B.Com 2nd Year Computation Of Tax Liability Short Notes In Hindi

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लघु उत्तरीय प्रश्न  

प्रश्न 1- कुल आय की गणना किस प्रकार की जाती है? 

How total income is calculated ? 

उत्तर – कुल आय की गणना निम्नलिखित प्रकार से की जाती है

(1) सर्वप्रथम आय के 5 शीर्षकों के अन्तर्गत आय की गणना करदाता की निवासीय स्थिति के आधार पर करते हैं।

(2) इस आय में शामिल की जाने वाली दूसरे व्यक्तियों की आय तथा अन्य मानी गई आय शामिल करते हैं।

(3) तत्पश्चात् किसी शीर्षक की हानि, आगे लायी हुई हानियाँ, अशोधित ह्रास, अशोधित छूटें आदि घटाते हैं, जो शेष बचता है उसे ‘सकल कुल आय’ कहते हैं।

(4) सकल कुल आय में से धारा 80C से धारा 80U तक के अन्तर्गत प्राप्त कटौतियों के सम्बन्ध में कटौती करने के पश्चात् जो शेष बचता है उसे ‘कुल आय’ कहते हैं। गणन क्रिया के लिए निम्नलिखित Proforma प्रयुक्त किया जा सकता है

Computation of Total Income of an Individual 

Income as computed under the following heads after set-off of losses:

1. Income from Salaries 

2. Income from House Property 

3. Profits and Gains of Business or Profession 

4. Capital Gains :

(a) Long-term Capital Gains

(b) Short-term Capital Gains 

5. Income from Other Sources: 

(a) Casual incomes (e.g., Lottery,

card game, horse race, betting etc.) 

(b) Other incomes 

Gross Total Income 

Less: Deductions under Section 80C to 80U  Total Income Rounded off

Note: Deductions under Section 80C to 80U are not available against short-term pital gains specified in Section 111A and long-term capital gains.

प्रश्न 2 – धारा 80C के अन्तर्गत एक करदाता को मिलने वाली कटौतियों समझाइए।

Explain the deductions u/s 80C which are available to an assessen

उत्तर – धारा 80C के अनुसार जीवन बीमा प्रीमियम, प्रॉवीडेण्ट फण्ड में अंशदा आदि के सम्बन्ध में कटौतियाँ दी जाती हैं।

(1) एक व्यक्ति तथा हिन्दू अविभाजित परिवार इस कटौती को पाने के अधिकारी हैं। 

(2) कटौती की अधिकतम मात्रा – रू. 1,50,000 तक है।

(3) भुगतान की गई अथवा जमा की गई राशियाँ जो धारा 80C के अनुसार कटौती के लिए अधिकारी हैं, वे मुख्यत: निम्नलिखित हैं

एक व्यक्ति की दशा में

(i) अपने, अपनी पत्नी, अपने बच्चों के जीवन पर कराये गए बीमे का प्रीमियम जो सम्पूर्ण बीमित राशि के 20% से अधिक न हो।

(ii) वैधानिक प्रॉवीडेण्ट फण्ड में कर्मचारी का अंशदान। 

(iii) सार्वजनिक प्रॉवीडेण्ट फण्ड में अंशदान अधिकतम विनियोग रू. 1,50,000 होगा। 

(iv) प्रमाणित प्रॉवीडेण्ट फण्ड में दिया गया कर्मचारी का अंशदान। 

(v) अनुमोदित निवृत्ति कोष में कर्मचारी का अंशदान। 

(vi) राष्ट्रीय बचत-पत्र VIII निर्गम में गत वर्ष में विनियोग।

(vii) भारत में रिहायशी मकानों के क्रय करने अथवा दीर्घकालीन वित्त प्रदान करने वाली संस्था में अंशदान।

(viii) किसी अनुसूचित बैंक में पाँच वर्ष या अधिक की नियत अवधि के लिए जमा की गई राशि।

प्रश्न 3 – धारा 80 CCD के प्रावधानों का उल्लेख कीजिए। 

Describe the provisions of Sec. 80 CCD. 

