Enterprise Content Management & Extranet B.Com 3rd Year Year Hindi Notes

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एंटरप्राइज कन्टेन्ट प्रबंधन (ECM) 

इंटरप्राइज कंटेंट मैनेजमेंट (ईसीएम) परिभाषित प्रक्रियाओं, रणनीतियों और उपकरणों का एक सेट हैं जो किसी व्यवसाय को अपने कर्मचारियों, व्यावसायिक हितधारकों और ग्राहकों को महत्वपूर्ण जानकारी को प्रभावी ढंग से प्राप्त करने, व्यवस्थित करने, संग्रहीत करने और वितरित करने की सुविधा ही ईसीएम सिस्टम एक केंद्रीकृत रिपोजिटरी में कंपनी की जानकारी को डिजिटल रूप से प्रबंधित करने और व्यावसायिक प्रक्रियाओं को सम्पन्न करने और लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए डिजिटल सामग्रा उपयोग करने पर ध्यान केंद्रित करता है। एंटरप्राइज कन्टेन्ट मैनेजमेंट किसी एकल तकनीक या प्रक्रिया को व्यक्त नहीं करता। बल्कि यह न (Umbrella) शब्द है जिसका उपयोग विधियों, यन्त्रों और रणनीतियों के संयोजन का वर्णन करने के लिए किया जाता है जो कैप्चरिंग और प्रबंधन के साथ-साथ संपूर्ण जीवनचक्र में सूचना के वारण संरक्षण और वितरण का उपयोग करते हैं। ईसीएम सिस्टम दस्तावेज प्रबंधन और प्रक्रिया वर्कफ्लो के स्वचालन के साथ सूचना के जीवनचक्र को सुव्यवस्थित करने में मदद करता है ऑपरेशनल अक्षमताओं को खत्म करने, लागत को कम करने और नियामक अनुपालन जनादेश का पालन करने के लिए ईसीएम योजना बड़ी मात्रा में कन्टेन्ट वाले किसी भी संगठन के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

ईसीएम के घटक

(Components of ECM) 

ईसीएम को पांच प्रमुख घटकों में विभाजित किया जा सकता है: कैप्चर, प्रबंधन, स्टोर, संरक्षित और वितरित करना। एसोसिऐशन फार इन्फोरमेशन एण्ड इमेज मैनेजमेंट द्वारा परिभाषित प्रत्येक घटक का उद्देश्य निम्नानुसार है: कैप्चर घटक (Capture Component) में इलेक्ट्रॉनिक स्वरूपों में कागजी दस्तावेजों को परिवर्तित करके, एक सह-संरचना में इलेक्ट्रॉनिक फाइलों को प्राप्त करना और एकत्र करना, और सूचनाओं को व्यवस्थित करना शामिल है। सूचना में चालान, अनुबंध और अनुसंधान रिपोर्ट जैसी सामग्री शामिल हो सकती हैं। प्रबंधन घटक (Management Component) सहयोगी सॉफ्टवेयर, वेब सामग्री प्रबंधन और रिकॉर्ड प्रबंधन जैसे माध्यमों से सूचनाओं को जोड़ता, संशोधित और नियोजित करता है। स्टोर घटक (Store Component) अल्प अवधि में सूचनाओं में होने वाले परिवर्तनों को अस्थायी रूप से उपयोगकर्ताओं को देखने या संपादित करने की अनुमति देने के लिए लचीला फोल्डर संरचनाओं के भीतर प्रदान करता है। संरक्षित घटक (Preserve Component) मध्यम और दीर्घकालिक रूप से बार-बार न बदलने वाला सूचनाओं को बैक-अप करता है और आमतौर पर रिकॉर्ड प्रबंधन सुविधाओं के माध्यम से पूरा किया जाता है। इसका उपयोग आमतौर पर संगठनों को सरकार और अन्य नियमों के अनुपालन में मदद करने के लिए किया जाता है। डिलीवर घटक (Deliver Component) ग्राहकों और अंतिम उपयोगकर्ताओं को उनके द्वारा मांगी गई जानकारी प्रदान करता है।

ECM कैसे काम करता है

(How ECM Works)? 

