझते हैं? ये कितने प्रकार के होते हैं? इनकी गणना कैसे की जाती है?

What do you mean by Capital Gain ? What are its types ? How are they computed ? 

अथवा अल्पकालीन एवं दीर्घकालीन पूँजी लाभों को समझाइए।

Discuss short-term and long-term capital gains. 

उत्तर – पूँजी लाभ (Capital Gain)

आयकर अधिनियम की धारा 45 (1) के अनुसार किसी पूँजी सम्पत्ति के हस्तान्तरण से उदय होने वाला लाभ ‘पूँजी लाभ’ कहलाता है। 

पूँजी लाभ के प्रकार (Kinds of Capital Gain)

पूँजी लाभ निम्न दो प्रकार का होता है -1. दीर्घकालीन पूँजी लाभ (Long-term Capital Gain)-यदि कोई पूजा सम्पत्ति करदाता के पास 36 माह से अधिक रहती है तो ऐसी पूँजी सम्पत्ति के हस्तान्तरण होने वाला लाभ ‘दीर्घकालीन पूँजी लाभ’ कहलाता है। अंशों, सूचीकृत प्रतिभूतियों एव यूनिटा की दशा में जो करदाता के पास हस्तान्तरण की तिथि से ठीक पूर्व 12 माह या 12 माह अधिक रहे हों तो इन्हें दीर्घकालीन पूँजी सम्पत्ति माना जाता है। इनके हस्तान्तरण पर हाना लाभ को दीर्घकालीन पूँजी लाभ करयोग्य रहेगा।

2. अल्पकालीन पूँजी लाभ (Short-term Capital Gain)-यदि कोई पूँजीसम्पत्ति करदाता के पास 36 माह या 36 माह से कम समय तक रहती है तो ऐसी पँजी सम्पत्ति के हस्तान्तरण से होने वाला लाभ ‘अल्पकालीन पूँजी लाभ’ कहलाता है। एक कम्पनी के अंश जो अंश-सूचीकृत प्रतिभूतियाँ तथा अन्य प्रतिभूतियाँ जो स्कन्ध विपणि में अनुसूचित हों एवं भारतीय प्रन्यास की यूनिटें एवं धारा 10 (23D) में निर्दिष्ट म्यूचुअल फण्ड की यूनिटें करदाता के पास हस्तान्तरण की तिथि से ठीक पूर्व 12 माह या 12 माह से कम रही हों तो इन्हें अल्पकालीन पूँजी सम्पत्ति माना जाता है और इनके हस्तान्तरण से होने वाले लाभ को अल्पकालीन पूँजी लाभ माना जाएगा। सूत्रानुसार

STCG = प्रतिफल की सम्पूर्ण राशि – (प्राप्त करने की लागत

+ सुधार करने की लागत + विक्रय व्यय) 

पूँजी लाभ की गणना विधि 

(Mode of Computation of Capital Gain)

पूँजी लाभों की गणना उन व्यापारिक सिद्धान्तों के आधार पर की जाती है जिनके आधार पर व्यवसाय अथवा पेशे के लाभ ज्ञात किए जाते हैं। आयकर अधिनियम की धारा 48 के अनुसार दीर्घकालीन पूँजी सम्पत्ति के हस्तान्तरण से प्राप्त प्रतिफल की धनराशि में से निम्नलिखित धनराशियाँ घटाने पर जो शेष रहता है, वही पूँजी लाभ होता है

(i) हस्तान्तरण के व्यय, 

(ii) सम्पत्ति को प्राप्त करने की सूचकांकित लागत, 

(iii) सम्पत्ति में सुधार करने की सूचकांकित लागत। 

परन्तु प्रतिभूति संव्यवहार कर की राशि नहीं घटाई जाएगी।

दीर्घकालीन पूँजी सम्पत्ति को प्राप्त करने की सूचकांकित लागत और दीर्घकालीन पूँजी सम्पत्ति में सुधार करने की सूचकांकित लागत ज्ञात करने के लिए मूल्य ह्रास सूचकांक का प्रयोग किया जाता है। इस सन्दर्भ में सम्पत्ति को प्राप्त करने की सूचकांकित लागत, सम्पत्ति में सुधार करने की सूचकांकित लागत और लागत वृद्धि सूचकांक का आशय निम्नवत् है

सम्पत्ति को प्राप्त करने की सूचकांकित लागत (Indexed Cost of Acquisition of the Asset) का आशय उस राशि से है जिसका सम्पत्ति को प्राप्त करने की लागत से वही अनुपात है जो सम्पत्ति के हस्तान्तरण करने वाले वर्ष के लागत मूल्य ह्रास सूचकांक का सम्पत्ति को प्राप्त करने वाले वर्ष अथवा 1-4-2001 से प्रारम्भ होने वाले वर्ष, जो दोनों के बाद हो, के लागत वृद्धि सूचकांक से है। सम्पत्ति को प्राप्त करने की सूचकांकित लागत ज्ञात करने का सूत्र निम्नवत् है

Indexed Cost of Acquisition of the Asset 

Fair Market of the Asset on 1st April, 2001 

or Cost of Acquisition of the Asset, 

whichever is more

Cost Inflation of the Year of Transfer/100 or Cost Inflation of the Year of Acquisition of the Asset,

if acquired after the year 

नोट – यदि सम्पत्ति 1 अप्रैल, 2001 से पूर्व प्राप्त की गई है तो 1 अप्रैल, 2001 को सम्पत्ति का बाजार मूल्य उसकी प्राप्त लागत होगी, लेकिन यदि कोई सम्पत्ति 1 अप्रैल, 2001 के बाद किसी तिथि को प्राप्त की गई है तो उस सम्पत्ति की प्राप्ति की लागत वह वास्तविक लागत होगी जितने में उसे प्राप्त किया गया है। सम्पत्ति में सुधार करने की सूचकांकित लागत (Indexed Cost of Improvement of the Asset) का आशय उस राशि से है जिसका सुधार करने की लागत से वही अनुपात है जो सम्पत्ति का हस्तान्तरण करने वाले वर्ष के लागत वृद्धि सूचकांक का सम्पत्ति में सुधार करने वाले वर्ष के लागत वृद्धि सूचकांक से है। सम्पत्ति में सुधार करने की सूचकांकित लागत ज्ञात करने का सूत्र निम्न प्रकार है