उत्तर – केन्द्रीय सरकार की बीमा पेंशन योजना

1. किसे कटौती मिलेगी–

(i) केन्द्रीय सरकार का ऐसा कर्मचारी जिसकी नियुक्ति 1.1.2004 को या इसके पश्चात् हुई है,

(ii) किसी अन्य नियोक्ता का कर्मचारी, 

(iii) कोई अन्य व्यक्ति (individual)।

2. किस सम्बन्ध में कटौती – केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित की जाने वाली पशन योजना में कर्मचारी के खाते में गत वर्ष में जमा की गई राशि के सम्बन्ध में कटौती मिलेगा।

3. कितनी राशि की कटौती मिलेगी- (i) गत वर्ष में कर्मचारी द्वारा पेंशन खात – जमा की गई राशि के बराबर या उसके वेतन का 10%, जो दोनों में कम हो।

(ii) किसी अन्य व्यक्ति की दशा में सकल कुल आय का 10% तक। परन्तु कटौती की राशि 50,000 रुपये से अधिक नहीं होगी।

(iii) केन्द्रीय सरकार या अन्य नियोक्ता द्वारा कर्मचारी के खाते में संदत्त राशि या वेतन का 10%, जो दोनों में कम हो।नोट – नियोक्ता द्वारा कर्मचारी के खाते में संदत्त राशि पचास हजार रुपये में शामिल नहीं होगा।

प्रश्न 4 – धारा 80D को समझाइए।

Explain Sec. 80D. 

अथवा धारा 80D के क्या प्रावधान हैं? 

What are provisions of Sec. 80D?

उत्तर – चिकित्सा बीमा प्रीमियम के सम्बन्ध में कटौती u/s 80D कटौती किसे मिलेगी

1. एक व्यक्ति को – (a) स्वयं का, अपने जीवन साथी एवं आश्रित बच्चों के स्वास्थ्य का बीमा प्रीमियम या केन्द्रीय सरकार स्वास्थ्य स्कीम (या केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किसी अन्य स्वास्थ्य स्कीम में अंशदान देने पर रू. 25,000 तक एवं (b) माता-पिता (चाहे आश्रित हों अथवा नहीं) के स्वास्थ्य का बीमा प्रीमियम देने पर रू. 25,000 तक। यदि कोई वरिष्ठ अथवा अतिवरिष्ठ नागरिक है तो कटौती की राशि रू. 30,000 होगी।

2. हिन्द्र अविभाजित परिवार – परिवार के किसी सदस्य का बीमा प्रीमियम देने पर रू. 25,000 का। यदि बीमा प्रीमियम (1) (a) या (b) या (2) में वर्णित व्यक्ति के लिए दिया गया है तथा ऐसा व्यक्ति वरिष्ठ नागरिक है तो कटौती की राशि रू. 30,000 तक होगी। 

शर्त – स्वास्थ्य बीमा की योजना भारतीय सामान्य बीमा निगम की होनी चाहिए तथा यह योजना केन्द्र सरकार द्वारा या बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित होनी चाहिए।

प्रश्न 5 – विकलांग/निशक्त व असमर्थ आश्रितों की चिकित्सा-व्यय की कटौतियों के सम्बन्ध में आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों का उल्लेख कीजिए।

Explain the provisions of Income Tax Act, 1961 regarding deductions for medical treatment of handicapped/disabled and dependants. 

उत्तर – विकलांग व असमर्थ आश्रित की चिकित्सा पर व्यय तथा उनके जीवन-निर्वाह के लिए किए गए जमा के सम्बन्ध में कटौती

(Deductions for Medical Treatment of

Handicapped/Disabled Dependants) 

कटौती किसे मिलेगी – धारा 80DD के अनुसार, एक व्यक्ति या हिन्दू अविभाजित परिवार जो भारत में निवासी है।

किस व्यय के सम्बन्ध में कटौती मिलेगी – (क) व्यय अपने पर आश्रित नि:शक्त व्यक्ति की चिकित्सीय उपचार, परिचर्या, प्रशिक्षण और पुनर्वास के लिए किया है, (ख) जीवन बीमा निगम, अन्य बीमाकर्ता, प्रशासक या निर्दिष्ट कम्पनी के पास नि:शक्त व्यक्ति के भरणपोषण के लिए, बोर्ड द्वारा अनुमोदित किसी स्कीम के अधीन, रकम जमा करायी है।कटौती की मात्रा — (क) कर निर्धारण वर्ष 2018-19 के लिए रू. 75,000 (ख) यदि श्रित गम्भीर नि:शक्तता से ग्रस्त है तो कर निर्धारण वर्ष 2018-19 के लिए रू. 1,25,000।

कटौती की शर्ते

(1) करदाता की मृत्यु के पश्चात (जिसके नाम में धन जमा किया गया है) उस निःशन आश्रित के लाभ के लिए यह जमा धन एकमुश्त अथवा वार्षिकी के रूप में भुगतान किया जाएगा।