एटरप्राइज कंटेंट मैनेजमेंट सम्पूर्ण चक्र जीवन क दारान महत्वपूर्ण संगठनात्मक प्रक्रिया की जानकारी को दकटा करने प्रबंधन स्टोर, संरक्षित और वितरित करने के लिए उपयोग की जाने वाली रणनीतियों विधियों और उपकरणों के संग्रह को व्यक्त करता है।  डिजिटल सामग्री का विशिष्ट जीवनचक्र निम्नांकित चरणों का अनुसरण करता है: 
  • जानकारी प्राप्त (Capture) की गई है।
  • कन्टेन्ट कंपनी की वेबसाइट या इंट्रानेट पर प्रकाशित की जाती है।
    • .कन्टेन्ट संग्रहीत और सुरक्षित रूप में सेव हैं जिससे यह कभी भी खो नही सकते।
    • . प्रासंगिक जानकारी के लिए अधिक संग्रहण स्थान बनाने के लिए पूरानी और अप्रयुक्त सामग्री को हटा दिया जाता है।
    एक ईसीएम प्रणाली को लागू करते समय, पहला कदम उस सभी प्रकार की सामग्री दस्तावेजीकरण (documentation) करना है, जिसमें सगठन व्यवहार करता है व्यता करता है और सामग्री को संभालता है। डुप्लिकेट कन्टेन्ट की पहचान करने के का उपयोग किया जा सकता है, जिससे संगठन को सैकड़ों के बजाय किसी किस प्रतियां रखने की सुविधा मिलती है। इस तरह की जानकारी को फोल्डर में संग्रहीत दस्तावेज साथ एक केंद्रीय स्थान पर रखा जाएगा, यह सुनिश्चित करते हुए कि सामग्री सही या के लिए उपलब्ध है। स्वीकृत उपयोगकर्ता पूर्ण टैक्सट सर्च (Text Search) का उपयोग करके विशिष्ट दस्ता कर सकते हैं। ईसीएम प्रणाली दस्तावेज को प्राप्त करके उपयोगकर्ता को प्रस्तुत करेगी । को पढ़, संपादित या प्रिंट कर सकते हैं। ईसीएम सिस्टम उपयोगकर्ताओं को संग्रहीत दस्तावेजों वाक्यांशों के विशिष्ट शब्दों को देखने की सुविधा देगा। उपयोगकर्ताओं के पास ईसीएम लागू करने का एक ही लक्ष्य होगा: 
    • कागज पर निर्भरता को खत्म करना 
    • सभी व्यावसायिक प्रक्रियाओं को सफल बनाना 
    • संगठनात्मक जोखिम को कम करना। .
    • उत्पादकता को अधिकतम करना
    • ग्राहक सेवा में सुधार।
    एक प्रभावी एंटरप्राइज कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम संगठन में प्रत्येक को उन सभी सूचनाओं मे आसान पहुँच प्रदान करेगा, जिनकी उन्हें व्यावसायिक निर्णय लेने, पूर्ण परियोजनाएँ बनाने, सहयोग करने और अधिकतम दक्षता के साथ प्रदर्शन करने की आवश्यकता है।

    ईसीएम के लाभ

    (Benefits of ECM) 

    एक प्रभावी ईसीएम का प्रयोग व्यापारिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित कर सकता है, भंडारण को कम करने के साथ-साथ कागज और मेलिंग की जरूरतों को कम करके, सुरक्षा को अधिकतम कर सकता है, अखंडता बनाए रख सकता है और ओवरहेड को कम कर सकता है। इन सभी से उत्पादकता बढ़ सकती है। ईसीएम प्रणाली द्वारा प्रदान किए गए अन्य लाभों में शामिल हैं: 
    • प्रभावी ज्ञान प्रबंधन (KM) संस्था द्वारा ईसीएम प्रणाली में रखे गए कुल ज्ञान और कन्टन्ट । बनाने, साझा करने और अधिकतम करने की क्षमता प्रदान करता है। 
    • ईसीएम प्रणाली द्वारा प्रदान किए गए डेटा सर्च और एनालिटिक्स टूल के द्वारा डेटा माइनिंग में सुधार किया जाता है। सर्च श्रेणियां और पैरामीटर भी सेट किए जा सकत है। उपयोगकर्ता अपने सर्च परिणामों को कम कर सकते हैं और उन्हें अपनी आवश्यक अनुसार अधिक कुशलता से खोज सकते हैं। 
    • ECM सिस्टम सूचनाओं की संरचना SSOT के साथ संगठनों को प्रदान कर सकता यह एक सुरक्षित डिजिटल सामग्री भंडार में केवल एक बार संग्रहीत हो। यह जोखिम को कम करता है और यह सुनश्चित करता है कि पूरे उद्यम के पास एकल, अनुमोदित और आधिकारिक अंश तक पहुंच हो। 
    • ईसीएम सिस्टम पहले की मैनुअल प्रक्रियाओं को स्वचालित करके, अनुपालन करके भंडारण की जरूरतों को कम करके और डाक आवश्यकताओं को कम में लागत को कम करता है।