Indexed Cost of Improvement of the Asset

Cost of Improvement X Cost Inflation Index of the of the Asset

Year of Transfer /

100 or Cost inflation of the year of the Improvement of Asset

लागत वृद्धि सूचकांक (Cost Inflation Index) का आशय उस सूचकांक से है “जिसे केन्द्र सरकार ने दीर्घकालीन पूँजी लाभ के लिए सरकारी गजट में अधिसूचित कर दिया है। केन्द्र सरकार ने इस उद्देश्य के लिए (दीर्घकालीन पूँजी लाभ के लिए) ‘लागत वृद्धि सूचकांक’ अधिसूचित किया है। कर निर्धारण वर्ष 2018-19, वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए लागत स्फीति सूचकांक 272 घोषित किया गया है।

हास होने वाली सम्पत्तियों के सम्बन्ध में पूँजी लाभ अथवा पूँजी हानि (Capital Gain or Capital Loss regarding Depreciable Assets)-ऐसी सम्पत्ति के गत वर्ष में हस्तान्तरण पर प्राप्त शुद्ध प्रतिफल यदि उस खण्ड की सम्पत्तियों के गत वर्ष के प्रारम्भ में अपलिखित मूल्य तथा गत वर्ष में इसी खण्ड में प्राप्त की गई किसी सम्पत्ति की लागत तथा हस्तान्तरण के व्ययों के योग से अधिक हो तो ऐसा आधिक्य अल्पकालीन पूँजी लाभ (Short-term Capital Gain) माना जाएगा।

प्रश्न 9 – ‘अन्य साधनों से आय’ शीर्षक में कौन-कौन सी आय जोड़ी जाती हैं तथा इस शीर्षक की कौन-कौन सी स्वीकृत कटौतियाँ हैं?

What incomes are included under the head ‘income from other sources and what are its allowed deductions ?

उत्तर – वे आयें जो इस शीर्षक में कर-योग्य हैं 

निम्नलिखित आयें अन्य साधनों से आय’ के शीर्षक में कर-योग्य हैं- [धारा 56(2)] 

(1) लाभांश (dividends);

(2) लॉटरी का इनाम, वर्ग पहेलियाँ (Crossword Puzzles), घुड़दौड़, ताश, जुआ अथवा शर्त (दॉव) आदि से आय:

(3) नियोक्ता (करदाता) द्वारा अपने कर्मचारियों से प्राप्त प्रॉविडेण्ट फण्ड, सुपरऐनुशन एड अथवा कर्मचारी बीमा अधिनियम, 1948 के अन्तर्गत स्थापित किसी फण्ड में अंशदान;

(4) प्रतिभूतियों पर ब्याज से आय;

(5) मशीन, प्लाण्ट अथवा फर्नीचर को किराये पर उठाने से हुई वह आय जिस पर ‘व्यापार अथवा पेशे’ के शीर्षक में आयकर नहीं लग सकता है।

(6) मशीन, प्लाण्ट अथवा फर्नीचर के साथ भवन को भी किराये पर उठाने से आय;

(7) Keyman बीमा पॉलिसी से प्राप्त राशि (बोनस सहित) यदि यह व्यापार अथवा पेशे अथवा वेतन शीर्षक में कर-योग्य न हो।

नोट – (i) यदि Keyman बीमा पॉलिसी की राशि कर्मचारी को प्राप्त होती है तो यह वेतन शीर्षक में कर-योग्य है;

(ii) यदि राशि उसी व्यावसायिक संस्था को प्राप्त होती है जिसने पॉलिसी ली है तो यह ‘व्यापार अथवा पेशे से आय’ शीर्षक में कर-योग्य है;

(iii) यदि राशि कम्पनी के चेअरमैन या डायरेक्टर (जो कम्पनी का कर्मचारी नहीं है) को मिलती है तो यह ‘अन्य साधनों से आय’ शीर्षक में कर-योग्य है।

(8) किसी व्यक्ति (individual) या हिन्दू अविभाजित परिवार को गत वर्ष में किसी व्यक्ति (person) या व्यक्तियों से निम्नलिखित प्राप्त होता है

परन्तु उपर्युक्त वर्णित प्रावधान निम्नलिखित में से प्राप्त राशि या सम्पत्ति के सम्बन्ध में लागू नहीं होगा –

(i) किसी व्यक्ति को अपने रिश्तेदार से मिले;

(ii) किसी व्यक्ति या हिन्दू अविभाजित परिवार को वसीयत या उत्तराधिकार के रूप में मिले;

(iii) देने वाले या उपहारकर्ता (donor) की मृत्यु को आसन्न मानकर (in contemplation of death) मिले;

(iv) एक व्यक्ति को अपने विवाह पर मिले; 

(v) स्थानीय सत्ता से मिले; 

(vi) ऐसे ट्रस्ट या संस्था से मिले जो धारा 12A या 12AA के अन्तर्गत पंजीकृत है:

(vii) धारा 10(23) में वर्णित विश्वविद्यालय या अन्य शिक्षण संस्थान, अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्थान या किसी ट्रस्ट से मिले।

(viii) कम्पनी के एकीकरण, अविलयन या व्यवसाय के पुनर्गठन की दशा में, (जब सम्पत्ति का अन्तरण धारा 47 के अन्तर्गत अन्तरण नहीं माना जाता);

(ix) एक व्यक्ति द्वारा अपने रिश्तेदार के हित के लिए स्थापित ट्रस्ट को सम्पत्ति का अन्तरण।

स्पष्टीकरण (Clarification)-(A) सम्पत्ति से तात्पर्य निम्नलिखित पूँजी सम्पत्तियों से है

(a) अचल सम्पत्ति-भामि, भवन या दोनों; 

(b) अंश एवं प्रतिभूमि; 

(c) आभूषण; 

(d) पुरातत्वीय संग्रह; 

(e) रेखाचित्र; 

(f) रंगचित्र; 

(g) मूर्तियाँ 

(h) कलाकृतियाँ 

(i) बुलियन।

(B) रिश्तेदार (Relatives)-इस वाक्यांश के लिए रिश्तेदार से तात्पर्य निम्नलिखित से है-

एक व्यक्ति (individual) की दशा में-

(i) व्यक्ति का जीवन साथी; 

