E-Commerce Framework & Supply Chain Management B.Com 3rd Year Hindi Notes

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ई-कॉमर्स क्रियात्मक ढांचा

(E-Commerce Application Framework) 

ई-कॉमर्स ढांचा (Framework) शब्द ई-कॉमर्स क्रियाओं को सम्पन्न करने के लिये साफ्टवेयर फ्रेमवर्क से सम्बन्धित है। ये ई-कॉमर्स क्रियाओं को शीघ्रता से सम्पन्न करने के लिये एक वातावरण प्रदान करते हैं। ई-कॉमर्स ढांचे में लचीलापन होना चाहिये जिससे उसे फर्म की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार परिवर्तित किया जा सके। ई-कॉमर्स ढांचे के उदाहरण हैं
  • Aimeos (Laravel, Symfony, TYPO3, Slim, PHP, Flow) 
  • Spryker (onald Symfony) 
  • Sylius (केवल Symfony) 
ई-कॉमर्स ढांचे में मुख्य रूप से निम्नलिखित घटक शामिल होते हैं:  (i) एपीआई गेटवे (API Gateway)  (ii) आदेश सेवा (Order Service)  (iii) भुगतान सेवा (Payment Service)  (iv) स्टॉक सर्विस (Stock Service)  (v) सपुर्दगी सेवा (Delivery Service) (i) एपीआई गेटवेः एपीआई गेटवे एक सर्वर है जो सिस्टम में प्रवेश का अकेला स्थान है। एपीआई गेटवे आंतरिक सिस्टम आर्किटेक्चर को एन्क्रिप्ट करता है और प्रत्येक क्लाइंट के लिए एक एपीआई प्रदान करता है। इसके पास प्रमाणीकरण, निगरानी, लोड संतुलन, कैशिंग, आदेश पूरा करने और प्रबन्धन से सम्बन्धित अन्य जिम्मेदारियां हो सकती हैं। (ii) ऑर्डर सर्विस: ऑर्डर सेवा ई-कॉमर्स आर्किटेक्चर का एक महत्वपूर्ण घटक है क्योंकि आर्किटेक्चर का यह भाग क्लाइंट से प्राप्त किए गए ऑर्डर को पूरा करने की क्रियाओं को सुविधाजनक बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। (iii) भगतान सेवाः आदेश देने के बाद, ग्राहक को दिये गए आदेश के लिए भुगतान करना चाहिए इसमें विभिन्न विकल्पों जैसे डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, वॉलेट (पेटीएम, गगल पे. बीएचआईएम आदि) के साथ-साथ यूपीआई प्लेटफार्मों की सुविधा भी उपलब्ध होती है। (iv) स्टॉक सेवा: यह फमों के स्टॉक रिकॉर्ड को अपडेट रखता है और स्टॉक में से निकाले गए माल और इन्वेंटी में उपलब्ध स्टॉक के बारे में जानकारी प्रदान करता है। (v) सुपुर्दगी सेवा: ई-कॉमर्स आर्किटेक्चर के लिए डिलीवरी पार्ट सबसे महत्त्वपूर्ण है। जब कोई आदेश वेब या एप्लिकेशन पोर्टल पर प्राप्त होता है. तो आर्डर को पूरा करने के लिए संसाधित किया जाता है, जिसमें लॉजिस्टिक पार्टनर को निर्माता के गोदाम से ऑर्डर लेने और ग्राहक के स्थान पर पहुंचाने का निर्देश दिया जाता है।

आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन

(Supply Chain Management) 

विशेषज्ञों द्वारा यह कहा गया है कि 21वीं सदी में प्रतिस्पर्धा व्यक्तिगत कंपनियों के बीच नहीं बाल्क आपूर्ति श्रृंखलाओं के मध्य होगी। आपर्ति श्रृंखला अन्तर्सम्बन्धित क्रियाओं की एक कड़ी है जो कच्चे माल का निर्मित माल में रूपान्तिरत करने से लेकर उसे अन्तिम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की क्रियाआ का सम्मिलित करती है। आपर्ति श्रृंखला की क्रियाओं के सफलतापर्वक संचालन के लिये इससे सम्बन्धित विभिन्न संगठनों को आपसी सामंजस्य से कार्य करना पड़ता है। इन विभिन्न संगठनों में पूर्तिकर्ता, उत्पादक, थोक विक्रेता, फटकर तथा उपभोक्ता सम्मिलित होते हैं। आपूर्ति श्रृंखला प्रबन्धन एक खचीली एवं जटिल व्यवस्था है जो इस बात के लिये आश्वस्त करती है कि प्रत्येक सहयोगी, आपर्तिकर्ता से लेकर निर्माता और अन्य सभी बेहतरीन तरीके से कार्य करेंगे। प्रभावी आपूर्ति श्रृंखला प्रबन्धन (SCM), परिवर्तन प्रबन्ध, सहयोग तथा जोखिम प्रबन्ध को पर्याप्त महत्व देती है जिससे सभी इकाईयों के मध्य संवाद (Communication) और सहयोग उत्पन्न हो सके। आपूर्ति श्रृंखला प्रबन्धन, पर्यावरण, सामाजिक और कानूनी पहलूओं को भी शामिल करता है। आपूर्ति श्रृंखला प्रबन्धन उत्पाद के निर्माण से प्रदूषण फैलने के कारण पर्यावरण को होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करता है।

लॉजिस्टिक्स क्या है?