    वेब कन्टेन्ट प्रबंधन

    (Web Content Management) 

    कन्टेन्ट प्रबंधन का एक उपखंड वेब कन्टेन्ट प्रबंधन या WCM है। वेब पेज की सामग्र सभी सामग्री की तरह प्रबंधित किया जाना चाहिए। वेब कन्टेन्ट प्रबंधन WCM का उपयोग वेब पेजों
  • पर कन्टेन्ट बनाने, प्रबंधन, संग्रह और प्रदर्शन के लिए किया जाता है। वेब सामग्री प्रबंधन या WCM, सामग्री प्रबंधन की तरह सूचनाओं की अखंडता, संशोधन, और जीवनचक्र का प्रबंधन करता है। एक वेब कटट मैनेजमेंट सिस्टम (WCMS) एक प्रोग्राम है जो वेब पेज पर सामग्री का बनाए रखने, नियंत्रित करने, बदलने और फिर से स्थापित करने में मदद करता है। सामग्री को ज्यादातर डेटाबेस में रखा जाता है और XML या .Net जैसी लचीली भाषा का उपयोग करके इकट्ठा किया जाता है। उपयोगकतो सामान्य वेब ब्राउजर के माध्यम से सिस्टम के साथ इंटरैक्ट करता है। वहां से लेआउट के हिस्सों पर नियत्रण बनाए रखते हुए वेब पेज संपादित किए जा सकते हैं। वेब के शुरूआती दिनों में, HTML में एक विशेषज्ञ होना एक आवश्यकता थी। एक उचित कन्टेन्ट प्रबंधन प्रणाली इस आवश्यकता को समाप्त करती है और किसी को भी ऑनलाइन प्रकाशित करने की अनुमति देती है। कन्टेन्ट का सबसे सरल रूप एक बुनियादी ब्लॉग है, जो कम लागत, आसानी से अनुकूलित, उपयोगकर्ता के अनूकूल और कुशलतापूर्वक वेब पर प्रकाशन के लिए अग्रणी वर्कफ्लों का प्रबंधन करता है। इस प्रकार, संक्षेप में, वेब सामग्री प्रबंधन (डब्ल्यूसीएम) वेब पेज की सामग्री को बनाने, भण्डारण, प्रबन्धन और प्रकाशित करने के लिये एक एप्लीकेशन है जो टेक्सट, ग्राफिक्स, वीडियो आदि के रूप में हो सकता है। डब्ल्यूसीएम कन्टेन्ट को व्यवस्थित और अनुक्रमणित कर सकता है तथा विशिष्ट साइट आगंतुकों के लिए विशिष्ट रूप से डेटा प्रस्तुत कर सकता है। WCM सिस्टम की प्रमुख विशेषताएं हैं: 
    • प्रासंगिक और अपडेट सामग्री तक कुशल और प्रभावी पहुँच प्रदान करने के लिए वेबसाइटों को डिजाइन और व्यवस्थित करने की क्षमता, 
    • वेबसाइट पर प्रकाशन से पहले कन्टेन्ट मूल्यांकन और सामग्री को नियंत्रित करने और तैयार करने की क्षमता, और 
    • प्रकाशन प्रक्रिया के प्रमुख भागों का स्वचालन। अन्य सामान्य विशेषताओं में शामिल हैं: 
    • उपयोगकर्ता सुरक्षा भूमिकाएँ (User Security roles) 
    • मेटाडाटा (Metadata) . स्वचालित टेम्पलेट (Automated Templates) . संस्करण इतिहास (Version history) 
    • विदेशी भाषा का स्पोर्ट (Foreign language support)

    इंटरनेट सूचना तकनीकी संरचना के घटक 

    (Component of Internet Information Technology Structure) 