(ii) व्यक्ति का भाई या बहिन; 

(iii) व्यक्ति के जीवन साथी का भाई या बहिन; 

(iv) व्यक्ति के माता-पिता में से किसी का भाई या बहिन 

(v) व्यक्ति का कोई पारम्परिक पूर्व पुरुष या वंशज; 

(vi) व्यक्ति के जीवन साथी का कोई पारम्परिक पूर्व पुरुष या वंशज;

(vii) (ii) से (vi) में वर्णित किसी व्यक्ति का जीवन साथी।

कटौतियाँ

(Deductions) 

‘अन्य साधनों से आय’ के शीर्षक में कर-योग्य आय निकालने के लिए निम्नलिखित कटौतियाँ दी जाती हैं

(1) प्रतिभूतियों का ब्याज या लाभांश संग्रह करने के लिए किसी बैंक अथवा अन्य व्यक्ति को दिए गए कमीशन अथवा पारिश्रमिक की उचित राशि।

(2) प्रतिभूतियों या अंशों में विनियोग करने के लिए लिये गए ऋण पर ब्याज भी कटौती-योग्य है बशर्ते कि ऋण की राशि वास्तव में इसी उद्देश्य के लिए प्रयोग की गयी है।

यदि लाभांश कर-मुक्त है तो उपर्युक्त वर्णित खर्चों की कटौती नहीं मिलेगी।

(3) यदि प्रॉविडेण्ट फण्ड आदि में कर्मचारियों का अंशदान करदाता (नियोक्ता) की । आय माना गया हो तो यदि नियोक्ता द्वारा यह राशि कर्मचारियों के खाते में सम्बन्धित फण्ड में देय तिथि (Due Date) तक जमा कर दी जाए तो वह कटौती-योग्य होगी।

(4) मशीन, प्लाण्ट अथवा फर्नीचर (भवन के साथ अथवा बिना भवन के) किराये पर उठाने से आय, जो ‘अन्य साधनों से आय’ शीर्षक में कर-योग्य है, के सम्बन्ध में निम्नलिखित कटौतियाँ उसी प्रकार दी जाएँगी जिस प्रकार ‘व्यापार अथवा पेशे के लाभ’ के शीर्षक में दी जाती हैं

(i) भवन, मशीन, प्लाण्ट अथवा फर्नीचर के सम्बन्ध में चालू मरम्मत पर व्यय;

(ii) भवन, मशीन, प्लाण्ट अथवा फर्नीचर की नुकसानी अथवा बरबादी की जोखिम के सम्बन्ध में दिया हुआ बीमा प्रीमियम तथा

(iii) भवन, मशीन, प्लाण्ट अथवा फर्नीचर का ह्रास।

(5) मृतक कर्मचारी की विधवा अथवा उसके उत्तराधिकारियों को प्राप्त परिवार पेंशन के सम्बन्ध में ऐसी आय के 331% अथवा ₹ 15,000, जो भी दोनों में कम हो, की वैधानिक कटौती दी जाएगी।

(6) शिकमी किरायेदार से प्राप्त किराये में से मकान के स्वामी को चुकाया गया किराया, मरम्मत व्यय आदि कटौती-योग्य हैं। _

(7) अन्य कोई व्यय (जो पूँजी की प्रकृति अथवा व्यक्तिगत व्यय की प्रकृति का न हो), जो पूर्ण रूप से ऐसी आय कमाने के लिए व्यय किया गया है।

(8) क्षतिपूर्ति (Compensation) या अतिरिक्त क्षतिपूर्ति पर प्राप्त ब्याज की राशि में से प्राप्त राशि का पचास प्रतिशत कटोती-योग्य है। इस सम्बन्ध में अन्य कोई कटौती नहीं मिलेगी।

प्रश्न 10 – मिस्टर सुरेश एक कम्पनी से रू. 12,000 मासिक पेंशन प्राप्त कर रहा है। गत वर्ष में उसने अपनी दो-तिहाई पेंशन commute करा ली और रू. 7,38,000 प्राप्त किए। कर-मुक्त राशि की गणना कीजिए यदि (अ) उसने ग्रेच्युइटी भी प्राप्त की है, (ब) उसने ग्रेच्युइटी नहीं प्राप्त की है।

Mr. Suresh is getting a pension of Rs. 12,000 per month from a company. During the previous year he got his two-third pension

commuted and received Rs. 7,38,000. Compute the exempted amount. : 

(a) he also received gratuity; (b) he did not receive gratuity.

हल (Solution):

(a) जब मि० सुरेश को ग्रेच्युइटी भी प्राप्त हुई :

Commuted Value of 2/3 pension = 7,38,000 

Commuted Value of full pension = 

7,38,000×3 + 2 =   11,07,000 

= Exempted amount = Commuted Value of 1/3 pension 

= 11,07,000×1 3 = 3,69,000 

(b) जब मि० सुरेश को ग्रेच्युइटी नहीं प्राप्त हुई :

Commuted Value of 2/3 pension  = 7,38,000 

Commuted Value of full pension

= 7,38,000 x 3 /2 = 11,07,000 

Exempted amount = Commuted Value of 1/2 pension

= 11,07,000×12 = 5,53,500 

प्रश्न 11 – मि. यादव 1 अप्रैल, 1985 से एक फैक्टरी में फोरमैन के पद पर सेवारत था। वह The Payment of Gratuity Act के अन्तर्गत आता है। वह 1 अगस्त, 2017 को सेवानिवृत्त (Retire) हुआ। सेवानिवृत्त होने के समय उसका वेतन रू. 8,000 मासिक था। उसे रू. 200 की वार्षिक वृद्धि प्रतिवर्ष 1 अप्रैल को देय होती है।

उसे कई वर्षों से रू. 800 प्रति माह महँगाई भत्ता मिल रहा था। वह अपने मूल वेतन का 14% प्रमाणित प्रॉविडेण्ट फण्ड में अंशदान करता है तथा उसकी फैक्टरी भी उसके बराबर राशि का अंशदान करती है।

उसे रू. 2,000 मासिक मकान किराया भत्ता भी मिल रहा था, यद्यपि वह अपनी पत्नी के मकान में रह रहा है जिसका वह कोई किराया नहीं देता है। मकान का उचित किराया रू. 800 प्रति माह है। यह मकान श्री यादव का ही था परन्तु उन्होंने इसे बिना उचित प्रतिफल के अपनी पत्नी के नाम हस्तान्तरित कर दिया था।

उसे रू. 1,90,000 ग्रेच्युइटी तथा रू. 2,00,000 प्रॉविडेण्ट फण्ड की राशि प्राप्त हुई। वर्ष 2017-18 में उसे रू. 28,000 पेंशन प्राप्त हुई।

यह मानते हुए कि वेतन माह के अन्तिम दिन देय होती है, उसकी कर-निर्धारण व 2018-19 की कर-योग्य वेतन की गणना कीजिए।

Mr. Yadav was employed as a foreman in a factory since 1st AR 1985. He is covered under the payment of Gratuity Act. He retired service on 1st August, 2017. His pay at the time of retiremen I from

Rs.8.000 per month. His annual increment of 200 falls due on 1st April every year.

