B.Com 3rd Year Cost Audit Study Material Notes

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लागत अंकेक्षण का अर्थ एवं परिभाषा

(Meaning and Definition of Cost Audit) 

सरल शब्दों में, लागत अंकेक्षण का आशय लागत लेखों की सत्यता की जाँच करके यह पता लगाना है कि लागत का निर्धारण सही किया गया है या नहीं। विस्तृत अर्थ में, लागत अंकेक्षण के अन्तर्गत लागत लेखों के साथ-साथ लागत विवरण-पत्रों (Cost Statements), लागत रिपोर्ट (Cook Reports), लागत समंकों (Cost Data) एवं लागत प्रविधियों (Cost Techniques) की भी जाँच की जाती है। लागत अंकेक्षण से सम्बन्धित मुख्य परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं – इन्स्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एण्ड वर्क्स एकाउण्टेण्ट्स ऑफ इण्डिया के अनुसार, “लागत अंकेक्षण को लागत लेखों की शुद्धता के सत्यापन तथा लागत लेखांकन के सिद्धान्त, योजनाओं एवं प्रक्रियाओं के अनुसरण के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।” स्मिथ एवं डे के अनुसार, “लागत अंकेक्षण’ का आशय लागत निर्धारण पद्धति, तकनीक एवं लेखों की विस्तृत जाँच है जिससे उनकी शुद्धता को सत्यापित किया जा सके एवं लागत लेखांकन के उद्देश्यों की पूर्ति को सुनिश्चित किया जा सके।” इन्स्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एवं वर्क्स एकाउण्टेण्ट्स ऑफ लन्दन के अनुसार, “लागत अंकेक्षण लागत लेखों के सही होने एवं लागत लेखा योजना के अनुसरण का सत्यापन है।” निष्कर्ष – उपर्युक्त परिभाषाओं के विवेचन से स्पष्ट है कि लागत अंकेक्षण के अन्तर्गत न केवल लागत लेखों की शुद्धता का सत्यापन किया जाता है वरन् यह भी पता लगाया जाता है कि लागत लेखों को लागत लेखा योजना के अनुसार ही रखा गया है या नहीं अर्थात् लागत लेखों को लागत लेखांकन के सिद्धान्तों, नियमों एवं ICWAI द्वारा निर्गमित लागत लेखांकन प्रमापों (Cost Accounting Standards) के अनुसार रखा गया है या नहीं।

लागत अंकेक्षण के उद्देश्य

(Objects of Cost Audit) 

लागत अंकेक्षण के उद्देश्यों को निम्नलिखित दो दृष्टिकोणों से व्यक्त किया जा सकता है-1. संस्था के दृष्टिकोण से तथा 2. सरकार के दृष्टिकोण से।

  1. संस्था के दृष्टिकोण से लागत अंकेक्षण के उद्देश्य – संस्था के दृष्टिकोण से लागत अंकेक्षण के निम्नलिखित उद्देश्य हैं

(i) लागत लेखों की गणितीय शुद्धता को जाँचना, (ii) लागत लेखों को तैयार करने में सरकारी अधिनियमों एवं आदेशों के अनुपालन से सम्बन्धित जानकारी प्राप्त करना, (iii) सम्बन्धित संस्था में लागत लेखे लागत लेखांकन के सिद्धान्तों एवं प्रमापों के अनुसार रख जा रहे हैं या नहीं, (iv) लागत लेखांकन पद्धति प्रबन्धकों को पर्याप्त सूचनाएँ दे रही है या नहीं,  (v) लागत लेखों में किये गये छल-कपट एवं गबन की जानकारी प्राप्त करना। 

  1. सरकार के दृष्टिकोण से लागत अंकेक्षण के उद्देश्य

(i) क्या लागत लेखे सही हैं तथा इनके सन्दर्भ में उद्योग अपनी वस्तु का उचित वि वसूल कर रहा है? (ii) क्या उद्योग को संरक्षण देने की आवश्यकता है?  (iii) क्या उद्योग जनहित के विरुद्ध है तथा उपभोक्ता-वर्ग को क्षति पहुँच रही है?  (iv) क्या उद्योग के विस्तार के लिए विशेष सहायता की आवश्यकता है?  (v) उपक्रम का प्रबन्ध कैसा है?  (vi) क्या उद्योग को बन्द करना हितकर होगा?  (vii) ग्राहकों के हितों के अनुरूप विक्रय मूल्य तय करना,  (viii) क्या उद्योग ने सरकारी आदेशों का समुचित पालन किया है?