    एक सूचना प्रणाली में पाँच प्रमुख घटक होते हैं कम्प्यूटर हार्डवेयर (Computer Hardware): कम्प्यूटर हार्डवेयर से आशय कम्प्यूटर और उससे जुड़े हुए उपकरणों के ऐसे समूह से है, जिनमें सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है। इसके द्वारा सूचनाएँ इलैक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रेषित अथवा प्राप्त की जा सकती हैं। कम्प्यूटर नेटवर्क के अन्तर्गत एक ही स्थान पर कार्य कर रहे अथवा दूरस्थ स्थानों पर कार्य कर रहे स्वतन्त्र (autonomous) कम्प्यटरों तथा अन्य इकाइयों जैसे प्रिंटर, प्लाटर आदि को संचार माध्यम के द्वारा जोड़ा जाता है जिससे ये सभी आपस में सूचनाओं एवं संसाधनों का साझा उपयोग करते हैं। (2) सॉफ्टवेयर (Software) कम्प्यूटर प्रणाली हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर दोनों से मिलकर पर्ण होती है। हार्डवेयर जहाँ कम्प्यूटर प्रणाली के भौतिक अंगो (Physical Components) को कहते हैं वहीं सॉफ्टवेयर का आशय इन भौतिक अंगों का उपयोग लेने हेतु प्रयोग किये जाने वाले निर्देशों के एक समह (Set of Instructions) से है। इन निर्देशों के समूह के बिना कम्प्यूटर प्रणाली एक निर्जीव शरीर की भांति होती है जिसका सक्रिय उपयोग नहीं किया जा सकता। कम्प्यटर एक ऐसी मशीन है जिसका विभिन्न उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जा सकता है। इन भिन्न-भिन्न उद्देश्यों के लिए उपयोग सॉफ्टवेयर की सहायता से ही हो सकता है। सॉफ्टवेयर में दिये गये निर्देशों के अनसार ही कम्प्यूटर के विभिन्न अंगप्रत्यंग कार्य करते हैं। प्रारम्भिक दिनों में सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर निर्माता ही विकसित कर उपलब्ध कराते थे। आजकल सॉफ्टवेयर शब्द का उपयोग व्यापक अर्थ में किया जाता है। विशिष्टीकरण के इस युग में अब सॉफ्टेवयर विकसित करने वाली संस्थाएं हार्डवेयर निर्माताओं पर निर्भर नहीं हैं। कम्प्यूटर्स के बदलते विविध उपयोगों ने सॉफ्टवेयर विकास को एक व्यापक
  • उद्योग का रूप दे दिया है। सॉफ्टवेयर दो प्रकार के होते हैं- सिस्टम सॉफ्टवेयर तथा एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर।
  •   ऐसा सॉफ्टवेयर जो कम्प्युटर सिस्टम को क्रियान्वित एवं नियन्त्रित करता है सिस्टम सॉफमा कहलाता है। इसमें विभिन्न प्रोग्राम सम्मिलित हैं. जैसे-डॉस (DOS), यूनिक्स (UNIX), कम्पार (complier) आदि। यह सॉफ्टवेयर कम्प्यटर निर्माता द्वारा कम्प्यूटर के साथ उपलब्ध कराया जाता उपयोगकर्ता को कम्प्यूटर के प्रभावी उपयोग हेत इसकी जानकारी आवश्यक है। सिस्टम सॉफ्टवेयर अभाव में कम्प्यूटर पर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर का उपयोग नहीं किया जा सकता है। सिस्टम सॉफ्टवेया कम्प्यूटर विशेषज्ञों द्वारा तैयार किये जाते हैं। यह कम्प्यूटर प्रणाली का एक अत्यावश्यक हिस्सा है। एक ऐसा सॉफ्टवेयर जो किसी संगठन या व्यक्ति विशेष की आवश्यकता के अनुसार तैयार किया जाता है, उसे एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर कहते है। इसे तैयार करने के लिये विशेषज्ञों की सहायता ली ह। य साफ्टवेयर User Friendly होने के कारण उपयोगकर्ताओं के लिये बहुत उपयोगी होते हैं। में सामग्री नियन्त्रण, पे-रोल, लेखांकन आदि में इनका प्रयोग होता था किन्तु वर्तमान में बैंकिंग बी प्रकाशन, इजीनियरिंग आदि में इनका काफी उपयोग होता है। (3) दूर संचार (Telecommunications): सामान्यतः कम्प्यूटर नेटवर्क में कम्प्यूटर एवं इंटेलिजेन्ट