He was getting dearness allowance at Rs. 800 p.m. for the last several years. He contributes 14% of basic pay to Recognized Provident Fund to which the factory also contributes an equal amount.

He was also getting house rent allowance at Rs. 2,000 per month, although he is living in his wife’s house for which he does not pay any rent. Fair rental value of the house is Rs. 800 per month. This house belonged to Mr. Yadav but he had transferred it to his wife without adequate consideration.

He received Rs. 1,90,000 for gratuity and Rs. 2,00,000 from Provident Fund. He received Rs. 28,000 pension during the financial year 2017-18.

Assuming that salary is due on the last day of the month, compute his taxable salary 

for the assessment year 2018-19. 

हल (Solution):

Computation of Taxable Salary 

(for the Assessment Year 2018-19)

Salary = 32,000 

Dearness Allowance = 3,200 

Pension = 28,000 

Employer’s Contribution to P.F. in excess of 12% = 640 

House Rent Allowance for 4 months = 8,000 

Gratuity = 27,538 

Gross Salary = 99,378 

Less : Deduction = Nil 

Taxable Salary = 99,378 

नोट – 1. श्री यादव की ग्रेच्युइटी The Payment of Gratuity Act के अन्तर्गत आती है अत: वह निम्न में से सबसे कम राशि तक कर की छट पाने का अधिकारी है –

(i) अन्त में प्राप्त वेतन के आधार पर नौकरी के प्रति सम्पूर्ण वर्ष पर 15 दिन का वेतन; अथवा 

(ii) 20,00,000 रू.; अथवा 

(iii) ग्रेच्युइटी की वास्तव में प्राप्त राशि।

प्रश्न 12 – मिस्टर गुप्ता रू. 11,000 मासिक वेतन पर एक ट्रांसपोर्ट कम्पनी में कार्यरत हैं। कम्पनी की ओर से उसे निवास-गृह मिला हुआ है जिसके लिए उसके वेतन का 10% काटा जाता है। निवास-गृह का वास्तविक किराया कम्पनी ने वार्षिक रू. 54,000 चुकाया है। वह रू. 500 मासिक की दर से मनोरंजन-भत्ता भी प्राप्त करता है। कम्पनी ने उसे एक बड़ी कार उसके कार्यालयीन एवं व्यक्तिगत प्रयोग के लिए दे रखी है पर उस कार के

निजी प्रयोग के व्यय करदाता को ही वहन करने पड़ते हैं। करदाता का परिवार कम्पनी की बसों में अनेक स्थानों का भ्रमण करता रहा है इसके लिए कम्पनी ने उनसे कोई किराया वसूल नहीं किया है। हिसाबी गत वर्ष में इन सब भ्रमण-देशाटनों का सकल किराया रू. 7,200 निर्धारित किया गया है। उसे दो माह के वेतन के बराबर राशि का बोनस भी मिलता है।

कर-निर्धारण वर्ष 2018-19 के लिए वेतन’ शीर्षक में उसकी कर-योग्य आय की गणना कीजिए।

Mr. Gupta is working in a transport company drawing a salary of Rs. 11,000 p.m. The company has provided him with accommodation for which 10% of his salary is deducted. Actual rent paid by the company for the accommodation is Rs. 54,000 p.a. He is also receiving entertainment allowance of Rs. 500 p.m. He is provided by the company a large car for his personal and official use but running and maintenance expenses for private use are born by the assessee himself. Members of the assessee’s family have visited a number of places in company’s buses for which no fare had been charged. Total fare for all these visits during the accounting year amounted to 7,200. He is in receipt of bonus equivalent to 2 month’s salary.

Compute his taxable income under the head ‘Salary’ for the A.Y. 2018-19.

हल (Solution):

Computation of Income from Salary

(for the Assessment Year 2018-19)

Salary Proper = 1,32,000 

Entertainment Allowance = 6,000 

Value of Car (Rs. 900 x 12) = 10,800 

Transport Facility = 7,200 

Bonus = 22,000 

Value of Concession in Rent = 10,800 

Gross Salary = 1,88,800 

Less : Deduction = Nil 

Income from Salary = 1,88,800 

Note:Value of Concession of Rent has been computed as under: 

Salary for the purpose Rs. 1,32,000+ 22,000+ 6,000 =Rs. 1,60,000

15% of Salary = 24,000

Less : Paid by the Assessee = 13,200 

Value of Concession = 10,800

प्रश्न 13 – ‘अ’ दिल्ली में एक मकान-सम्पत्ति का स्वामी है। यह रू. 90,000 वार्षिक किराये पर उठाया हुआ है। स्वामी द्वारा देय नगरपालिका कर रू. 10,000 है। परन्तु मकान के स्वामी ने किरायेदार से समझौता किया हुआ है कि किरायेदार नगरपालिका को कर सीधा चुकाएगा। मकान का स्वामी किरायेदार के लिए सुविधाओं पर एक समझौते के अन्तर्गत निम्न व्यय करता है –

पानी व्यय – 1,000 

लिफ्ट के रख-रखाव पर व्यय – 1,000 

जीने की रोशनी पर व्यय – 800 

माली का वेतन  – 1,200 

मकान का स्वामी निम्न कटौतियों की माँग करता है – 

मरम्मत – 30,000 

मालगुजारी – 1,000 

संग्रह व्यय – 2,000 

भूमि जिस पर मकान बना है, उसे क्रय करने के कानूनी व्यय 24,000

कर-निर्धारण वर्ष 2018-19 के लिए मकान-सम्पत्ति से कर-योग्य आय की गणना कीजिए।

A is the owner of a house porperty in Delhi. It has been let out for Rs. 90,000 p.a.the municipal tax payable by the owner comes to Rs. 10,000 but the landlord has taken an agreement from the tenant stating that the tenant would pay the tax direct to the municipality. The landlord, however, bears the following expenses on tenant’s amenities under an agreement:

Water charges = 1,000 

Lift maintenance = 1,000 

Lighting of Stairs = 800 

Gardener’s Salary = 1,200 

The landlord claims the following deductions : 

Repairs = 30,000 

Land Revenue = 1,000 

Collection charges = 2,000 

Legal expenses incurred in connection with the purchase of land on which the house is built = 24,000 Compute the taxable income from house property for the assessment year 2018-19.