लागत अंकेक्षण के लाभ

(Advantages of Cost Audit) 

लागत अंकेक्षण द्वारा लागत लेखों की सत्यता एवं औचित्यता का ज्ञान होता है जिसके फलस्वरूप व्यक्तियों को लाभ पहुंचता है। संक्षेप में, लागत अंकेक्षण के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं –

  1. संस्था को लाभ (Advantages to the Institution)—लागत अंकेक्षण से संस्था को निम्नलिखित लाभ होते हैं

उत्पादन क्षमता एवं कुशलता में वृद्धि (Increase in Production Capacity and Friency) लागत अंकेक्षण के द्वारा यह ज्ञात किया जा सकता है कि उत्पादन में अकुशलताएँ कहाँ तक है तथा कितनी मात्रा में हैं। इस प्रकार लागत अंकेक्षण से संस्था की उत्पादन क्षमता एवं कुशलता में वृद्धि सम्भव हो जाती है। (ii) उत्पादन लागत घटाने में सहायता (Help in Reducing Cost of Production) लागत अंकेक्षण से श्रम, सामग्री, उपरिव्यय, आदि पर पर्याप्त नियन्त्रण रखकर उनके दुरूपयोग को रोका जा सकता है अर्थात् लागत अंकेक्षण उत्पादन लागत को घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करता है। __ (iii) अनुत्पादक विभागों पर नियन्त्रण (Control Over Unproductive Departments)लागत अंकेक्षण से अनुत्पादक विभाग की जानकारी हो जाती है। परिणामस्वरूप उस विभाग की कमियों को दूर करके उसे उत्पादक विभाग के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है।

  1. उपभोक्ताओं को लाभ (Advantages to Consumers) लागत अंकेक्षण के कारण उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर वस्तुएँ उपलब्ध होती हैं, परिणामस्वरूप उपभोक्ताओं के रहन-सहन का स्तर ऊँचा हो जाता है।
  2. श्रमिकों को लाभ (Advantages to Workers)-अंकेक्षित लागत लेखों से श्रमिकों को यह विश्वास हो जाता है कि लागत लेखे सत्य हैं। उन्हें यह भी जानकारी हो जाती है कि उन्हें जो पारिश्रमिक दिया जा रहा है वह ठीक है या नहीं अर्थात् श्रमिकों को अपनी माँग प्रस्तुत करने के लिए उचित आधार मिल जाता है।
  3. विनियोक्ताओं को लाभ (Advantages to Investors)-लागत अंकेक्षण के माध्यम से संस्था की भविष्य में लाभ की प्रवृत्ति का ज्ञान हो जाता है। इससे विनियोक्ताओं को विनियोग करने या न करने का निर्णय लेने में सरलता रहती है।
  4. वित्तीय अंकेक्षक को लाभ (Advantages to Financial Auditor)—वित्तीय अंकेक्षक को एसा बहुत-सी मदों की जाँच करनी होती है जिनका सम्बन्ध लागत लेखों से है, जैसे-स्कन्ध का मूल्याकन, श्रम लागत, ह्रास आदि। लागत अंकेक्षण में इन मदों की विस्तृत जाँच हो जाती है, अत: वित्तीय अंकेक्षक को इन मदों की जाँच करने की आवश्यकता नहीं होती। इस प्रकार उसके समय की बचत होती है।
  5. सरकार को लाभ (Advantages to Government) लागत अंकेक्षण से सरकार को यह स्वास हा जाता है कि प्रदर्शित लागतें सही हैं तथा इनके सन्दर्भ में उचित विक्रय मूल्य निर्धारित किया हा श्रमिकों तथा उपभोक्ताओं का शोषण नहीं किया जा रहा है तथा सरकार को पूरा कर (tax) प्राप्त हो रहा है।

कम्पनी अधिनियम, 2013 के अन्तर्गत लागत अंकेक्षण से

सम्बन्धित महत्वपूर्ण प्रावधान 

(Important Provisions Related to Cost Audit Under

Companies Act, 2013)