पैरिफरल (intelligent peripherel equipments) टेलीफोन लाइन, माइक्रोवेव रिले या अन्य तीव्र गति के संचार माध्यमों जैसे वाई-फाई द्वारा जुड़े होते हैं जिससे आपस में डाटा सम्प्रेषण एवं संसाधनों का मिला जुला प्रयोग किया जा सके। यह नैटवर्किंग बहुत छोटे स्थानीय स्तर से लेकर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक विस्तृत हो सकती है। तार के माध्यम से कई कंप्यूटर्स को आपस में एक स्थान पर जोड़ना LAN कहलाता है। यहाँ ‘एक स्थान’ से अभिप्राय एक कमरा, भवन अथवा परिसर से है। LAN में प्राय: कंप्यूटर्स के बीच की दूरी एक किलोमीटर से कम होती है। कम्प्यूटर आपस में कोएक्सियल केबिल (Co-axial Cable), फाइबर ऑप्टिक (Fibre Optic) अथवा टिवस्टेड पेयर केबिल (Twisted Pair Cable) से जुड़े होते हैं। LAN में आँकड़ों का संचार उच्च गति से डिजिटल सिग्नल द्वारा किया जाता है। यह नेटवर्क कंप्यूटर्स के बीच आँकड़ों की फाइलों एवं प्रिण्टर जैसे उपकरणों की सहभागिता प्रदान करता है। LAN की कमी को पूरा करने क लिए WAN का प्रयोग किया जाता है। WAN के प्रयोग ने भौगोलिक सीमाओं को खत्म कर दिया है। भौगोलिक दृष्टि से दूर-दूर स्थित कंप्यूटर्स की नेटवर्किंग को WAN कहते हैं। WAN से जुड़े कम्प्यूटर पूरे देश अथवा पूरे विश्व में स्थित हो सकते हैं। WAN के द्वारा दो या दो से अधिक LAN को भी आपस में जोड़ा जा सकता है। अन्य शब्दों में हम यह कह सकते हैं कि WAN, LAN के नेटवर्क को जोड़कर कार्य करता है। यह लिंक टेलीफोन लाइनो के माध्यम से बनाया जाता है। इसके अतिरिक्त, WAN को हम उपग्रह (Satellite) तथा रॉकेट रेडिया (Rocket Radio) आदि माध्यमों से भी जोड़ सकते हैं। यह माध्यम टेलीफोन के मुकाबले बहुत महंगे होते हैं, परन्तु ये उन स्थानों पर भी कार्य करते हैं जहाँ टेलीफोन लाइनें उपलब्ध नहीं होती। सर्वप्रथम WAN की स्थापना अमेरिकन सुरक्षा प्रयोगशाला के अनुसन्धान प्रोजेक्ट DARPA द्वारा की गई थी, जिसका नाम था ARPANET। आज भी WAN के लिए इस मॉडल का प्रयोग किया जाता है। भारत में स्थापित किए गए WAN के उदाहरण हैं-इलेक्ट्रॉनिक विभाग, भारत सरकार द्वारा स्थापित ERNET (Education and Research Network) तथा सी. एम. सी. लिमिटेड द्वारा स्थापत  INDONETI अधिकांशत: WAN प्राइवेट होते हैं तथा उन्हीं कम्पनियों के नियन्त्रण में होते हैं जो उस पर काम कर रही होती हैं। वर्तमान समय में इण्टरनेट सबसे बड़ा, कम खर्चीला तथा विश्वप्रसिद्ध WANT अधिकांश क्षेत्रों में WAN टेलीफोन लाइनों के माध्यम से जड़े होते हैं। (4) डेटाबेस और डेटा वेयरहाउस (Data Base and Data Warehonses): डेटाबेस वह र है जहाँ डेटा एकत्र किया जाता है आर जिस आवश्यकता पड़ने पर एक या अधिक विशिष्ट मानदंडा उपयोग करके क्वेरी द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। एक डेटा वेयरहाउस में सभी डेटा शामिल होत जो किसी संगठन के लिए आवश्यक होते हैं। डेटाबेस और डेटा वेयरहाउस सचना प्रणालियों में डेटा” उद्भव के साथ और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। यहाँ डेटा का सही अर्थ में भारी मात्रा म संग्रह और विश्लेषण किया जा सकता है। (5) मानव संसाधन और प्रक्रियाएं (Human Resourcesanes and  Procedures): सूचना प्रणाली
  • का अंतिम, और संभवतः सबसे महत्वपूर्ण घटक मानव तत्व है। मानव संसाधन सिस्टम और प्रक्रियाओं करने के लिये आवश्यक होते हैं ताकि विशाल डेटाबेस और डेटा वेयरहाउस में संग्रहीत ज्ञान के भविष्य की कार्रवाई को निर्देशित किया जा सके।