हल (Solution): 

Computation of Taxable Income From House Property

(for the Assessment Year 2018-19)

Rent realized = 90,000 

Less : Value of tenant’s amenities provided 

by the landlord : = 1,000 

(i) Water charges = 1,000 

(ii) Lift maintenance = 800 

(iii) Lighting of Stairs = 1,200 / 4,000 

(iv) Gardener’s Salary = 86,000 

Actual Rent = 90,000 

Gross Annual Value  = 90,000 

Less : Municipal tax paid by the owner = Nill

Annual Value = 90,000

Less : 30% of A.V. = 27,000 

Taxable Income from House Property = 63,000 

नोट – 1. नगरपालिका कर मकान के स्वामी द्वारा वहन नहीं किए जा रहे हैं अत: इसकी कटौती नहीं दी गई है। 

2. मकान का सकल वार्षिक मूल्य निम्न प्रकार निर्धारित किया गया है

(क) अनुमानित किराया-M.V. रू. 75,000, उचित किराया रू. 1,00,000, परन्तु मानक किराये रू. 90,000, से अधिक नहीं = रू. 90,000

(ख) वास्तविक किराया = रू. 86.000 सकल वार्षिक मूल्य (क) या (ख) में जो अधिक है रू. 90,000 

3. अन्य व्यय कटौती-योग्य नहीं हैं।

प्रश्न 14 – मिस्टर दिलीप एक बड़े मकान का स्वामी है जिसका निर्माण कार्य मई 2013 में पूरा हुआ था। मकान के क्षेत्रफल का 50% भाग रू. 3,200 मासिक किराये पर रहने के लिए दे दिया गया है। 2017-18 में यह भाग एक माह के लिए खाली पड़ा रहा। मकान के क्षेत्रफल का 25% भाग मकान के स्वामी द्वारा अपने पेशे के लिए प्रयोग हो रहा है तथा क्षेत्रफल का शेष 25% भाग उसके अपने निवास के लिए प्रयोग हो रहा है। मकान के सम्बन्ध में अन्य विवरण निम्न प्रकार है

(i) नगरपालिका मूल्यांकन = 75,000

(ii) मानक किराया = 90,000 

(iii) नगरपालिका कर चुकाया = 12,000

(iv) मरम्मत = 3,000

(v) मरम्मत हेतु लिए गए ऋण पर ब्याज = 28,000

कर – निर्धारण वर्ष 2018-19 के लिए मिस्टर दिलीप की शीर्षक मान-सम्पत्ति के अन्तर्गत कर-योग्य आय की गणना कीजिए।

Mr. Dilip owns a big house, the construction of which was completed in May 2013. 50% of the floor area is let out for residential purposes on a monthly rent of 3,200. However, this portion remained vacant for one month during 2017-18. 25% of the floor area is used by the owner for the purpose of his profession, while remaining 25% of the floor area is utilised for the purpose of his residence. Other particulars of the house are as follows:

(i) Municipal Valuation = 75,000 

(ii) Standard Rent = 90,000 

(iii) Municipal Taxes paid = 12,000 

(iv) Repairs = 3,000 

(v) Interest on Capital borrowed for repairs = 28,000 

Compute the taxable income under the head House Property of Mr. Dilip for the Assessment Year 2018-19.

हल (Solution) : 

Computation of Taxable income from House Property

(for the Assessment Year 2018-19)

Nil 7,000 (a) (-) 7,000

Annual Value of 1/4th portion being used for own profession (Note considered under this head) 

Annual value of 1/4th portion self-occupied for residence = Nill

Less : Interest (Rs. 28,000 x1 = 4) = 7,000(a) (-) 7,000

Gross Annual Value of 1/2 portion let out for 

residential purposes = 35,200

Less : 1/2 of Municipal taxes paid = 6,000

Annual Value = 29,200

Less : Deductions allowed : 

(i) 30% of A.V. = 8,760

(ii) 1/2 Int. on Loan taken for repairs = 14,000 / 22,760

(b) 6,440 Loss from House Property – (a – b) 560

नोट – किराये पर दिए गए आधे मकान के सकल वार्षिक मूल्य की गणना निम्न प्रकार की गई है-

(i) आधे मकान का नगरपालिका मूल्य रू. 37,500 

(ii) आधे मकान का मानक मूल्य रू. 45,000 

(क) आधे मकान का सम्भावित किराया (i) एवं (ii) में से जो भी कम हो = रू. 37,500 

(ख) आधे मकान का वास्तविक किराया 38,400 – 3,200 = रू. 35,200

वास्तविक किराया सम्भावित किराये से मकान खाली रहने के कारण कम है अत: सकल वार्षिक मूल्य रू. 35,2001

प्रश्न 15 – 31 मार्च, 2018 को समाप्त होने वाले वर्ष के लिए मिस्टर X का लाभ-हानि खाता निम्नलिखित है। उस वर्ष की उनकी व्यापार से कर-योग्य आय की गणना कीजिए-

प्रारम्भिक रहतिया रू. 15,000  विक्रय रू. 2,80,000 

क्रय रू. 1,40,000 अन्तिम रहतिया रू. 20,000

मजदूरी 20,000 = पिता से उपहार रू. 10,000

किराया रू. 46,000  = कार की बिक्री रू. 17,000 

कार की मरम्मत रू.13,000 = आयकर की वापसी रू. 3,000 

चिकित्सा व्यय रू.3,000 = सामान्य व्यय रू. 10,000 

कार का ह्रास रू.4,000 

वर्ष का लाभ रू. 89,000 3,30,000

निम्नलिखित अतिरिक्त सूचनाएँ दी गई हैं-

(i) मिस्टर X अपना व्यापार किराये के भवन में चला रहा है जिसका आधा भाग उसके रहने में प्रयोग हो रहा है। 