(2) करदाता के नि:शक्त आश्रित को अथवा अन्य व्यक्ति को ऐसे आश्रित की ओर भुगतान प्राप्त करने के लिए नामांकित कर दिया है।

(3) चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण-पत्र की प्रति प्रतिवर्ष आयकर की रिटर्न के साथ जमा करानी होगी। _

(4) यदि चिकित्सा अधिकारी के प्रमाण-पत्र में निर्धारित अवधि के पश्चात् नि:शक्तता की सीमा का पुनर्निर्धारण अपेक्षित है तो नया प्रमाण-पत्र लेकर उसकी प्रति रिटर्न के साथ दाखिल करनी होगी अन्यथा कटौती नहीं मिलेगी।

प्रश्न 6 – धारा 80E के प्रावधान पर टिप्पणी कीजिए। 

Write a note on the provision of Section 80E.

उत्तर – उच्च शिक्षा के लिए लिये गए ऋण के वापसी भुगतान के सम्बन्ध में कटौती (धारा 80E)-एक व्यक्ति (करदाता) अपनी उच्च शिक्षा के लिए किसी वित्तीय संस्था अथवा अनुमोदित पुण्यार्थ संस्था से जो कर्ज (Loan) लेता है उसके गत वर्ष में वापसी भुगतान (ब्याज सहित) की राशि की कटौती स्वीकृत होगी। उच्च शिक्षा से अभिप्राय अभियान्त्रिकी (Engineering), चिकित्सा विज्ञान, प्रबन्ध तथा अन्य कोई Applied Science अथवा Pure Science का स्नातक (Graduation) अथवा परा-स्नातक पाठ्यक्रम (P.G.) करने से है (गणित तथा सांख्यिकी सहित)। यह कटौती उस गत वर्ष से प्रारम्भ होकर जिसमें करदाता ने ऋण अथवा उस पर ब्याज का वापसी भुगतान करना शुरू किया हो ठीक बाद में आने वाले निरन्तर सात गत वर्षों तक स्वीकृत होगी अथवा जब तक कि करदाता द्वारा सम्पूर्ण कर्ज अदायगी न हो जाए, जो भी अवधि पहले समाप्त हो। प्रत्येक वर्ष कटौती उस राशि को दी जाएगी जितनी राशि का करदाता ने उस वर्ष भुगतान किया हो।

प्रश्न 7 – धारा 80G के अनुसार बिना सीमा वाले दान जिनके सम्बन्ध में 100% कटौती स्वीकृत है, की व्याख्या कीजिए।

Explain the provisions of no limit donations where deduction is allowed @ 100% u/s 80G. 

उत्तर – बिना सीमा वाले दान जिनके सम्बन्ध में

100% की कटौती स्वीकृत है 

(No Limit Donations where 100% deduction

is Allowed u/s 80G) 

इस प्रकार के दान जो निम्नलिखित संस्थाओं को दिए जाते हैं, निम्नवत् हैं

1. राष्ट्रीय सुरक्षा कोष, 

2. राष्ट्रीय रक्त ट्रांसफ्यूजन (Transfusion) काउंसिल,

3. राष्ट्रीय खेल कोष, 

4. राष्ट्रीय सांस्कृतिक कोष, 

5. राष्ट्रीय मानसिक मन्दता और बहुनिःशक्तताग्रस्त व्यक्ति कल्याण कोष, 

6. प्रधानमन्त्री राष्ट्रीय सहायता कोष, 

7. प्रधामंत्री का आरमीनिया भूकम्प सहायता कोष. 

8. मुख्यमंत्री आन्ध्र प्रदेश का साइक्लोन (Cyclone) राहत कोष, 9. मुख्यमंत्री अथवा लेफ्टीनेण्ट गवर्नर का राहत कोष, 

10. मुख्यमंत्री महाराष्ट्र का भूकम्प राहत कोष, 

11. राज्य सरकार द्वारा गरीबों को चिकित्सा राहत कोष, 

12. मुख्यमंत्री गुजरात भूकम्प पीड़ित सहायता कोष, 

13. जिला साक्षरता समिति, 

14. सेना, हवाई सेना का केन्द्रीय राहत कोष, 

15. अफ्रीका फण्ड, 

16. साम्प्रदायिक सद्भाव के लिए स्थापित राष्ट्रीय प्रतिष्ठान, 

17. भारतीय विश्वविद्यालय अथवा राष्ट्रीय महत्त्व की शिक्षा संस्था, 

18. केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी (तकनीकी) विकास और उपयोजन निधि.

