B.Com 2nd Year Accounting For Labour Short Notes

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खण्ड ‘अ’ :

लघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1 – प्रत्यक्ष श्रम और अप्रत्यक्ष श्रम से आप क्या समझते हैं? What do you mean by Direct labour and Indirect labour ?

उत्तर – किसी भी वस्तु के निर्माण में श्रम का महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। अर्थशास्त्र में श्रम (labour) को उत्पादन के पाँच साधनों में दूसरा स्थान दिया गया है। श्रम के बिना भूमि, पूँजी, संगठन और साहस अपूर्ण हैं।

सामग्री की भाँति श्रम के भी दो प्रकार होते हैं-प्रत्यक्ष श्रम एवं अप्रत्यक्ष श्रम।

(i) प्रत्यक्ष श्रम (Direct Labour)-किसी उत्पादन के निर्माण हेतु प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत श्रमिक को प्रत्यक्ष श्रम की श्रेणी में रखा जाता है। अन्य शब्दों में, उत्पादित वस्तु के निर्माण में प्रत्यक्ष रूप से सम्बन्धित श्रम को प्रत्यक्ष श्रम कहते हैं। उदाहरण के लिए-फर्नीचर बनाने हेतु बढ़ई (carpenter), मकान बनाने हेतु मिस्त्री एवं मजदूर आदि। प्रत्यक्ष श्रम की गणना प्रति इकाई आधार पर सरलतापूर्वक की जा सकती है।

(ii) अप्रत्यक्ष श्रम (Indirect Labour)-ऐसे सभी श्रमिक जो उत्पादन कार्य में सहयोग करते हैं परन्तु प्रत्यक्ष रूप से उनका कार्य वस्तु के निर्माण में दिखाई नहीं देता है, अप्रत्यक्ष श्रम कहलाता है। उदाहरण के लिए-फोरमैन, चौकीदार, टाइमकीपर, सुपरवाइजर आदि।

प्रत्यक्ष श्रम मूल लागत (Prime Cost) में जोड़ा जाता है, जबकि अप्रत्यक्ष श्रम उपरिव्ययों (Overheads) का हिस्सा होता है।

प्रश्न 2 – अधिसमय कार्य एवं कार्यहीन समय पर टिप्पणी लिखिए। 

Write short note on Over-time Work and Idle-time. 

उत्तर – अधिसमय कार्य

(Overtime Work) 

सामान्य कार्य समय के अतिरिक्त किसी अन्य समय पर किया गया कार्य अधिसमय कार्य कहलाता है। भारतीय कारखाना अधिनियम की धारा 59 (i) के अनुसार, यदि कोई श्रमिक प्रतिदिन 9 घण्टे से अधिक अथवा सप्ताह में कुल मिलाकर 48 घण्टे से अधिक कार्य करता है, इनमें से जो भी श्रमिक के लिए लाभप्रद होगा, अधिसमय माना जाएगा। कारखाना अधिनियम के अनुसार, अधिसमय कार्य के लिए श्रमिक को सामान्य से दोगुनी दर से मजदूरी भुगतान की जाएगी। चूँकि अधिसमय कार्य करने पर श्रम लागत बढ़ जाती है, अत: अति म आवश्यक होने पर ही अधिसमय कार्य कराया जाना चाहिए।

कार्यहीन समय (Idle Time) 

कार्यहीन समय समयानुसार मजदूरों द्वारा खराब किए गए समय को प्रदर्शित करता है। जब श्रमिकों को समयानुसार मजदूरी दी जाती है तो उनके द्वारा उत्पादन कार्य में लगाए गए समय तथा उस समय में जिसके लिए उन्हें मजदूरी दी जाती है, कछ न कुछ अन्तर होता है। इस अन्तर को कार्यहीन या निष्क्रिय समय कहा जाता है। वास्तव में, कार्यहीन समय से आशय उस समय से है जिसके लिए श्रमिक को मजदूरी का भुगतान तो किया गया है परन्तु उस समय में श्रमिक ने कोई उत्पादन कार्य नहीं किया अर्थात उपस्थिति का समय- वास्तविक कार्य का समय = कार्यहीन समय।