(ii) मिस्टर X ने वर्ष में कार रू. 20,000 की क्रय की। उसने कार के मूल्य पर 20% ह्रास लगाया। वर्ष में कार रू. 17,000 की बेच दी गई। कार का प्रयोग 3/4 – व्यापार के लिए था तथा 1/4 व्यक्तिगत कार्यों के लिए। 

(iii) चिकित्सा व्यय मिस्टर X की बीमारी के इलाज में लगे हैं। (11) मजदूराम रू. 250 प्रति माह मिस्टर के डाइवर का 10 माह का वेतन शामिल है।

The following is the Profit & Loss Account of Mr. X for the year ended on 31st March, 2018. Compute histaxable income from business for that year:

  रू.   रू.
Opening Stock 15,000 Sales 2,80,000
Purchases 1,40,000 Closing Stock 20,000
Wages 20,000 Gift from father 10,000
Rent 46,000 Sale of car 17,000
Repairs of car 3,000 Income tax Refund 3,000

Medical Expenses = 3,000 

General Expenses = 10,000 

Depreciation of car = 4,000 

Profit for the year = 89,000 

3,30,000 = 3,30,000 

Following further informations are given :

(i) Mr. X carries on his business from rented premises half of which is used as his residence.

(ii) Mr. X bought a car during the year for 20,000. He charged 20% depreciation on the value of car. The car was sold during the year for * 17,000. The use of the car was 3/4th for the business and 1/4th for personal purposes.

(iii) Medical expenses were incurred during sickness of Mr.X for his treatment.

(iv) Wages include Rs. 250 per month on account of Mr. X’s driver for 10 months. 

हल (Solution): 

Computation of Taxable Income from Business

(for the Assessment Year 2018-19)

Profit as per Profit & Loss A/C = 89,000

Add : Items Disallowed : रू.

(i) 1/4 Wages regarding driver’s

salary for personal use of car = 625 

(ii) 1/2 Rent regarding personal use of house = 23,000 

(iii) 1/4 Repairs of car regarding personal use = 750 

(iv) Medical Expenses (Not for Business) = 3,000 

(v) Depreciation as the car was sold 

during the year = 4,000 

28,375/1,20,375

Less: Items not taxable :

(i) Income tax Refund = 3,000

(ii) Gift from father = 10,000

(iii) Sale of Car (Capital Receipt) = 17,000

Taxable income from Business = 30,000 / 90,375

नोट – 1. पिता (रिश्तेदार) से उपहार पूर्णतया कर-मुक्त है।

2. मोटरकार पर हास स्वीकार नहीं होगा क्योंकि मोटरकार एक ही गत वर्ष में क्रय की गई तथा गई है। मोटरकार पर रू. 3.000 की अल्पकालीन पूँजी हानि है, जिसका 3/4 भाग व्यापार सम्बन्ध में है। अत: अल्पकालीन पूँजी हानि का 3/4 भाग अर्थात् रू. 2,250 आगे ले जाए जा और भविष्य में होने वाले पूँजी लाभ से इसकी पूर्ति कर ली जाएगी। पूँजी हानि अधिक-से-अधिक 8 वर्ष तक आगे ले जायी जा सकती है। 

प्रश्न 16 – निम्न सूचनाओं के आधार पर कर-योग्य पूँजी लाभ की गणना कीजिए 1.X ने मई 2001 में एक मकान सम्पत्ति रू. 7,82,000 में खरीदी।

2. उसके पुत्र Y को यह सम्पत्ति पिता की मृत्यु के पश्चात् 10 जनवरी, 2002 को उत्तराधिकार के रूप में प्राप्त हुई।

3. 10 जनवरी, 2002 को इस सम्पत्ति का उचित बाजार मूल्य रू. 8,00,000 था।

4. Y ने यह सम्पत्ति 20 जून, 2017 को रू. 30,00,000 में बेच दी। 

5. स्टाम्प ड्यूटी अधिकारी ने इस सम्पत्ति का मूल्य रू. 36,00,000 निर्धारित किया। इस मूल्य का क्रेता या विक्रेता ने कोई विरोध नहीं किया।

6. 15 नवम्बर, 2017 को Y ने रहने के लिए एक फ्लैट रू. 10,00,000 का क्रय किया तथा रू. 90,000 के NHAI के बॉण्ड्स खरीदे जिनका मोचन तीन वर्ष के पश्चात् किया जाएगा।

लागत स्फीति सूचकांक 2001-02 का 100 एवं 2017-18 का 272 है।

From the following informations determine the taxable capital gains:

1.Xpurchased a house property in May 2001 for Rs. 7,82,000.

2. His son Y acquired the property by inheritance on 10th Jan, 2002 after the death of his father.

3. Fair Market value of the property on 10th Jan., 2002 was Rs. 8,00,000.

4.Y sold the property on 20th June, 2017 for Rs. 30,00,000.

5. Stamp Valuation Authority valued the property  Rs. 36,00,000 which is not objected by the seller or the buyer of the house.

6. On 15th Nov., 2017 Y purchased a residential flat for 10,00,000 and invested Rs. 90,000 in bonds issued by the NHAI redeemable after three years.

The cost inflation index for 2001-02 was 100 and for 2017-18 was 272.

हल (Solution):

Computation of Taxable Capital Gains

(for the Assessment Year 2018-19)

Sale Consideration  = 36,00,000

Less : Indexed Cost (Rs. 7,82,000×272 + 100) = 21,27,040 

Capital Gains = 14,72,960

Less: Cost of the new house u/s 54 = 10,00,000 

NHAI Bonds u/s 54EC = 90,000 /10,90,000 

Taxable Capital Gains = 3,82,960 

Notes: 1. Fair market value of the house on the date of inheritance has no relevance. 

2. Sale consideration shall be the actual consideration (30,00,000) or value determined for stamp duty purposes

36,00,000); whichever is more.