19. बीमारियों का राष्ट्रीय सहायता कोष। 

20. राष्ट्रीय बाल कोष। 

21. केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित स्वच्छ भारत कोष। 

22. केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित स्वच्छ गंगा निधि में निवासी करदाता द्वारा दान। 

23. राष्ट्रीय औषधि दुरुपयोग नियन्त्रण निधि में दान। 

प्रश्न 8 – धारा 80 U में प्रयुक्त कटौती क्या है? 

What is deduction u/s 80 U ? 

उत्तर-कटौती किसे मिलेगी-

(1) एक व्यक्ति जो भारत का निवासी हो। 

(2) जिसे चिकित्सा प्राधिकारी ने नि:शक्त व्यक्ति प्रमाणित किया है।

कटौती की मात्रा – (i) 2018-19 से रू. 75,000, (ii) यदि करदाता गम्भीर नि:शक्तता से ग्रस्त हो तो कर-निर्धारण वर्ष 2018-19 से रू.1,25,0001

कटौती की शर्ते – चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण-पत्र की प्रति प्रतिवर्ष आयकर की रिटर्न के साथ जमा करनी होगी।

घटाने का क्रम – (i) चालू ह्रास, (ii) वैज्ञानिक अनुसन्धान तथा परिवार नियोजन पर पंजीगत व्यय, (iii) आगे लायी गई व्यापारिक हानियाँ, (iv) अशोधित ह्रास, (v) वैज्ञानिक अनुसन्धान तथा परिवार नियोजन पर अशोधित पूँजीगत व्यय।

प्रश्न 10 – घटाने के क्रम के सम्बन्ध में क्या प्रावधान हैं? 

What are the provisions of order of set-off ?

उत्तर – ऐसी दशा में जबकि एक करदाता ह्रास, पूँजीगत व्यय आदि की कटौती की एक साथ माँग करता है तो कटौती का क्रम निम्न प्रकार होगा

(1) चालू ह्रास। 

(2) वैज्ञानिक अनुसन्धान तथा परिवार नियोजन पर पूँजीगत व्यय।

(3) आगे लायी गई व्यापारिक हानियाँ। करदाता हानि को आगे ले जाकर उसकी पूर्ति तभी कर सकता है, जब वह धारा 139 (1) के अन्तर्गत निर्धारित तिथि तक विवरणी दाखिल करके हानि का निर्धारण करा ले।

(4) अशोधित ह्रास। 

(5) वैज्ञानिक अनुसन्धान तथा परिवार नियोजन पर अशोधित पूँजीगत व्यय।

प्रश्न 11- एक व्यक्ति की आय, दूसरे की आय किन परिस्थितियों में मानी जाती है?

In what circumstances is the income of the one person treated as the income of another?

उत्तर – अन्य व्यक्तियों की आय जो करदाता की कुल आय में शामिल की जाती हैं

1. सम्पत्ति का हस्तान्तरण किए बिना आय का हस्तान्तरण होने पर — यह आय हस्तान्तरण करने वाले की आय मानी जाती है। .

2. सम्पत्तियों के खण्डनीय हस्तान्तरण होने पर – इससे होने वाली आय हस्तान्तरण करने वाले की आय मानी जाती है।

3. जीवन-साथी की आय – (i) जीवन साथी को ऐसी व्यापारिक संस्था से मिला हुआ वेतन आदि जिसमें करदाता का सारवान् हित है, (ii) जीवन-साथी को बिना पर्याप्त प्रतिफल के हस्तान्तरण की गई सम्पत्ति से आय करदाता की आय में शामिल की जाती है।

4.अवयस्क बच्चे की आय – अवयस्क बच्चे की आय उसके माता-पिता की आय में शामिल होगी तथा प्रत्येक अवयस्क बच्चे के लिए रू. 1,500 प्रति बच्चा तक की शामिल की गई आय कर-मुक्त होगी। शारीरिक विकलांगता अथवा मन्दबुद्धि वाले बच्चे की आय माता-पिता की आय में शामिल नहीं होती है। इसके अतिरिक्त, अपने श्रम से चाहे शारीरिक हो, चाहे मानसिक कुशलता से अवयस्क की आय भी माता-पिता की आय में शामिल नहीं होती है।

5.जीवन-साथी या पुत्र – वधू के लाभार्थ किसी अन्य व्यक्ति अथवा अन्य संघ को हस्तान्तरण की गई सम्पत्ति से आय-यदि ऐसा हस्तान्तरण बिना पर्याप्त प्रतिफल के किया गया है तो ऐसी आय करदाता की आय में शामिल होगी।6. पुत्रवधू की आय – करदाता द्वारा बिना पर्याप्त प्रतिफल के पुत्र-वधू को हस्तान्तरित सम्पत्ति से आय करदाता की आय में शामिल होगी।

प्रश्न 12 – आय का मिलाना पर टिप्पणी लिखिए। 

Write a short note on Clubbing of Income. 