    एक्स्ट्रानेट

    (Extranet) 

    एक्स्ट्रानेट एक संगठन के भीतर पाये जाने वाले नेटवर्क को व्यक्त करता है जो बाहरी व्यक्तियों जित तरीके से कनेक्ट करने के लिए इंटरनेट का उपयोग करता है। यह व्यवसायों को अपने और आपूर्तिकर्ताओं के साथ जोड़ने में मदद करता है और एक सहयोगी तरीके से काम करने में सहायता देता है। एक्स्ट्रानेट एक संचार नेटवर्क है जो ट्रैफिक नियंत्रण प्रोटोकॉल और इंटरनेट प्रोटोकॉल पीपी/आईपी) सहित साधारण इंटरनेट प्रोटोकॉल पर आधारित है, और आमतौर पर सूचना साझा के लिए उपयोग किया जाता है। एक एक्स्ट्रानेट एक इंटरनेट वेबसाइट से अलग है क्योंकि एक्ट्रानेट पहंच उपयुक्त लोगिन क्रेडेंशियल्स वाले व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं तक ही सीमित होती है। इसके निरिक्त, एक एक्स्ट्रानेट को अलग-अलग एक्सेस आवश्यकताओं के साथ कई विशेष क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है। इसलिए, सूचना और डेटा को अलग किया जा सकता है ताकि एक व्यावसायिक भागीदार, ग्राहक या विक्रेता केवल अपने संचालन के लिए जानकारी का उपयोग कर सकें, और अन्य संवेदनशील कंपनी डेटा तक न पहुंच सकें।

    इन्टरानेट

    (Intranet) 

    इंन्टरानेट एक प्राइवेट नेटवर्क है। इसकी पहुँच केवल संस्था के स्टॉफ तक ही होती है। प्राय: एक संस्था की विस्तृत रेंज की सूचनाएँ और सेवाएँ आन्तरिक इन्टरानेट पर उपलब्ध होती हैं तथा वे इंटरनेट की भाँति जनता के लिए उपलब्ध नहीं होती हैं। एक कम्पनी के अन्तर्गत इंटरानेट आन्तरिक संचार, सहयोग और आन्तरिक और बाहरी साधनों तक पहुँचने का सुगम साधन है। इससे कम्पनी की गतिविधियों में सामंजस्य बढ़ता है तथा उनके अन्दर गतिशीलता बढ़ती है। इन्टरनेट की स्थापना लोकल एरिया नेटवर्क (LANs) और वाइड एरिया नेटवर्क (WANs) की तर्ज पर होती है। यह 1994 से बड़ी संस्थाओं में प्रयोग किया जाने लगा है। इन्टरानेट का प्रयोग निगमित संस्कृति के बदलाव प्लेटफार्म पर भी हो रहा है। उदाहरणार्थ-बहुत बड़ी संख्या में कर्मचारी बहुत से मुद्दे जैसे—प्रबन्धन, उत्पादन, गुणवत्ता और कम्पनी से सम्बन्धित समस्याएँ इन्टरानेट पर चर्चा करके सुलझाते हैं। सरल शब्दों में यह कहा जा सकता है कि इंटरनेट तक सभी व्यक्तियों की पहुंच होती है।  जो लोग एक कंपनी के लिये काम करते हैं, उनके पास कंपनी के इंट्रानेट तक पहुंच होगी। किसी कम्पनी द्वारा ग्राहकों, आपूर्तिकर्ताओं, और विक्रेताओं को अन्य अधिकृत या संवेदनशील कपनी डेटा तक पहंच की अनुमति के बिना एक विशिष्ट डेटा प्रदान करने के लिए एक एक्स्ट्रानेट बनाया जाता है।

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