कम्पनी अधिनियम, 2013 के अन्तर्गत लागत अंकेक्षण से सम्बन्धित महत्वपूर्ण प्रावधान निम्नलिखित हैं – 1. वैधानिक लागत अंकेक्षण का प्रावधान – भारत में वैधानिक लागत अंकेक्षण सर्वप्रथम सन् कम्पनी अधिनियम, 1956 में संशोधन करके धारा 233(B) को सम्मिलित करके लागू किया ‘तमान में कम्पनी अधिनियम, 2013 की धारा 148 के अन्तर्गत केन्द्रीय सरकार द्वारा आदेश जारी करके किन्हीं विशिष्ट संस्थाओं/उद्योगों के लिए लागत लेखे रखने एवं उनका लागत अंकेक्षण नवाय किया जा सकता है। धारा 148 के अन्तर्गत किये जाने वाला लागत अंकेक्षण, धारा 143 के अन्तर्गत किये जाने वाले अंकेक्षण के अतिरिक्त सम्पन्न कराया जाता है अर्थात् धारा 143 के तगत कराये जाने वाला अंकेक्षण तो कराना ही होता है।

  1. लागत अंकेक्षण से सम्बन्धित उद्योगों का चार क्षेत्रों में विभाजन-कम्पनीज (लागत अभिलेख एवं नियम), 2014 के अनुसार लागत अंकेक्षण से सम्बन्धित उद्योगों को निम्नलिखित चार क्षेत्रों में विभाजित किया गया है-

(अ) सामरिक क्षेत्र (Strategic Sectors) इस क्षेत्र में सुरक्षा, अणु शक्ति आदि में प्रयुक्त मशीनों एवं मशीनीकृत उपकरणों से सम्बन्धित 6 उद्योग समूहों को सम्मिलित किया गया है, इस क्षेत्र की कम्पनियों में लागत अंकेक्षण तभी अनिवार्य होगा जबकि कम्पनी का शुद्ध मूल्य या विक्रय 500 करोड़ र या अधिक हो। (ब) क्षेत्रीय नियामक द्वारा नियमित उद्योग (Industry Regulated by Sectoral Regulator)—इस क्षेत्र में बन्दरगाह, वायु-परिवहन सेवाएं, दूर-संचार सेवाएं, विद्युत, सड़क, स्टील एवं अवसंरचना आदि से सम्बन्धित 11 उद्योग समूहों को सम्मिलित किया गया है। (स) सार्वजनिक हित के क्षेत्र में कार्यरत कम्पनियां (Companies Operating in Areas Involving Public Interest) इस क्षेत्र में रेलवे, खनिज उत्पाद, रसायन, जूट उत्पाद, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं आदि में संलग्न 11 उद्योग समूहों को शामिल किया गया है। (द) चिकित्सा साधनों (Medical) में संलग्न कम्पनियां-इस क्षेत्र में 20 महत्वपूर्ण चिकित्सा साधनों/सामानों की सूची शामिल की गई है। यहाँ पर यह उल्लेखनीय है कि उपरोक्त वर्णित प्रत्येक क्षेत्र में उत्पादन या विक्रय की राशि की न्यूनतम सीमा निर्धारित की गयी है, जिससे अधिक उत्पादन या विक्रय की राशि होने पर अनिवार्य रूप से लागत अंकेक्षण कराना होगा। _ 

  1. लागत लेखांकन अभिलेख नियम (Cost Accounting Records Rules)—कम्पनी (लागत अभिलेख और अंकेक्षण) नियम, 2014 [Companies (Cost Records and Audit) Rules, 2014] लागू करने की अधिसूचना भारत के राजपत्र (The Gazette of India) दिनांक 1 जुलाई, 2014 में प्रकाशित कर दी गई है तथा इन नियमों को तुरन्त प्रभाव से लागू कर दिया गया है। वस्तुत: ये नियम सम्बन्धित कम्पनियों को अपने लागत अभिलेखों को रखने के सम्बन्ध में दिशा-निर्देश प्रदान करते हैं। उद्योगों की प्रकृति के अनुसार विभिन्न उद्योगों में ये नियम अलग-अलग हो सकते हैं। 
  2. भारत में लागत लेखांकन के उद्गम एवं विकास का इतिहास सन् 1944 से प्रारम्भ होता है जब गारण्टी द्वारा सीमित कम्पनी के रूप में ‘इण्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एण्ड वर्क्स एकाउण्टैण्ट्स’ की स्थापना की गई। यह कम्पनी परीक्षाएँ लेती थी एवं सफल विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र जारी करती थी। इसका मुख्य लक्ष्य लागत लेखांकन के बारे में प्रशिक्षण प्रदान करना था।