(What is Logistics) 

प्रबन्धन प्रक्रिया जो माल, सेवाओं, सूचना और पूंजी के आवागमन को एकीकृत करती है, कच्चे माल की प्राप्ति से लेकर जब तक कि वह अंतिम उपभोक्ता तक नहीं पहुंच जाती, रसद प्रबंधन (Logistic Management) के रूप में जाना जाती है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य अंतिम ग्राहक को सही कीमत पर सही समय पर सही गुणवत्ता के साथ सही उत्पाद प्रदान करना है। लॉजिस्टिक गतिविधियों को दो व्यापक श्रेणियों में विभाजित किया गया है: (i) इनबांउड लॉजिस्टिक्सः इनबाउंड लॉजिस्टिक्स सामग्रियों को प्राप्त करने और फिर उन्हें संभालने, भंडारण और परिवहन से सम्बन्धित गतिविधियों को शामिल करता है। (ii) आउटबाउंड लॉजिस्टिक्स : अंतिम उपभोक्ता के लिए संग्रह, रखरखाव और वितरण या वितरण से सम्बन्धित गतिविधियां आउटबाउंड लॉजिस्टिक्स में आती हैं।

आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन के कार्य

(Functions of Supply Chain Management) 

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में मुख्य रूप से निम्नलिखित पाँच कार्य शामिल होते हैं:
  1. क्रय (Purchases): यह आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन का पहला कार्य है। यह कच्चे माल और अन्य संसाधनों के क्रय से सम्बन्धित है जो माल के निर्माण के लिए आवश्यक हैं। यह बिना किसी देरी के सामग्रियों को वितरित करने के लिए आपूर्तिकर्ताओं के साथ समन्वय करता है।
  2. संचालन (Operation) : संचालन टीम, मांग योजना और पूर्वानुमान के कार्य में संलग्न रहती है। कच्चे माल के क्रय के आदेश देने से पहले संगठन को बाजार की सम्भावित माँग और उन इकाइयों की संख्या का अनुमान लगाना होगा जो इसे उत्पादित करने की आवश्यकता है। तदनसार यह आगे इन्वेंट्री प्रबंधन, उत्पादन और शिपिंग के लिए कार्य करता है।
  3. रसद (Logistics): आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन के इस कार्य के लिए अत्यधिक समन्वय की आवश्यकता होती है। जब उत्पादों का निर्माण शुरु हो जाता है, तो इसे भंडारण के लिए जगह की आवश्यकता होती है जब तक कि इसे वितरण के लिए न भेज दिया जाए। यह स्थानीय गोदाम और बाहरी गोदामों की व्यवस्था करता है। लॉजिस्टिक्स सुनिश्चित करता है कि उत्पादन बिना किसी समस्या के अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचे।
4.संसाधन प्रबंधन (Resource Management): यह कम लागत पर उत्पादन का अनकलन करने के लिए सही समय पर सही गतिविधि में संसाधनों के आबंटन पर विचार करता है।
  1. सूचना प्रवाह (Information Flow) : सूचना प्रवाह वह कार्य है जो वास्तव में आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन के अन्य सभी कार्यों को सुचारू बनाए रखता है।

ई-कॉमर्स आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन के लाभ 

(Advantages of E-commerce Supply Chain Management) 