उदाहरण – कारखाने में प्रवेश के बाद श्रमिक को अपने विभाग तक पहुँचने में कुछ समय लगता है। यद्यपि यह समय नगण्य ही होता है। इसके अतिरिक्त सामग्री, उपकरणों अथवा निर्देशों की प्रतीक्षा में गड़बड़ या शक्ति सप्लाई बाधा आदि कारणों से भी श्रमिक को खाली रहना पड़ता है।

लागत लेखांकन के दृष्टिकोण से कार्यहीन समय को दो वर्गों में बाँटा जा सकता है

(i) सामान्य कार्यहीन समय (Normal Idle Time)-सामान्य कार्यहीन समय से आशय ऐसे कार्यहीन समय से है जो उत्पादन क्रिया में सामान्यत: होता है। उस पर नियन्त्रण रखना असम्भव होता है; जैसे-मशीन सैटिंग में लगा समय, प्राकृतिक आवश्यकताओं के पूरा करने में लगा समय आदि। कार्यहीन समय की लागत को (अ) कारखाना उपरिव्यय खाते से चार्ज किया जा सकता है अथवा (ब) इस लागत को मजदूरी दर बढ़ाकर वसूल किया जा सकता है। इस पर नियन्त्रण की दृष्टि से इनमें पहला तरीका अच्छा रहता है।

(ii) असामान्य कार्यहीन समय (Abnormal Idle Time)-उत्पादन कार्य में प्रमापित समय से अधिक लगने वाला समय असामान्य या असाधारण कार्यहीन समय कहलाता है। सामान्यत: यह अकुशल प्रबन्ध व्यवस्था, मशीनों की टूट-फूट, सामग्री-पूर्ति में देरी, बिजली चली जाना, हड़ताल आदि के कारण होता है। इसे उत्पादन लागत का भाग नहीं माना जा सकता है। अत: असामान्य कार्यहीन समय की लागत को लगत लाभ-हानि खाते से चार्ज किया जाता है।

प्रश्न 3 – मजदूरी भुगतान की प्रमुख विधियों को बतलाइए। 

Mention the principal methods of wage payments ?

मजदूरी भुगतान की पद्धतियाँ

(Methods of Wage Payment) 

जब उद्योगों के अन्तर्गत श्रमिक कार्य करता है तो उसके कार्य की मेहनत के बदले में निर्माता या उद्योगपति उन्हें पारिश्रमिक के रूप में कुछ धनराशि भुगतान करता है, उसे मजदूरी या वेतन कहते हैं। श्रमिकों की कार्यकुशलता बनाए रखने के लिए श्रमिकों को भुगतान की जाने वाली मजदूरी का निर्धारण बहुत ही सावधानी से करना चाहिए। विभिन्न उद्योगों द्वारा मजदूरी भुगतान के लिए प्रयोग की जाने वाली पद्धतियाँ अग्रांकित चार्ट में दर्शायी गई हैं

प्रश्न 4 – प्रेरणात्मक मजदूरी भुगतान पद्धतियाँ कौन-सी हैं? 

What are the main incentive wage payment Method ?

उत्तर – प्रेरणात्मक योजनाएँ या अधिलाभांश पद्धतियाँ

(Incentive Plans or Bonus Systems) 

मजदूरी भुगतान करने की वे विधियाँ या पद्धतियाँ जो समयानुसार एवं कार्यानुसार पारिश्रमिक भुगतान करने की विधियों में सामंजस्य स्थापित करती हैं, प्रेरणात्मक या अधिलाभांश पद्धतियों के नाम से जानी जाती हैं। इन पद्धतियों की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

(i) श्रमिकों को औसत से कुछ अधिक मजदूरी मिलती है, जिससे उनके अन्दर उत्पादन वृद्धि के प्रोत्साहन की भावना जाग्रत होती है।