1947 में भारत स्वतन्त्र हुआ। परिणामस्वरूप नयी औद्योगिक नीति तैयार की गयी एवं विभिन्न क्षेत्रों में नयी-नयी औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित होने लगी। धीरे-धीरे लागत लेखापालों की आवश्यकता अनुभव की जाने लगी। इसीलिए सन् 1959 में भारत में कॉस्ट एण्ड वर्क्स एकाउण्टैण्ट्स अधिनियम (Cost and Works Accountants Act) पारित किया गया एवं इस अधिनियम के अन्तर्गत ‘दी इन्स्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एण्ड वर्क्स एकाउण्टैण्ट्स ऑफ इण्डिया’ ICWAI (The Institute of Cost and Works Accountants of India) की एक स्वायत्त संस्था के रूप में स्थापना की गई। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य भारत में योग्य लागत लेखापालों को उत्पन्न करना है। इस संस्था का प्रधान कार्यालय कलकत्ता में स्थित है। वर्ष 2013 में इस संस्थान का नाम बदलकर इन्स्टीट्यूट ऑफ कास्ट एकाउण्टेण्ट्स ऑफ इण्डिया (ICAI) कर दिया गया है एवं इसके सदस्य अब कॉस्ट मैनेजमेन्ट एकाउण्टेण्ट्स (CMA) कहलाते हैं। (4) लागत अंकेक्षक की नियुक्ति – लागत अंकेक्षक की नियुक्ति कम्पनी के संचालक मण्डल दारा धारा 148(3) के प्रावधानों के अन्तर्गत की जाती है। उसका पारिश्रमिक भी संचालक मण्डल द्वारा निर्धारित किया जाता है। लागत अंकेक्षक के सम्बन्ध में वही अधिकार एवं कर्तव्य हैं जो वैधानिक अंकेक्षक को कम्पनी अधिनियम के अन्तर्गत प्रदान किए गए हैं। [धारा 148(3)] लागत अंकेक्षक की नियुक्ति के नियम ‘लागत अंकेक्षण (रिपोर्ट)’ नियम, 2014 के अन्तर्गत दिन गये हैं। लागत अंकेक्षक के रूप में लागत लेखाकारों की एक फर्म को भी नियुक्त किया जा सकता है, यदि उस फर्म के समस्त लागत लेखाकार इस कार्य को पेशे के रूप में अपना रहे हैं और उस फर्म की संरचना कॉस्ट एण्ड वर्क्स एकाउण्टेण्ट्स आधानयम, 1959 के नियम के अन्तर्गत केन्द्र सरकार की पूर्व अनुमति से की गई है। इस दशा में लागत अंकेक्षक की रिपोर्ट किसी भी साझेदार द्वारा फर्म की ओर से दी जा सकती है। एक लागत अंकेक्षक अधिकतम 20 कम्पनियों का लागत अंकेक्षण कर सकता है। यदि लकों की फर्म है तो प्रत्येक साझेदार के लिए अधिकतम 20 कम्पनियाँ निर्धारित की गई हैं। 

  1. लागत अंकेक्षक की योग्यताएं – लागत अंकेक्षण का कार्य ऐसे व्यक्तियों द्वारा कराना चाहिये “एण्ड वर्क्स एकाउण्टेण्ट अधिनियम, 1959 के दायरे के अन्तर्गत इन्स्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एण्ड काउण्टेण्टस ऑफ इण्डिया (I.C.W.A.I.) का सदस्य अर्थात् लागत लेखापाल हो।
  2. लागत अंकेक्षक की अयोग्यताएं – लागत अंकेक्षक की नियुक्ति के सम्बन्ध में कुछ प्रमुख अयोग्यताएं निम्नलिखित हैं :