(a) पारदशिता (Transparency): एससीएम परे नेटवर्क में पारदर्शिता प्रदान करता है। यह उपयोगकर्ताओं को आपूर्ति, उत्पादन, भंडारण और वितरण के दौरान आने वाली सभी गतिविधियों की स्थिति की निगरानी करने का आश्वासन देता है। यह तैयार उत्पादों के शिपिंग के लिए ऑर्डर करने से लेकर सभी प्रक्रियाओं की अधिक व्यापक टैकिंग और प्रबंधन सुनिश्चित करता है। (b) उन्नत साआरएम (Enhanced CRM): एससीएम समय पर डिलीवरी सनिश्चित करता है. जो ग्राहकों को प्रसन्न रखता है साथ ही यह ग्राहकों की आवश्यकताओं पर निगाह बनाए रखने के लिए व्यवसाय को सहायता करता है। यह सनिश्चित करता है कि व्यवसाय उत्पादों और सेवाआ का वामन मांगों में बदलाव के लिए तैयार है। एक ई-कॉमर्स एकीकृत आपूर्ति श्रृंखला की मदद से, व्यवसाय सीधे अपने उत्पादों के बारे में आवश्यकताओं और फीडबैक प्राप्त कर सकते हैं। (c) कम से कम विलम्ब (Minimized Delay): डिलीवरी में देरी से उत्पादक और उपभोक्ता के रिश्ते तनावपूर्ण हो सकते हैं। विक्रेताओं से शिपमेंट में देरी, उत्पादन के दौरान होल्डअप और वितरण चैनलों में लॉजिस्टिक त्रटियां नकारात्मक रूप से ग्राहकों के बीच कंपनी की छवि को प्रभावित करता हा एक प्रभावी एससीएम के साथ,सभी गतिविधियों को ऊपर से नीचे तक समन्वित और निष्पादित किया जा सकता है। (d) लागतो में कमी (Cost Reduction): एक मुख्य कारण जिसके कारण ग्राहक अपना समय और पैसा ई-कॉमर्स में लागते हैं, कम लागत पर वस्तुएं प्राप्त होना है। संभवतः, ऐसे बहुत से क्षेत्र है जहाँ व्यवसाय में आवश्यकता से अधिक निवेश किया जाता है। ऐसे कुछ क्षेत्रों को निश्चित रूप से सुव्यवस्थित किया जा सकता है। यह उन क्षेत्रों को पहचानने के लिए आपूर्ति श्रृंखला का विश्लेषण करता है जहाँ लागत में कटौती की जा सकती है। एक ई-कॉमर्स आधारित SCM वितरण, खुदरा विक्रेताओं और मध्यस्थों को हटा देता है। इससे संस्था को उच्च लाभ प्राप्त होते है। (e) ओमनी-चैनल तरीकों को अपनानाः एक अच्छी तरह से संरचित SCM ओमनी-चैनल जुड़ाव की सुविधा देता है, जो आगे चलकर तकनीकी प्रगति को तीव्र करता है जिससे तेजी से नए ग्राहक जुड़ते है। ओमनी-चैनल और ई-कॉमर्स ग्राहकों के लिए नए पहलुओं के साथ नए विक्रय और शिपिंग प्रतिमान हैं। यह ग्राहक सुविधा और अपेक्षाओं के बारे में है।

एक प्रभावी आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन की विशेषताएं 

(Features of an Effective Supply Chain Management) 

एक प्रभावी SCM को मैट्रिक्स के पोर्टफोलियो पर बढ़ावा देने की क्षमता के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। इस बात पर गहन शोध होना चाहिए कि आपूर्ति श्रृंखला अपने प्रमुख सहयोगियों के साथ-साथ विविध बाजारों, जोखिम प्रबंधन, गतिशील ग्राहक मांगों और तकनीकी प्रगति के साथ कैसे व्यवहार करती है। एक प्रभावी आपूर्ति श्रृंखला प्रबन्धन के लिये निम्नलिखित पर ध्यान दिया जाना चाहिये (a) रणनीति को स्पष्ट करना (Clarifying the Strategy): एक प्रभावी आपूर्ति श्रृंखला रणनीति को स्पष्ट करने में मदद करती है जो बदले में जोखिम को कम करने में सहायक होती है। (b) अधिक समंक (Big Data): बड़े डेटा का सक्रिय उपयोग अक्षमताओं की पहचान करने, समाधान निकालने और उनके कार्यान्वयन में मदद कर सकता है। इसके अलावा, इस तरह के डेटा का उपयोग प्रभावी रूप से इन्वेंट्री में आवश्यकता के समय सत्यापन योग्य पूर्वानुमानों के निर्माण के लिए लागू किया जा सकता है। (c) अनुकूलन (Customization): अनुकूलन का अर्थ है कि ग्राहकों को जो वे चाहते हैं, प्रदान करने के लिए आपूर्ति श्रृंखला प्रक्रियाओं को कैसे लागू किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, एक दिन के भीतर नए लॉन्च किए गए लैपटॉप के ऑर्डर को पूरा करना पड़ सकता है। इसके अलावा, जैसे-जैसे व्यवसाय बढ़ता है आपूर्ति श्रृंखला उत्पादों के अधिक विविध समह उत्पन्न होने लगते हैं जिससे, एक प्रभावी SCM को बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए अनुकूलित सेवाओं को अपनाने और बनाने में सक्षम होना चाहिए। (d) लचीलापन (Flexibility) : वैश्विक अर्थव्यवस्था के कारण, नए बाजारों के साथ-साथ निगमीय खिलाड़ियों की संख्या में वृद्धि हुई है। तो, अधिक लीड कैसे प्राप्त करें? यह वह जगह है जहाँ लचीलापन प्रयोग में आता है। लचीलापन सुनिश्चित करता है कि SCM बाजार, राजनीतिक क्षेत्रों और अन्य महत्वपूर्ण परिस्थितियों में बदलावों को स्वीकार करता है जो अन्यथा व्यवसाय को प्रभावित करते हैं।