प्रश्न 17 – मि. हनुमान ने वर्ष 2017-18 में सम्पत्तियों की बिक्री का निम्न विवरण दिया-

Mr. Hanuman submits the following particulars about sale of assets during the year 2017-18 :

  Jewellery Plot Gold
  रू. रू. रू.
Sale Price 7,00,00 18,24,000 5,00,000
Expenses on Sale Nill 24,000 Nill
Cost of Acquisition 2,75,000 6,00,000 3,00,000
Year of Acquisition 2008-09 2001-02 2014-15

उसने 1-3-2017 एक मकान 15 लाख रू. का खरीदा। कर-योग्य पूँजी लाभ की गणना कीजिए यदि 2001-02, 2008-09, 2014-15 तथा 2017-18 का लागत स्फीती सूचकांक क्रमश 100, 137, 240 तथा 272 है।

He has purchased a house for 15 lakh on 1-3-2017. Calculate the amount of taxable capital gain if CII for 2001-02, 2008-09, 2014-15 and 2017-18 are 100, 137, 240 and 272 respectively.

हल (Solution) : 

Computation of Taxable Capital Gains

(for the Assessment Year 2018-19)

Jewellery : Sale Price = 7,00,000

Less : Indexed cost (Rs.2,75,000 x 272 +137)

5,45,985 

(a) 1,54,015

प्रश्न 18 – एक निवासी व्यक्ति श्रीमती नीलम तिवारी 31 मार्च, 2018 को समाप्त होने वाले वर्ष के लिए अपनी अन्य साधनों से आय का निम्न विवरण प्रस्तुत करती है

1. उत्तर प्रदेश सरकार से रू. 42,000 की परिवार पेंशन। 

2. उसने एक पुस्तक लिखी है जिससे उसे प्रकाशक से रू. 17,000 की रॉयल्टी प्राप्त हुई। उसने रू. 3,000 पुस्तकों, स्टेशनरी, टाइपिंग आदि पर गत वर्ष में व्यय किए। 

3. उसे परीक्षाओं में निरीक्षक का काम करने के लिए रू. 1,000 पारिश्रमिक मिला। 

4. परीक्षा में परीक्षक के रूप में कार्य करने के लिए रू. 1,800 पारिश्रमिक मिला। उसने रू. 75 डाक आदि पर परीक्षा के सम्बन्ध में व्यय किए, जो विश्वविद्यालय ने उसे पूर्ति करके दे दिए। 

5. गत वर्ष में उसके बैंक के लॉकर में रू. 1,00,000 रोकड़ मिले जिसका स्रोत – वह नहीं बता सकी। 

6. इलाहाबाद बैंक में उसके बचत खाते में रू. 800 ब्याज के जमा हए।

कर-निर्धारण वर्ष 2018-19 के लिए उसकी अन्य साधनों से कर-योग्य आय की गणना कीजिए।

Smt. Neelam Tiwari, a resident individual, submits the following particulars of her income from other sources for the year ended 31st March, 2018:

1. Family pension from the Government of Uttar Pradesh रू. 42,000

2. She has written a book on which she gets of royalty of रू. 17,000 om the publisher. She has spent रू. 3,000 on books, stationery, typing etc., during the previous year.

3. She has received remuneration for doing invigilation in examination रू.1,000.

4. Remuneration for acting as an examiner रू. 1,800. She incurred 75 on postage etc. in connection with the examination work, which were reimbursed by the University.

5. Cash worth रू.1,00,000 was found in the previous year in her bank locker, the source of which could not be explained by her.

6. Interest credited to her Savings Bank Account in Allahabad Bank रू. 800.

Compute her taxable ‘Income from Other Sources’ for the A.Y. 2018-19. 

हल (Solution) : 

Computation of Income from Other Sources

(for the Assessment Year 2018-19)

बैंक ब्याज एवं लाभांश एकत्रित करने का 2% कमीशन लेता है। 

ब्याज की देय तिथि 1 जलाई तथा 1 जनवरी है। 

सभी प्रतिभूतियाँ भारत में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में खरीदी-बेची गई हैं।

From the following information compute income from other sources for the assessment year 2018-19 :

Bank charges 2% commission on collecting interest and dividend.

Interest is due on 1st July and 1st January.

All securities have been purchased/sold in a recognised stock exchange in India. 

हल (Solution) : 

Computation of Income from Other Sources

(for the Assessment Year 2018-19)

1. 8% Government Securities 50,000 (for full year) = 4, 000

2. 7.5% Tax-free Government Securities 40,000

(Interest not taxable) 

3. 10% Less-tax Securities 30,000 = 3,000

(for full year) 

4. 10% Port Trust Bonds 80,000 = 8,000

(for full year) 

5. 9% Debentures of a company रू. 60,000 = 2,700

(for 6 months) 

6. 12% Shares of an Indian Company 50,000

[Dividend exempt u/s 10(34)]

प्रश्न 20 – निम्न सूचनाओं के आधार पर अन्य साधनों से आय की गणना कीजिए-

1. करदाता को अपने पुत्र के विवाह पर अपने दोस्तों से रू. 1,00,000 मिले।

2. गत वर्ष में न्यायालय की डिक्री के अनुसार अतिरिक्त क्षतिपूर्ति पर रू. 40,000 ब्याज के प्राप्त हुए।

3. अप्रकटित आय रू. 2,00,0001 

4. लॉटरी से जीत रू. 70,000 (शुद्ध)। 

5. डाकखाने के बचत बैंक खाते पर ब्याज रू. 4,0001 

6. परिवार पेंशन रू. 60,000।

From the following information compute Income from Other Sources:

1. रू. 1,00,000 received by the assessee from his friends on the occasion of the marriage of his son.