(i) कोई भी व्यक्ति जो कम्पनी का कर्मचारी है लागत अंकेक्षक नियुक्त नहीं किया जा सकता है। (ii) कोई भी व्यक्ति जो कम्पनी का वित्तीय अंकेक्षक नियुक्त किया गया है उसे लागत अंकेक्षक नहीं बनाया जा सकता। (iii) एक कम्पनी लागत अंकेक्षक के रूप में नियुक्त नहीं की जा सकती। (7) अंकेक्षक के अधिकार एवं कर्तव्य – लागत अंकेक्षक के वही अधिकार एवं कर्तव्य हैं, जो कम्पनी के एक अंकेक्षक को धारा 143(1) में प्राप्त हैं। लागत अंकेक्षक को अपनी रिपोर्ट निर्धारित समय एवं निर्धारित प्रारूप में कम्पनी के संचालक मण्डल को देनी होती है। .. (8) सुविधा तथा सहायता – कम्पनी का यह कर्तव्य है कि वह लागत अंकेक्षक को वे सभी सुविधाएं एवं सहयोग प्रदान करे, जो वह लागत अंकेक्षण के सम्बन्ध में चाहता है। [धारा 148(5)] (9) सूचना तथा स्पष्टीकरण – कम्पनी के लिये यह आवश्यक है कि वह लागत अंकेक्षक से रिपोर्ट प्राप्त होने के तीस दिन के अन्दर सभी मर्यादाओं (Qualifications) के सम्बन्ध में केन्द्रीय सरकार को स्पष्टीकरण दे। [धारा 148(6)] (10) केन्द्रीय सरकार द्वारा कार्यवाही – केन्द्रीय सरकार कम्पनी से प्राप्त स्पष्टीकरण के आधार पर कम्पनी से सम्बन्धित कोई भी निर्णय ले सकती है, जैसे वह यह आदेश दे सकती है कि लागत लेखों के अंकेक्षण की रिपोर्ट कम्पनी के सदस्यों की वार्षिक साधारण सभा की रिपोर्ट के साथ प्रेषित करे। [धारा 148(7)] __ (11) कम्पनी द्वारा धारा 148 के प्रावधानों का उल्लंघन किये जाने पर दण्डनीय प्रावधान (Penal Provision in Case of Contravention of Section 148 Provisions by the Company) [धारा 148(8)–यदि कम्पनी उपरोक्त वर्णित धारा 148 के विभिन्न प्रावधानों के पालन करने में किसी प्रकार का उल्लंघन करती है तो उस पर 25,000 रू. से लेकर 5,00,000 रू.तक का आर्थिक दण्ड लगाया जा सकता है एवं कम्पनी के प्रत्येक अपराधी अफसर को भी एक वर्ष तक के कारावास की सजा अथवा 10,000 रू. से 1,00,000 रू. तक का जुर्माना अथवा दोनों दण्ड दिये जा सकते हैं। लागत/परिव्यय अंकेक्षण प्रतिवेदन/रिपोर्ट (Cost Audit Report)  जब सभी लागत लेखांकन अभिलेखों की लागत अंकेक्षण रिपोर्ट नियम, 2014 के अन्तर्गत समीक्षा तथा सत्यापन का कार्य पूरा हो जाता है, तो लागत अंकेक्षक अपनी लागत अंकेक्षण रिपोर्ट तैयार करता है। कम्पनी अधिनियम, 2013 के अन्तर्गत लागत अंकेक्षण रिपोर्ट सम्बन्धित कम्पनी के पालक मण्डल को प्रस्तत की जाती है। लागत अंकेक्षण रिपोर्ट एक निश्चित प्रारूप में एवं एक निश्चित अवधि में देनी होती है। लागत अंकेक्षण रिपोर्ट नियम, 2014 (Cost Audit Report Rule : 2014) के महत्वपूर्ण बिन्दु निम्नलिखित-

  1. जिन कम्पनियों पर यह नियम लागू होता है, उन कम्पनियों को वित्तीय वर्ष प्रारम्भ होने के 180 क अन्दर लागत अंकेक्षक की नियुक्ति करनी होगी। 2. नियुक्त किये गये लागत अंकेक्षक को कम्पनी द्वारा उसकी नियुक्ति की सूचना प्रेषित की व एसी नियुक्ति की सूचना को निर्धारित अवधि एवं निर्धारित प्रारूप में केन्द्रीय सरकार को भी प्रषित किया जाता है।
  2. नियुक्त किये गये लागत अंकेक्षक वित्तीय वर्ष की समाप्ति से 180 दिन तक अथवा पाल वित्तीय वर्ष की लागत अंकेक्षण रिपोर्ट जमा करने तक लागत अंकेक्षक के रूप में कार्यरत रहेगा।

 

  1. लागत अंकेक्षक को अपनी लागत अंकेक्षण रिपोर्ट अपनी मर्यादाओं/अवलोकनों/सुझावों के सा (यदि कोई हो तो) फार्म CRA-3 के प्रारूप में प्रस्तुत करनी होती है।
  2. प्रत्येक लागत अंकेक्षक को अपनी लागत अंकेक्षण रिपोर्ट वित्तीय वर्ष समाप्त होने के 180 दिन के अन्दर अनिवार्य रूप से कम्पनी के संचालक मण्डल को प्रस्तुत करनी होती है।
  3. कम्पनी लागत अंकेक्षण रिपोर्ट की प्रति प्राप्त हो जाने के पश्चात् उसमें वर्णित मर्यादाओं के सम्बन्ध में उक्त रिपोर्ट के प्राप्त होने के 30 दिन के अन्दर समस्त सूचना एवं स्पष्टीकरण केन्द्रीय सरकार को भेजेगी।

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