SCOR मॉडल और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन 

(The SCOR Model and Supply Chain Management) 

आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में रणनीतिक निर्णय लेने के लिए सबसे उपयुक्त मॉडल SCOR मॉडल के रूप में जाना जाता है। विनिर्माण वितरण और सहयोगी आपर्तिकर्ता उद्योगों (आपूर्ति श्रृंखला परिषद के सहयोग से) के 70 प्रमुख सदस्यों ने प्रबंधन उपकरण विकसित किया. जो “आपूर्ति श्रृंखला संचालन सन माडल के नाम से जाना जाता है। कार्यक्रम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वह किसी भी आकार की प्रक्रिया पर लाग हो सकता है। SCOR मॉडल एक ऐसी प्रक्रिया है जो मानकों को स्थापित करने और लगातार सधार करने के लिए है। यह निरंतर कार्य और खोज की प्रक्रिया है, जिसे ग्राहक को संतुष्ट करने के चरणों से जुड़ी सभी व्यावसायिक गतिविधियों का वर्णन करने के लिए विकसित किया गया है।

रिवर्स लॉजिस्टिक्स

(Reverse Logistics) 

रिवर्स लॉजिस्टिक्स, जिसे कभी-कभी वापसी (Return) प्रबंधन के रूप में जाना जाता है, उपभोग के बिंदु से मूल बिंदु तक सामग्री के वापस प्रवाह को सुविधानजक बनाने के लिए आवश्यक सभी कार्यों को शामिल करता है। यह प्रवाह ऑर्डर पूर्ति का एक आवश्यक हिस्सा है, क्योंकि क्षति के कारण वापसी, अशुद्धियाँ और खरीदार के द्वारा लौटाए गए उत्पादों के निपटान या पुनः विभाजन की आवश्यकता होती हैं। रिवर्स लॉजिस्टिक्स में शामिल कुछ गतिविधियों में दुबारा निर्मित करना (Remanufacturing), रीफर्बिशिंग (Refurbishing) और रिडिजाइनिंग (Redesigning) शामिल हैं, लेकिन ये गतिविधियाँ पैकेजिंग रीसाइक्लिग या शिपिंग कंटेनर के पुन: उपयोग की मूल प्रक्रिया से अलग हैं। खतरनाक सामग्री, पुनर्नवीनीकरण माल, अप्रचलित उपकरण और पुनर्णाप्त संपत्ति से निपटने के लिए अतिरिक्त रिवर्स लॉजिस्टिक्स कार्यक्रम प्रयोग में आ सकते हैं। रिवर्स लॉजिस्टिक्स में वापसी प्रक्रिया अक्सर माल की क्षति, बिना बिका मौसमी स्टॉक,, स्टॉक प्रबंधन गलतियों के कारण और अतिरिक्त स्टॉक के निस्तारण, वापस मँगाने या हटाने के लिए होती है। रिवर्स लॉजिस्टिक्स में निम्नलिखित क्रियाएँ सम्मिलित हैं —
  1. मरम्मत (Repair) : माल को फिर से बिक्री के लिए. गोदाम या वितरण श्रृंखला में सम्मिलित करने के लिए माल की मरम्मत/सुधार करना।
  2. पुनर्निर्माण (Remanufacturing): उत्पाद का पुननिर्माण करने के लिए नए, मरम्मत किए गए या पुन: उपयोग किए गए पुों का उपयोग करके मूल उत्पाद विनिर्देशों को पूरा करने और अप्रचलित या खराब हो चुके घटकों को सुधारने या बदलने के लिए।
  3. पुन:सुधार (Refurbishing) : निर्माण के नए विनिर्देशों और मानकों को पूरा करने के लिए पुराने उत्पादों में सुधार।
  4. पुराने भागों का पुनः प्रयोग (Cannibalization) : पुन: उपयोग करने या पुन: पेश करने की गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के लिए उपयोग किए गए उत्पादों से पुन: सही भागों को प्राप्त करना।
पुनर्चक्रण (Recycling): नए उत्पादों को बनाने या दूसरों को नवीनीकृत करने के लिए किसी अन्य उत्पाद से सामग्री का पुन: उपयोग करना।

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