2. Interest on enhanced compensation of रू. 40,000 received as per court decree during the previous year.

3. Undisclosed income रू. 2,00,000. 

4. Winning from lottery रू. 70,000 (Net). 

5. Interest on Post Office Savings Bank A/c रू. 4,000. 

6. Family pension रू. 60,000.

प्रश्न 21-एक निवासी व्यक्ति मिस्टर कुमावत गत वर्ष 2017-18 की अपनी आय का निम्न विवरण प्रस्तुत करता है

(i) एक भारतीय कम्पनी के ऋणपत्र पर ब्याज (सकल) प्राप्त – 19,400 

(ii) एक विदेशी कम्पनी से रू. 4,500 उद्गम स्थान पर कर काट

कर लाभांश (शुद्ध) प्राप्त किया। इस काटे हुए कर में से भारत सरकार को कोई राशि भुगतान नहीं की गयी – 19,500 

(iii) भारतीय कम्पनी के ऋणपत्र क्रय करने हेतु लिए गए

रू. 80,000 के अदत्त ऋण पर 15% प्रतिवर्ष की दर से ब्याज

भुगतान किया – 12,000

(iv) उपर्युक्त ब्याज संग्रह करने के लिए संग्रह व्यय भुगतान किया  – 350

(v) प्लाण्ट, मशीन तथा फर्नीचर के साथ भवन को किराये पर

उठाने से प्राप्त किराया – 50,000

(vi) उपर्युक्त सम्पत्तियों पर स्वीकृत हास – 15,000

(vii) अग्नि बीमा प्रीमियम चुकाया

भवन पर = 800 

500 मशीन तथा प्लाण्ट पर

फर्नीचर पर = 200

(viii) भवन की मरम्मत = 500 

(ix) घुड़दौड़ का इनाम (सकल) = 7,000 

सम्बन्धित कर-निर्धारण वर्ष के लिए अन्य साधनों से कर-योग्य आय की गणना कीजिए।

Mr. Kumawat, a resident individual, submits the following particulars of his income for the previous year 2017-18 :

(i) Interest (Gross) received from an Indian Company on debentures ___19,400 

(ii) Dividend (Net) received from a Foreign

Company after deduction of रू. 4,500 as tax at source. Nothing has been paid to the Indian Government out of the amount of tax deducted at source = रू.19,500 

(iii) Interest paid on Outstanding Loan of रू. 80,000

taken @ 15% p.a. to purchase the debentures of Indian Company = 12,000 

(iv) Collection charges paid to collect the above assets =  रू. 350 

(v) Rent from a building let out along with Plant, Machinery and Furniture = 50.000 

(vi) Depreciation allowable on the above interest = 15,000 

(vii) Fire Insurance Premium paid : 

On Building = 800 

On Plant and Machinery = 500 

On Furniture = 200 

(viii) Repairs of Building = 500

(ix) Winning from Horse Race (Gross) = 7,000

प्रश्न 22 – डॉ० बिजली अर्थशास्त्र के अवकाश प्राप्त प्रोफेसर हैं और भारत में निवासी हैं। कर-निर्धारण वर्ष 2018-19 के लिए ‘अन्य साधनों से आय’ शीर्षक की कर-योग्य आय की गणना करने के लिए वह अपनी निम्न आयें आपके समक्ष प्रस्तुत करता है

1. वह स्कूलों के लिए एक पाठ्य-पुस्तक का लेखक है जिससे उसे रू. 45,000 की सकल रॉयल्टी एकमुश्त मिलती है जो Copyright के हस्तान्तरण के प्रतिफल में है। इस राशि में वह निम्न कटौतियों की माँग करता है

(अ) एक क्लर्क का वेतन जो उसके लिए सूचनाएँ व तथ्य एकत्रित करता है तथा अन्तिम प्रूफ भी पढ़ता है रू. 24,000।

(ब) पुस्तक के संशोधन के सम्बन्ध में रू. 400 की पुस्तकें क्रय की।

(स) रू. 800 का टेलीफोन व्यय जो पुस्तक के प्रकाशन तथा विक्रय के सम्बन्ध में तथा पुस्तक का नया संस्करण छपने के सम्बन्ध में हुआ था। 

2. लेखों से आय से Economic Times तथा Eastern Economist प्रकाशित हुए थे रू. 3,0001

3. वह एक किराये के मकान में रहता है जिसका वह रू. 3,000 मासिक किराया देता है। उसके परिवार के लिए मकान बहुत बड़ा है। अत: उसने मकान का एक-तिहाई भाग पन: रू. 1,500 प्रति माह किराये पर उठा दिया है। डॉ. बिजली ने पूरे मकान का नगरपालिका कर रू. 1,500 चुकाने का दायित्व तथा चालू मरम्मत का दायित्व जो 16.000 हुआ, अपने ऊपर लिया हआ है।

4. डॉ० बिजली ने क्रिश्चियन इन्स्टीट्यूट में व्याख्यान देने का रू. 250 प्रति व्याख्यान प्राप्त किया। गत वर्ष में उसने 24 व्याख्यान दिए।

5. वह काई विश्वविद्यालयों में परीक्षक है। इस मद से उसे रू. 7,000 का पारिश्रमिक प्राप्त हुआ।

6. उसकी अन्य आयें निम्न हैं

(i) ताश के खेलों तथा शर्त से जीत रू. 6,500, 

(ii) शतरंज के खेल से जीत रू. 1,000, 

(iii) इंग्लैण्ड की सरकार के बॉण्ड्स पर रू. 500 प्राप्त हुआ।

7. एक जनता के सारवान हित वाली कम्पनी से रू. 2,000 का लाभांश Account Payee Cheque द्वारा प्राप्त किया।

Dr. Bijli is a retired Professor of Economics and is a resident in India. He submits before you the following incomes for computing his income under the head ‘Income from Other Sources for the assessment year 2018-19 :

1. He is the author of a text-book for schools which fetched him a gross royalty of रू. 45,000 in lump-sum and which is in consideration of the transfer of copyright. He claims the following deductions from the amount:

(a) Salary to a clerk who collects for him necessary data and goes through the final proof-reading रू. 24,000.

(b) Purchased books worth रू. 400 in connection with the revision of the book.

(c) Telephone expenses of 800 attributed to the publication and sale of his book and other matters in connection with the printing of the new edition of the book.

2. Income from articles which were published in ‘Economic Times’ and ‘Eastern Economist’ रू. 3,000.

3. He lives in a rented house paying rent @ रू. 3,000 p.m. The house is too big for his family. Hence he has sub-let one-third portion of the house on a rent of रू.1,500 p.m. Dr. Bijli has undertaken the liability of paying municipal taxes of रू. 1,500 on the whole house and also the current repairs of the whole house amounting to रू. 6,000.

4. Dr. Bijli received रू. 250 per lecture delivered at Christian Institute. During the previous year he delivered 24 lectures.

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