उत्तर – आय का मिलाना

(Clubbing of Income) 

मानी गई आयें प्रत्यक्ष या वैधानिक रूप से करदाता की आय न होने पर भी उसकी कल आय में शामिल की जाती हैं। इसी प्रक्रिया को आय का मिलाना (Clubbing of Income) कहते हैं। 

अन्य व्यक्तियों की आय जो करदाता की कुल आय में शामिल की जाती हैं :

1. सम्पत्ति का हस्तान्तरण किए बिना आय का हस्तान्तरण – यदि कोई व्यक्ति अपनी किसी सम्पत्ति की आय किसी अन्य व्यक्ति को हस्तान्तरित कर देता है परन्तु उस सम्पत्ति के स्वामित्व का हस्तान्तरण नहीं करता है तो ऐसी आय हस्तान्तरण करने वाले (Transferor) की आय मानी जाएगी।

उदाहरण – मिस्टर X अपनी दो कारें टैक्सी के रूप में चलाते हैं और उन्होंने उनकी आय प्राप्त करने का अधिकार अपने मित्र मिस्टर Y को दे दिया है किन्तु टैक्सियों का स्वामित्व मिस्टर X का ही बना रहता है। यहाँ मिस्टर Y को टैक्सियों से प्राप्त आय मिस्टर X की आय मानी जाएगी।

2. सम्पत्तियों का खण्डनीय हस्तान्तरण – खण्डनीय हस्तान्तरण के अन्तर्गत प्राप्त हुई सम्पत्ति से आय हस्तान्तरण करने वाले की आय मानी जाएगी और उसी की कुल आय में जोड़ी जाएगी। उदाहरण-मिस्टर X ने अपना मकान मिस्टर Y के नाम 4 वर्ष के लिए कर दिया और इसका किराया भी मिस्टर Y को प्राप्त हुआ। किराये की यह आय मिस्टर X की आय मानी जाएगी।

अखण्डनीय हस्तान्तरण – सम्पत्तियों के अखण्डनीय हस्तान्तरण की दशा में उस सम्पत्ति से आय उस व्यक्ति की मानी जाएगी जिसको हस्तान्तरण हुआ है। _

जीवन-साथी की आय (Income of Spouse) – जीवन-साथी से आशय पति-पत्नी से है। पति के लिए उसकी पत्नी जीवन-साथी है तथा पत्नी के लिए उसका पति उसका जीवन-साथी है। एक व्यक्ति की कुल आय में उसके जीवन-साथी की निम्नलिखित आयें शामिल की जाती हैं

(अ) एक व्यक्ति के जीवन साथी को एक ऐसी व्यापारिक संस्था से मिला हुआ वेतन, कमीशन, फीस अथवा अन्य किसी प्रकार का पारिश्रमिक जिसमें उस व्यक्ति का सारवान हित है। सारवान हित वाले व्यक्ति की कुल आय में जीवन साथी का ऐसा पारिश्रमिक शामिल होगा।अपवाद (Exception) – यदि उपर्युक्त प्रकार का पारिश्रमिक का भुगतान जीवन-साथी की तकनीकी अथवा पेशवर योग्यता (Prafacinnamonalification) के

कारण हुआ हो तो जीवन साथी को दिया गया ऐसा पारिश्रमिक उस व्यक्ति (जीवन-साथी) की आय में शामिल नहीं किया जाएगा, जिसका उस व्यापार में सारवान हित है।

प्रश्न 13 – बेनामी व्यवहार क्या है? 

What is Benami Transaction ?उत्तर – यदि कोई व्यक्ति कर बचाने के उद्देश्य से व्यवहार वास्तविक व्यक्ति के नाम में न करके, किसी अवास्तविक व्यक्ति के नाम में करता है तो ऐसे व्यवहार को ‘बेनामी व्यवहार’ कहते हैं और उस नकली व्यक्ति को ‘बेनामीदार’ कहते हैं। यदि कर-निर्धारण अधिकारी की सम्मति में कोई व्यवहार बेनामी है तो वह उस व्यवहार की आय वास्तविक व्यक्ति की आय में मान सकता है और उसी व्यक्ति से उस व्यवहार की आय पर कर लिया जा सकता है।

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