Personal Selling B.Com 3rd Year Notes – Principles Of Marketing Study Material

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वैयक्तिक विक्रय का अर्थ एवं परिभाषाएँ

(Meaning and Definitions of Personal Selling) 

वैयक्तिक विक्रय का बहुत अधिक महत्व है। इसमें वस्तुओं के विक्रय के लिये ग्राहक एंव विक्रयकर्ता में आमने-सामने बातचीत होती है और विक्रयकर्त्ता ग्राहक को प्रभावित कर आकरने की चेष्टा करता है। इस सम्बन्ध में विभिन्न विद्वानों की परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं

  1. अमेरिकन मार्केटिंग एसोसियेशन के अनुसार, “विक्रय करने के उद्देश्य से एक या अधिक वित ग्राहकों के साथ बातचीत में मौखिक प्रस्तुति।”
  2. स्टाण्टन के अनुसार, “वैयक्तिक विक्रय में अकेला व्यक्तिगत सन्देश शामिल होता है जो यक्तिगत सन्देश, विज्ञापन, विक्रय संवर्द्धन व अन्य संवर्द्धन उपकरणों के विपरीत है।”

वैयक्तिक विक्रय की विशेषताएँ

(Characteristics of Personal Selling) 

वैयक्तिक विक्रय की निम्नांकित विशेषताएँ हैं-

  1. वैयक्तिक विक्रय प्रत्यक्ष विक्रय की एक विधि है। 
  2. इसमें विक्रेता एवं सम्भावित क्रेता आमने-सामने होते हैं और उनमें भौगोलिक दूरी नहीं होती। 
  3. वैयक्तिक विक्रय विपणन कार्यक्रम का एक अंग है। 
  4. वैयक्तिक विक्रय एक सार्वभौमिक क्रिया है जिसका प्रयोग हम सभी किसी न किसी रूप में अवश्य करते हैं। 
  5. हेनरी फोर्ड के अनुसार, “वैयक्तिक विक्रय एक मानवीय मस्तिष्क से दूसरे मानवीय मस्तिष्क को प्रभावित करने में अन्तर्निहित है।” 
  6. वैयक्तिक विक्रय ग्राहक प्रधान दृष्टिकोण है। 
  7. वैयक्तिक विक्रय सृजनात्मक कला है। 
  8. विक्रय के उद्देश्य से सम्भावित क्रेताओं के सम्मुख मौखिक प्रस्तुति है। 
  9. यह विज्ञापन एवं विक्रय संवर्द्धन से भिन्न है। 
  10. वैयक्तिक विक्रय में व्यक्तिगत एवं सामूहिक व्यवहार सम्मिलित हैं। 
  11. वैयक्तिक विक्रय के कारण विक्रय सम्बन्धों के साथ-साथ गहन मित्रतापूर्ण सम्बन्ध भी स्थापित हो सकते हैं।

विज्ञापन एवं विक्रयकला (वैयक्तिक विक्रय) में अन्तर 

(Distinction between Advertisement and Salesmanship/Personal Selling)

वैयक्तिक विक्रेताओं के प्रकार

(Types of Personal Sellers) 

वैयक्तिक विक्रेताओं के कार्य भिन्न-भिन्न प्रकार के होने के कारण विक्रेता भिन्न-भिन्न प होते हैं। मैक्कार्थी ने विक्रेताओं के कार्यों को ध्यान में रखते हुए तीन प्रकार बताए हैं__

  1. आदेश प्राप्त करने वाले विक्रेता, 2. आदेश लेने वाले विक्रेता, 3. सहारा देने वाले विजेता इसी प्रकार प्रो० बर्टेड आर० केन्फील्ड ने वैयक्तिक विक्रेता के चार प्रकार बताए हैं-1. आवश्यकता पूर्ति विक्रेता, 2. सृजनात्मक विक्रेता, 3. पेशेवर विक्रेता, 4. प्रतिस्पर्धी विक्रेता। ___

निष्कर्ष रूप में वैयक्तिक विक्रेताओं को निम्नलिखित दो आधारों पर विभाजित किया जा सकता हैं।