(ii) इस विधि में प्रत्येक कार्य के लिए प्रमाप समय (standard time) निर्धारित कर दिया जाता है, इस समय से अधिक कार्य करने पर कुछ अधिक मजदूरी दी जाती है, जिसे अधिलाभांश कहा जाता है।

प्रमुख प्रेरणात्मक या अधिलाभांश योजनाएँ निम्नलिखित हैं-

(1) हाल्से प्रीमियम योजना (Halsey Premium Plan), 

(2) रोवन प्रीमियम योजना (Rowan Premium Plan),

(3) टेलर विभेदात्मक कार्यानुसार भृत्ति योजना (Taylor Differential Piece Rate Plan),

(4) मेरिक बहुविध कार्यानुसार योजना (Merrick Multiple Piece Rate Plan), 

(5) गेण्ट बोनस योजना (Gantt Bonus Plan),

(6) इमरसन कार्यक्षमता अधिलाभांश योजना (Emerson’s Efficiency Bonus Plan),

(7) बेडॉक्स योजना (Bedaux Plan), 

(8) बार्थ योजना (Barth Plan) 

(9) उतार-चढ़ाव मजदूरी पद्धति या स्लाइडिंग पद्धति (Sliding Scale System), 

(10) सामूहिक बोनस योजना (Collective Bonus Scheme), (11) उच्चतम पारिश्रमिक प्रणाली (Highest Wage System), (12) न्यूनतम पारिश्रमिक प्रणाली (Minimum Wage System), (13) विशेष उत्पादन बोनस (Special Production Bonus), (14) सहभागिता प्रणाली (Profit Sharing System)।

प्रश्न 5 – हाल्से एवं रोवन प्रीमियम योजनाओं को संक्षेप में समझाइए। 

Explain in brief the Halsey and Rowan Premium Plans. 

उत्तर – हाल्से एवं रोवन प्रीमियम योजनाएँ

(Halsey and Rowan Premium Plans) 

हाल्से प्रीमियम योजना (Halsey Premium Plan)-मजदूरी की इस प्रेरणात्मक योजना के अन्तर्गत प्रत्येक कार्य का प्रमापित समय (Standard Time) पहले से ही निश्चित कर दिया जाता है। यदि श्रमिक प्रमापित समय में अथवा प्रमापित समय से अधिक समय में कार्य पूरा करता है तो श्रमिक को केवल निश्चित दर से पारिश्रमिक दिया जाता है। इसके विपरीत, यदि श्रमिक प्रमापित समय से पूर्व ही अपना कार्य पूरा कर लेता है तो उसे निश्चित पारिश्रमिक के अतिरिक्त बचाए हुए समय का निश्चित अनुपात |33 – % से 50% तक प्रीमियम के रूप में दिया जाता है।

रोवन प्रीमियम योजना (Rowan Premium Plan)-मजदूरी की इस प्रेरणात्मक योजना के अन्तर्गत जो श्रमिक प्रमापित समय से कम समय में कार्य पूरा कर लेता है, उसे निश्चित पारिश्रमिक के अतिरिक्त निम्नलिखित सूत्र की सहायता से प्रीमियम दिया जाता है

Time Taken x Time Saved Rate ner hour Amount of Premium= Standard Time 

प्रश्न 6 – आकस्मिक श्रमिक से आप क्या समझते हैं? 

What do you understand by Casual Worker ?

उत्तर – कभी-कभी कारखाने में नियमित श्रमिकों के अतिरिक्त भी कुछ श्रमिकों को कार्य पूर्ति हेतु, कार्य पर लगाया जाता है। ऐसे श्रमिक प्रतिदिन मजदूरी के आधार पर अल्पकाल के लिए लगाए जाते हैं। इन्हें आकस्मिक श्रमिक कहा जाता है। कार्य पूर्ण होने के उपरान्त इन्हें निकाल दिया जाता है।

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