  1. प्रकृति के आधार पर-(i) आवश्यकता पूर्ति विक्रेता, (ii) पेशेवर विक्रेता, (iii) सृजनात्मक विक्रेता, (iv) प्रतिस्पर्धी विक्रेता।
  2. ग्राहकों के आधार पर-(i) उपभोक्ता विक्रयकला/विक्रेता, (ii) वाणिज्यिक विक्रेता, (ii) औद्योगिक विक्रेता।

वैयक्तिक विक्रय (विक्रयकला) की प्रक्रिया

[Process of Personal Selling (Salesmanship)] 

वैयक्तिक विक्रय प्रक्रिया से आशय वस्तुओं एवं सेवाओं के विक्रय करने के सन्तोषप्रद तरीके से है। अन्य शब्दों में, यह विक्रय कार्य सम्पन्न करने की वह वैज्ञानिक विधि है जिसमें ग्राहक को अधिकतम सन्तुष्टि प्रदान करते हुए न्यूनतम समय एवं लागत पर अधिकतम विक्रय करने का प्रयास किया जाता है। एडविन चार्ल्स ग्रीफ के शब्दों में, “विक्रय प्रक्रिया एक क्रमबद्ध अनुक्रम है जा सम्भावित ग्राहकों को कुछ निर्णय लेने में मार्गदर्शन करती है। यह वह ढाँचा है जिस पर विक्रय प्रस्तुतीकरण का निर्माण किया जाता है।” वैयक्तिक विक्रय/विक्रय प्रक्रिया का आशय विक्रय कार्य करने की एक वैज्ञानिक विधि से है जिसके अन्तर्गत एक विक्रेता ग्राहक की सम्भावना का पता लगाता है, उससे सम्पर्क करता है, वस्तु का प्रदर्शन करता है, यदि आपत्तियाँ हों तो उनका निवारण करता है, सौदे की समाप्ति करता है । अनुगमन करता है। जहाँ तक वैयक्तिक विक्रय की प्रक्रिया के कदमों का प्रश्न है इसके प्रत्युत्तर में यह कहा सकता है कि विभिन्न विद्वानों ने विभिन्न कदम बतलाये हैं, जैसे-प्रो० एडविन चाल्स ग्रा अनुसार वैयक्तिक विक्रय में चार चरण होते हैं-AC4 अर्थात Attention ध्यानाकर्षण, Creams Interest रूचि उत्पन्न करना, Creating Desire इच्छा पैदा करना, Conviction विश्वास, एव । समापन आदि। स्टिल,कण्डिफएवं गोवोनी ने वैयक्तिक विक्रय प्रविधि को दो भागों में विभक्त किया है-

  1. सम्भावनाओं का निर्धारण अथवा सम्भावी ग्राहकों की खोज-

(i) सम्भावी ग्राहकों को परिभाषित करना।  (ii) सम्भावी ग्राहकों की खोज करना।  (iii) सम्भावी ग्राहकों की आवश्यकता का निर्धारण करना।  (iv)संस्था के उत्पादों के साथ प्रत्येक सम्भावी ग्राहक की आवश्यकताओं को सम्बद्ध करना। 

  1. सम्भावी ग्राहकों को क्रेताओं में बदलना

(i) विक्रय प्रतिरोध दूर करना।  (ii) विक्रय का समापन करना।

किर्कपेट्रिक ने वैयक्तिक विक्रय को छः कदमों में विभक्त किया है-1. विक्रय कहानी का कार. 3. विक्रय कहानी कहना, 4. प्रदर्शन, 5. आपत्तियों का निवारण, एवं 6. विक्रय का समापना।

हरबर्ट एन० केसन ने सूत्र रूप में वैयक्तिक विक्रय प्रक्रिया के छ: कदम बतलाये- RIDSAC:R=Reception (स्वागत) I = Inquiry (पूछताछ)  D=Demonstration (UGXfA).  S=Selection (चयन)  A= Addition (संवर्द्धन)  C=Commendation (प्रशंसा एवं विदाई)


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